कथक की परंपरा को आगे बढ़ाती विधा लाल

विधा लाल कथक के क्षेत्र में जाना-माना नाम बन चुकी हैं. जयपुर घराने की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली विधा लाल सन 2011 में उस समय सुर्खियों में आ गयीं जब उन्होंने सबसे कम समय में सबसे ज्यादा बार अपनी धुरी पर घूमने का रिकॉर्ड बनाया. कथक करते हुए उऩ्होंने एक मिनट में 103 बार धूमकर दुनिया भर में अपनी कला का लोहा मनवा दिया. प्रतिभाशाली विधा कथक के मामले में अपनी जबरदस्त सोलो पर्फॉर्मेंस की धाक देश ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जमा चुकी हैं.

उन्हें 2010 में प्रतिष्ठित श्री कृष्ण गंगा सभा एंडाउमेंट अवॉर्ड, नृत्यजयंतिका और आठवें देवदासी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा 2013 में उन्हें कल्पना चावला उतकृष्टता अवॉर्ड और 2014 का श्री जयदेव राष्ट्रीय युवा प्रतिभा पुरस्कार भी दिया गया है. संगीत नाटक अकादमी ने उन्हें 2017 के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया. वे कलाकार के रूप में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) से संबध हैं और दिल्ली दूरदर्शन की उतकृष्ट श्रेणी की कलाकार हैं.

दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई कर चुकी विधा ने राष्ट्रीय कथक संस्थान से विधिवत कथक का प्रशिक्षण भी लिया है. छह साल की छोटी उम्र में ही उन्होंने कथक का प्रशिक्षण शुरू कर दिया था और तेरह साल तक कथक सीखती रहीं. कथक के साथ-साथ विधा ने तबला, गायन और योग का भी प्रशिक्षण लिया. इसके बाद विधा ने गुरू-शिष्य परंपरा का पालन करते हुए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित जयपुर घराने की प्रसिद्ध कथक नृत्यांग्ना गीतांजली लाल को अपना गुरू बना लिया. आज विधा उनकी बहु भी हैं. विधा के पति अभिमन्यु लाल भी उनके साथ परफॉर्म करते हैं औऱ उनका परिवार फिजी में रहता है.

उनके पिता उमेश जोशी मूल रूप से राजस्थान के अलवर के रहने वाले थे जो बाद में दिल्ली में बस गये और पत्रकारिता से जुड़े हैं. विधा मानती हैं कि उन्होंने कथक को नहीं बल्कि कथक ने उन्हें चुना है. वह इसके लिए ईश्वर की शुक्रगुजार भी रहती हैं. नृत्य परंपरा को आगे बढ़ाने और नये कलाकारों को कथक के प्रति प्रेरित करने के लिए वह स्किप मैके जैसी कई संस्थाओं से भी जुड़ी हैं.