राजनीति के नये यूथ आइकॉन हैं भाजपा के युवा तुर्क तेजस्वी सूर्या

दक्षिण भारत में भाजपा के पोस्टर ब्वॉय तेजस्वी सूर्या चुनाव जीतकर मौजूदा लोकसभा में पहुंचने वाले देश के युवा चेहरों में से एक हैं. 28 साल के सूर्या भाजपा और बैंग्लूरू दक्षिण का प्रतिनिधित्व करते हैं. हालांकि ये सीट पहले भी भाजपा के पास ही थी और दक्षिण भारतीय राजनीति के लीजेंड माने जाने वाले अनंत कुमार वहां से सांसद थे, लेकिन उनके असामयिक निधन से पैदा हुए शून्य को भरने में इस युवा राजनेता ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है. ऊर्जा से भरपूर सूर्या ने चुनाव के दौरान ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं कीं और उनके भाषणों ने मानों समां बाध दिया. 

16 नवंबर 1990 को चिकमंगलूर में जन्मे सूर्या के पिता एक्साइज विभाग में वरिष्ठ अधिकारी थे. वे बचपन से ही देश सेवा को कितने समर्पित थे इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि महज नौ साल की उम्र में अपनी 17 पेंटिंग बेच कर उससे जमा हुई 1220 रुपये की रकम उन्होंने कारगिल रिलीफ फंड को डोनेशन में दे दिया था. सन 2001 में उन्हें राष्ट्रीय बालश्री सम्मान भी मिला था.   

 मात्र 18 वर्ष की आयु में सन 2008 में उन्होंने बैंग्लूरू के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा में सुधार के लिये ‘अराइज इंडिया फाउंडेशन’ की शुरूआत की. उनकी यह कोशिश आज भी जारी है. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विचारों से प्रभावित सूर्या छात्र राजनीति संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं. इसके अलावा वे भाजपा की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्च के महासचिव भी रहे हैं. कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान उन्हें पार्टी का सोशल मीडिया इंचार्ज भी बनाया गया था. सूर्या को करीब से जानने वाले कहते हैं कि स्कूल के दौरान ही उन्हौंने राजनीतिक परिपक्वता हासिल करनी शुरू कर दी थी. स्कूल में ही उन्होंने राजनित से प्रेरित चर्चाओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था.

युवा तेजस्वी पेशे से वकील हैं और सामाजिक कार्यों में खासी दिलचस्पी लेते हैं. वह कई सालों समाज सेवा का काम कर रहे हैं.  

जब उन्हें चुनाव लड़ने के लिए चुना गया तो पार्टी के ज्यादातर लोग हैरान रहे गये. राजनीति में उनका नया होना उनकी कमी माना जा रहा था, लेकिन अपनी सूझ-बूझ और क्षमता से उन्होंने न केवल अपने विरोधियों का कड़ाई से मुकाबला किया बल्कि अपनी योग्यता साबित भी कर दी.