रीतेश के आइडिया ने बदल दी होटल उद्योग की सूरत

रीतेश अग्रवाल छोटी उम्र में स्टार्टअप के क्षेत्र में दुनियाभर में जाना-माना नाम बन चुके हैं. लोगों को घर बैठे होटल बुकिंग की सुविधा देने वाली उनकी कंपनी ओयो रूम्स आज 5 अरब डॉलर यानी 36 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य की कंपनी बन चुकी है. आज दुनियाभर की कंपनियां उनके इस आइडिया में निवेश कर रही हैं.

रीतेश कुछ ही सालों में केवल भारत ही नहीं आज वह दुनिया भर के 230 शहरों में 10 लाख होटल रूम्स का प्रबंधन करते हैं. उनके इस प्रयास ने भारत में होटल और पर्यटन उद्योग का नक्शा ही बदलकर रख दिया है. खास बात यह है कि इसकी शुरुआत उस उम्र तब की जब युवा स्कूल से निकलकर कॉलेज की दहलीज पर पहुंचता है.

16 नवम्बर 1993 को उड़ीसा राज्य के कटक जिले के बीसाम में कारोबारी परिवार में जन्मे रीतेश इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते थे और इसके लिए राजस्थान के कोटा में तैयरी कर रहे थे. इसी दौरान वह समय निकालकर घूमने और बिजनेस चर्चाओं में शामिल होने के लिए दिल्ली और दूसरी जगहों पर आते जाते रहते. खर्च बचाने के लिए वह सस्ते होटलों में रुकते जिसमें कई बार उन्हें इसके लिए काफी परेशानी होती. इसी से उन्हें ऑनलाइन होटल बुकिंग सर्विस शुरू करने का आइडिया आया. कारोबार का जुनून इस कदर हावी हुआ कि उन्होंने इसे हकीकत बनाने के लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी.

2012 में 19 साल की उम्र में रीेतेश ने पहले स्टार्ट-अप ‘ओरावेल होटल’ शुरू की. जिसे घाटे के चलते इसे बंद करना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. रीतेश ने देखा कि समस्या सस्ते होटल नहीं बल्कि कम कीमत में अच्छी सेवा की थी. उन्होंने 2013 में ओयो रूम्स् के साथ फिर से अपना सफर शुरू किया. इस बार उनका जोर कम कीमत में उम्दा होटल सेवा पर था.

द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने उनके ओयो रूम्स को भविष्‍य की कामयाब कंपनियों में शुमार किया. कॉलेज ड्रॉप आउट्स को स्टार्टअप के लिए मदद करने वाली प्रतिष्ठित थेल फैलोशिप के पाने वाले वह पहले भारतीय थे. प्रतिष्ठित फोर्ब्‍स मैग्जीन ने उन्हें 30 प्रतिभाशाली युवाओं में जगह दी और टाटा फर्स्ट डॉट ने उन्हें 50 प्रमुख उद्यमियों में शामिल किया. उन्हें टाई-ल्यूमिस एंटरप्रनियोरियल एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है. हाल ही में उन्होंने चीन में ओयो की शुरुआत की है जिसने वहां कदम रखते ही धूम मचा दिया है.