छोटी उम्र में ही पार्थ जिंदल बने बिजनेस से बादशाह

महज 29 साल की छोटी उम्र में पार्थ जिंदल की गिनती देश के जाने माने कारोबारियों में की जाती है. उन्होंने सीमेंट, स्टील, पेंट्स से लेकर स्पोर्ट्स तक के धंधे में अपनी पैठ बना ली है. 2009 में शुरू हुई जेएसडब्लू सीमेंट को पार्थ ने 2017 तक 110 करोड़ का मुनाफा कमाने वाली कंपनी बना दिया. 
पार्थ जिंदल ने प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्विद्यालय से एमबीए की पढ़ाई की है. इससे पहले उन्होंने 2012 में ब्रॉन विश्विद्यालय से राजनीतिक शास्त्र और अर्थशास्त्र में बीए की पढ़ाई की. उनकी स्कूली शिक्षा मुम्बई के कैथेड्रल एंड जॉन केनन स्कूल और इंग्लैंड के सेवेनओक स्कूल से हुई. पुश्तैनी कारोबार के अतिरिक्त उन्होंने स्पोर्ट्स जैसे सेक्टर में भी अपनी धाक जमायी है. न केवल क्रिकेट और फुटबॉल जैसे ग्लैमरस खेल बल्कि कबड्डी जैसे खेलों की भी उनकी अपनी टीम है. इतना ही नहीं खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय ट्रेनिंग और सुविधाओं के लिये उऩ्होंने इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स भी शुरू किया है. 
मई 2019 में पार्थ ने जेएसडब्लू पेंट्स की शुरूआत की है. उनका उद्देश्य इसे 2022 तक 2000 करोड़ का कारोबार करने वाली कंपनी बनाने का है. पार्थ की दूरदर्शिता के चलते कंपनी ने शुरूआत से ही बाजार में अपना नाम जमा लिया है. यह भारतीय बाजार की पहली ऐसी कंपनी है जो हर रंग एक ही कीमत पर उलब्ध करा रही है. इसके अलावा कंपनी ने इंटीरियर, एक्सटीरियर, लकड़ी और धातु के लिए पानी वाले रंगों की पूरी श्रृंखला भी पेश की है.   पार्थ कारोबार के अतिरिक्त अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी अच्छी तरह निभाते हैं. महाराष्ट्र के पालघर जिले में कुपोषण से लड़ने में बच्चों और महिलाओं की मदद करते हैं. इसके लिए उन्होंने जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन की शुरुआत की जिसमें छह साल से कम उम्र के बच्चों के विकास संकेतकों की निगरानी एक एंड्रॉइड-आधारित ऐप के जरिये की जाती है. इसमें स्थानीय महिलाओं को बच्चों और माताओं की तस्वीरें लेकर उन्हें मोबाइल एप्लिकेशन में जानकारी दर्ज करने के लिये तैयार किया गया है. यशोदा नाम से संबोधित इन महिलाओं द्वारा भेजी गयी जानकारियां कुपोषण के प्रभावों की सीधी और सटीक जानकारी देती हैं. इससे डॉक्टर और अधिकारी यह तह कर पाते हैं कि किस इलाके में किस तरह की योजनाओं की जरुरत है. उनकी इस पहल के चलते पालघर के तीन तालुकाओं में कुपोषण में भारी कमी आई है. 
मशहूर कारोबारी ओ पी जिंदल के पोते पार्थ अपने पिता सज्जन और संगीता जिंदल की तीसरी संतान और इकलौते बेटे हैं. पार्थ को 2018 में जीक्यू के 50 सबसे प्रभावशाली भारतीयों में से एक चुना गया. समाज में उनके योगदान और राष्ट्र को विश्व स्तर पर एक अमिट छाप बनाने में मदद करने के लिए उन्हें उपराष्ट्रपति द्वारा जश्न ए यंगिस्तान पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. उनकी देखरेख में  जेएसडब्यूल स्पोर्ट्स को खेल के क्षेत्र में योगदान के लिए 2018 में राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चुना गया था.