बीजू रविंद्रन – तकनीक की चाबी से खोले शिक्षा के नये द्वार

तकनीक के इस्तेमाल से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन के लिये बीजू रवीन्द्रन आज एक जानी-मानी हस्ती बन गये हैं. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद केरल के एक तटीय गांव के इस युवा ने कोचिंग चलाने से लेकर मिलियन डॉलर कंपनी खड़े करने तक का सफर चंद सालों में तय किया है. अपनी काबिलियत और विश्वास के दम पर बीजू ने वो कर दिखाया है जिसके लिये आज दुनिया उन्हें सालम कर रही है. उनकी बनायी बीजू लर्निंग ऐप्प दुनिया की सबसे बड़ी एजुकेशनल एप्लीकेशन बन चुकी है. जिसकी कीमत 37000 करोड़ रुपये आंकी गयी है.

यूके की एक शिपिंग कंपनी में बतौर इंजीनयर काम कर रहे बीजू ने शिक्षा के क्षेत्र में कैसे छलांग लगायी इसकी कहानी भी बेहद दिलचस्प है। दरअसल उन्होंने अपने कुछ दोस्तों को मैनेजमेंट संस्थान आईआईएम में एडमिशन के लिये होने वाली परीक्षा कैट के लिये पढ़ाना शुरू किया. कहते हैं कि इस परीक्षा में पहले प्रयास में ही शत-प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद भी उन्होंने कभी आईआईएम में एड्मीशन ही नहीं लिया. सन 2006 में जब उन्होंने पढ़ाना शुरू किया तो उनसे पढ़ने वालों की तादाद बढ़ने लगी. ये संख्या इतनी ज्यादा होती गयी कि एक कमरे से शुरू हुआ उनका सफर बड़े हॉल और उसके बाद स्टेडियम तक पहुंच गया. सन 2011 में उन्होंने थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड की शुरूआत की, जिसने 2015 में बीजू ऐप्प की शुरूआत की. महज तीन महीनों में 20 लाख से अधिक छात्र इसे डाउनलोड कर चुके थे.

इस ऐप्प के जरिये मुख्य रूप से कठिन माने जाने वाले गणित और विज्ञान को सरल तरीके से समझाने पर जोर दिया जाता है. 2018 तक इसे डेढ़ करोड़ से ज्यादा छात्र डाउनलोड कर चुके थे. जिनमें से 9 लाख से ज्यादा पेड सब्सक्राइबर्स हो चुके थे. एक अनुमान के मुताबिक बीजू की कंपनी भारत ही नहीं दुनियाभर में अपने विस्तार की योजना पर काम कर रही है. कई देशों में तो उन्होंने काम करना शुरू भी कर दिया है. 2013 में उनकी कंपनी में निवेश का सिलसिला शुरू हुआ जो 2019 आने तक 785 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका था.