खबरों की दुनिया के नये महारथी हैं आदित्य चोपड़ा

1964 में स्थापित और इमरजेंसी के दौर में निर्भीक खबरों और तेजतर्रार लेखों से अपनी पहचान बनाने वाले पंजाब केसरी का इतिहास देशभक्ति और पत्रकारिता के आदर्शों के लिये शहादत से जुड़ा है. पंजाब में फैले आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत इसके संस्थापकों लाला जगतनारायण और उनके पुत्र रमेश चंद्र ने अपनी जान देकर चुकाई जब आतंकवादियों ने इन दोनों की हत्या कर दी. इसी निर्भीक पत्रकारिता की परंपरा के चौथी पीढ़ी के वाहक हैं इसके युवा निदेशक आदित्य चोपड़ा. उन्हें इस ऐतिहासिक समाचार पत्र व प्रकाशन को आधुनिक स्वरूप देने और डिजिटल मीडिया कारोबार के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिये जाना जाता है. चंद सालों में ही आदित्य ने न केवल करोबार को बखूबी संभाला बल्कि उसे नयी बुलंदियों तक पहुंचाया. समाचार माध्यमों का विस्तार करते हुए उन्होंने परंपरावादी विचारधारा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के साथ प्रयोग किये. इनमें उऩ्हें कामयाबी भी मिली. कारोबार के विस्तार के लिये उऩ्होंने न केवल नये बाजार तलाशे बल्कि नयी रणनीति के साथ भी काम किया.

कारोबारी प्रतिद्वंदिता को भी उन्होंने अपने तरीके से निपटा और नए रास्ते अपनाये. आदित्य के नेतृत्व में पंजाब केसरी (दिल्ली) समूह ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक लघु फिल्म का निर्माण किया. ‘समुंदर के सिकंदर’ नाम की यह फिल्म नौसेना के जवानों के साहसिक कारनामों पर आधारित थी. इसकी शूटिंग गोवा में की गयी थी.

आदित्य चोपड़ा केवल अखबार का कारोबार ही नहीं संभालते, बल्कि ज्वलंत मुद्दों पर उनकी कलम भी खूब बोलती है. उनकी कलम चलती है तो अच्छों अच्छों की छुट्टी कर देते हैं. उनके पिता अश्विनी चोपड़ा अखबार के संपादक और 16वीं लोकसभा में करनाल के सांसद रह चुके हैं. मां किरण चोपड़ा मशहूर शिक्षाविद होने के साथ-साथ समाजसेवा का काम बखूबी करती हैं. दोनों से मिले संस्कारों की छाया आदित्य के व्यक्तिव में स्पष्ट नजर आती है.

पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए उन्हें 2015 में उन्हें मातृश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. इससे पहले उनके परिवार की तीन पीढ़ियों को भी इस पुस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.