विकासवाद और राष्ट्रवाद का अनूठा संगम हैं योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देश के एक ऐसे फायरब्रांड नेता के तौर पर जाना जाता है जिनकी सोच विकासवादी और देशभक्ति से ओतप्रोत है. अनेक ऐसे मौके आये हैं जब उनके बेबाक बोल ने राष्ट्रवादियों को उद्वेलित किया है. उन्होंने तमाम राष्ट्रवादी संगठनों में सक्रिय भूमिका निभायी है.

योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय बिष्ट है, और वे उत्तराखंड के मूल निवासी हैं. गढ़वाल यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई करने के बाद उन्हें गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने दीक्षा देकर योगी बनाया था. 1998 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. 1998 में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर जब वे संसद पहुंचे तो सबसे कम उम्र के सांसद थे. तब उन्होंने बहुत ही कम अंतर से जीत दर्ज की थी, लेकिन इसके बाद हर चुनाव में उनकी जीत का अंतर बढ़ता गया और वे 1999, 2004, 2009 तथा 2014 में सांसद चुने गये. पूर्वांचल पर मजबूत पकड़ रखने वाले योगी ने राष्ट्रवादी हिंदुओं को एक मंच के नीचे लाने के लिये न्होंने हिंदू युवा वाहिनी का भी गठन किया है.

अपने बयानों को लेकर सुर्खियों का हिस्सा बनने वाले योगी का कद धीरे-धीरे इतना बढ़ने लगा कि वे जहां खड़े होते, वहीं सभा शुरू हो जाती, वे जो कुछ भी बोल देते, उनके समर्थकों के लिए वो कानून बन जाता था. पार्टी में भी उनकी धाक जमने लगी. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी स्टार प्रचारक थे और इस चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के साथ ही वो सीएम की कुर्सी पर आसीन हुए. मुख्यमंत्री बनते ही योगी ने केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का राज्य में उचित ढंग से क्रियान्वयन पर बल दिया. हिन्दू संस्कृति को बचाए-बनाये रखने के लिए हिन्दू त्योहारों को बड़े स्तर पर मनाये जाने के आदेश दिए, गौ-तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया. उनके कार्यकाल के दौरान 2019 में प्रयागराज में आयोजित कुम्भ मेला इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो चुका है.

आदित्यनाथ अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण के मजबूत पैरोकार हैं. इनकी छवि कथित रूप से एक देशभक्त की है. इनकी ख़ासियत है कि ये जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हैं. ट्विटर इंडिया ने वर्ष 2018 की सबसे चर्चित 10 हस्तियों की जो सूची जारी की है. इसमें पांच राजनीतिज्ञ हैं और उनमें नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ चौथे नंबर पर हैं.

व्यक्तित्व, रणनीतिक समझ, जिम्मेदारी, पार्टी में प्रभाव, छवि और राजनीतिक दखल आदि मानकों को ध्यान में रख कर किये गये देशव्यापी सर्वे में योगी आदित्यनाथ को धाकड़ नेताओं में अहम स्थान प्राप्त हुआ है.