रंगों के साथ प्रकाश और समय को कैनवास पर उकेरती हैं तान्या गोयल

तान्या गोयल की रचनाएं किसी अमूर्त की खोज में बनायी गयी वे कलाकृतियां हैं जिनकी आज दुनिया कायल है. रंगों के संयोजन की अपनी समझ को जब वह कैनवास या किसी और माध्यम पर व्यक्त करती हैं तो उसे देखने वाले कहीं गहरे में उतर जाते हैं. वह चारकोल, एल्यूमीनियम, कंक्रीट, कांच, मिट्टी, माइका, ग्रेफाइट और फॉयल सहित विभिन्न प्रकार की सामग्रियों से अपना पिगमेंट बनाती हैं. विशालकाय कैनवास पर उनकी कलाकृतियों को देखकर लगता है जैसे उन्होंने प्रकाश, समय और ध्वनि तंरगों को एक सात उकेर दिया हो. कला समीक्षकों का कहना है कि तान्या की रचनाएं गणित के फॉर्मूलों सरीखी गढ़ी जाती हैं और भौतकी के सिद्धांतों का पालन करती हैं. उनकी यह कला किसी सृजन और विध्वंस को एक साथ महसूस किया जा सकता है.

1985 में दिल्ली में पैदा हुई तान्या गोयल ने बड़ौदा के एमएस विश्विद्यालय और शिकागो के स्कूल ऑफ आर्ट्स इंस्टीट्यूट से फाइन आर्ट्स की पढ़ाई की है. इसके बाद 2010 में उन्होंने प्रतिष्ठित येल विश्विद्यालय से फाइन आर्ट्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की.
उनकी कलाकृतियां कई प्रतिष्ठित कला उत्सवों और आर्टगैलरियों की शोभा बढ़ा चुकी हैं. दिल्ली के किरण नादर कला संग्रहालय, फिलाडेल्फिया आर्ट म्यूजियम, कनाडा की आर्ट गैलरी, और ज्यूरिख यूबीएस बैंक में भी उनकी कृलाकृतियां शोभा बढ़ा रही हैं. वह दुनिया भर की कला प्रदर्शनियों में कई पुरस्कार भी जीत चुकी हैं.

तान्या को बचपन से ही रंगों से लगाव था. उनके परिजन कपड़ा बनाने के काम करते थे लेकिन तान्या की नजर हमेशा ऐसे सामान पर रहती जिसे बेकार समझकर फेंक दिया जाता था. तान्या कहती हैं, “मेरे माता-पिता के उद्योग में, वे कपड़ों को नई जान देने के लिए बेहतरीन रंगों का मेल करते थे. लेकिन मुझे हमेशा से उसकी तलाश रहती जिसे अस्वीकार कर दिया जाता था. अनजाने में ही सही इसने मेरे अवचेतन को गहराई से प्रभावित किया. आज मेैं रंगों के बारे में उसी तरह से सोचती हूं.”