चुनौतियों के बीच चट्टानी संकल्प की कहानी: विनीता सिंघानिया

Vineeta Singhania

औरत को गृह लक्ष्मी भी कहते हैं और यही लक्ष्मी जब घर के व्यापार में प्रवेश करती है तो सीमेंट को भी सोना बना देती है. जी हाँ सीमेंट को सोना… ये कहानी है जेके लक्ष्मी सीमेंट की मुखिया विनीता सिंघानिया की. विनीता जेके लक्ष्मी सीमेंट की साल 2006 से मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. सिंघानिया किसी भी बड़ी सीमेंट कंपनी की पहली महिला सीईओ हैं. हालांकि पारिवारिक व्यवसाय में आना विनीता का चुनाव नहीं बल्कि उनकी मजबूरी थी. वर्ष 1988 से पहले विनीता एक फुल टाइम हाउस वाइफ थीं लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था. एक दिन अचानक विनीता के पति श्रीपति सिंघानिया की मृत्यु हो गयी और कंपनी की जिम्मेदारी विनीता के कन्धों पर आ गयी. इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी को निभा पाना आसान नहीं था लेकिन ये संभव हो पाया विनीता के जेठ स्व.हरी शंकर सिंघानिया की मदद से.

हरी शंकर ने विनीता को समझाया कि कंपनी संभालना घर संभालने जैसा ही है. फर्क बस इतना है कि कंपनी में करोड़ों का बजट संभालना पड़ता है और घर में लाखों का. विनीता ने इस बात को समझा और 16 सालों से घर के बजट को संभालने का उनका अनुभव रंग लाया. विनीता के काम संभालने के कुछ साल बाद कंपनी ने अपनी क्षमता को तिगुना करने के लिए 700 करोड़ रु.का निवेश किया. इस विस्तार ने उन्हें सीमेंट कारोबार की वित्तीय और तकनीकी जानकारी को समझने में मदद भी की।

हालांकि बिज़नेस करना विनीता के लिए उतनी बड़ी चुनौती नहीं था क्योंकि वो एक बिज़नेस फैमिली से ताल्लुक रखती थीं और उनके पास दिल्ली के श्रीराम लेडी कॉलेज से डिग्री भी थी. सबसे बड़ी चुनौती थी जेके लक्ष्मी सीमेंट की टीम का भरोसा जीतने की और अपने आपको उनके सामने साबित करने की. वह सीमेंट उद्योग के बारे में समझने के लिए सभी बैठकों, कार्यशालाओं और सेमिनारों में बैठती थीं. वे हर महीने प्लांट जातीं और वहां कुछ दिन रुकतीं. इस तरह उन्हें सीमेंट इंडस्ट्री को समझने में काफी मदद मिली. ये विनीता की कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम है कि 100 करोड़ के टर्नओवर वाली जेके लक्ष्मी सीमेंट का टर्नओवर आज 3000 करोड़ तक पहुँच गया है. 1980 के दशक में राजस्थान के सिरोही में जो कंपनी शुरू हुई वो आज देश भर में फैली हुई है.

विनीता सिंघानिया सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष चुनी जाने वाली पहली महिला थीं। वे नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स की उपाध्यक्ष भी रही हैं. सिंघानिया को “सर्वश्रेष्ठ महिला उद्यमी” और “भारत शिरोमणि पुरस्कार” से भी नवाज़ा जा चुका है. विनीता का मानना है कि सफल कारोबार के लिए तीन बातें मूल मन्त्र की तरह होती हैं- ग्राहक की संतुष्टि, कामकाज में पारदर्शिता और कर्मचारियों को महत्त्व.

विनीता सिंघानिया की सफलता का ये सफ़र आसान नहीं रहा है. विनीता ने जब काम शुरू किया , उनके दोनों बेटे स्कूल जाते थे. उन्हें दोपहर में काम से वापस आकर उन्हें देखना होता था. लेकिन वो कहते हैं ना कि यदि आप कुछ करने का दृढ़ संकल्प करते हैं तो सफलता अवश्य मिलती है. विनीता के संकल्प ने विश्वास को डिगने नहीं दिया और कंपनी दिनोदिन बुलंदियां छूती चली गयी.  आज विनीता को ‘कंक्रीट वुमन’ के नाम से भी जाना जाता है. विनीता महिलाओं के लिए भी काफी बढ़-चढ़कर काम करती हैं. अपने राजस्थान प्लांट में महिलाओं को साक्षर करने का ज़िम्मा उन्होंने खुद ले रखा है. वे उन्हें कंप्यूटर में साक्षर बना रही हैं.

शक्तिशाली नारी शक्ति के इस सर्वे में फेम इंडिया मैगजीन – एशिया पोस्ट ने नॉमिनेशन में आये 300 नामों को विभिन्न मानदंडों पर कसा , जिसमें सर्वे में सामाजिक स्थिति, प्रतिष्ठा, देश की आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था पर प्रभाव, छवि, उद्देश्य और प्रयास जैसे दस मानदंडों को आधार बना कर किये गये स्टेकहोल्ड सर्वे में जेके लक्ष्मी सीमेंट की मैनेजिंग डायरेक्टर विनीता सिंघानिया तीसरे स्थान पर हैं |