विकास का पर्याय है हमारी सरकार -वीरभद्र सिंह

veerbhadra82 वर्षीय वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के बेहद लोकप्रिय और सम्मानित मुख्यमंत्री हैं जिन्हें सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने का गौरव प्राप्त है। वे 1962 से अबतक पांच बार लोकसभा सांसद, आठ बार विधायक और छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पिछले छह दशकों में वे लगभग सभी चुनाव जीतते आये हैं। राजनीति में आने को वे महज एक इत्तेफाक मानते हैं। इच्छा डीयू में प्रोफेसर बनने की थी, लेकिन जब से राजनीति में आये, राज्य का सर्वांगीण विकास ही उनका प्रमुख लक्ष्य रहा है। कई बार विपक्ष में बैठने का भी अवसर मिला। लंबे राजनीतिक जीवन, अनुभवों, सरकार के कामकाज, आगामी योजनाओं और भावी राजनीति को लेकर फेम इंडिया ने उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश :

 

राजनीतिक जीवन के इतने लंबे सफर को किस प्रकार देखते हैं आप?
विद्यार्थी जीवन से ही जो भी काम किया, उसे गंभीरता से किया। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय जहां भी रहा वहीं ऐसा किया, एमए करने के बाद मैं दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक बनने की कोशिश में था, लेकिन शायद नियति को कुछ और मंजूर था। कांग्रेस ने 1962 के लोकसभा चुनाव में महासू निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दे दिया। मैंने टिकट के लिए अप्लाई भी नहीं किया था।

चुनाव लड़ने के लिये आपसे किसने अप्रोच किया?

लाल बहादुर शास्त्री जी ने, मेरा राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था। उस समय शास्त्री जी ने कहा था कि क्या करना चाहते हो? सरकारी नौकरी चाहते हो या बिजनेस। मैंने कहा – बिजनेस का तजुर्बा नहीं है, मैं पढ़ाना चाहता हूं। शास्त्री जी ने कहा- छोड़ दीजिए सब। आपको देश सेवा में होना चाहिये। वे ही मुझे इंदिरा गांधी के पास ले गये। इंदिरा जी और शास्त्री जी ने पंडित नेहरू से बातचीत करवायी। उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी घरवालों को भी न बताऊं। मैं चुनकर आया और सांसद बन गया। फिर राजनीतिक जीवन की इतनी लंबी यात्रा हो गयी।

जीवन में पहली बार मुख्यमंत्री बनने का अनुभव कैसा था?

मैं तब लोकसभा का सदस्य था ही साथ-साथ मैं राज्यमंत्री भी था, मेरे मंत्री नारायण दत्त तिवारी थे और इंदिरा जी प्रधानमंत्री थीं। हिमाचल के सीएम रामलाल ठाकुर थे। लोकसभा के प्रश्न-काल के बाद मुझे बताया गया कि मुझे हिमाचल का मुख्यमंत्री बनाया जायेगा। मैंने कहा- इसमें मेरी कोई रुचि नहीं। इंदिरा जी ने कहा था- आप समझ नहीं रहे हैं, मैं आपको अवसर दे रही हूं। चीयर अप। हरियाणा सरकार का हवाई जहाज खड़ा है, उसमें शिमला जाओ। मैंने कहा – अपनी कार से चला जाऊंगा। सीएम बनते ही हिमाचल में मैंने पहला काम किया वन माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर के। यहां पर वन माफिया को आर्थिक और राजनीतिक शह मिली हुई थी। इस मामले में जो किया, वह इतिहास है।

कभी पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप का भी सामना करना पड़ा?

इंदिरा जी हमेशा से राज्यों में हस्तक्षेप के खिलाफ थीं। मैंने कई बार प्रदेश में मंत्रियों की नियुक्ति और पोर्टफोलियो के आवंटन के बारे में उनसे बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया। बाद का कांग्रेस नेतृत्व भी वैसा ही रहा।

इस बार आपकी सरकार के लिये चार साल का सफर कितना आसान या मुश्किल रहा?
ये चार वर्ष प्रदेश में अभूतपूर्व विकास, प्रगति, शांति व सौहार्द के साक्षी रहे हैं। आप जानते हैं कि कांग्रेस विकास का पर्याय है और इस अवधि में भी प्रदेश की सरकार ने सभी वर्गों व सभी क्षेत्रों का समान एवं संतुलित विकास किया है। प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार ने विकास एवं जन कल्याण के सभी क्षेत्रों में नये आयाम स्थापित किये हैं।

बेरोजगारी पहाड़ों में एक बड़ी समस्या है। आपकी सरकार ने इससे निपटने के लिये क्या ठोस उपाय किये हैं?
प्रदेश सरकार ने गत तीन वर्षों में सरकारी व निजी क्षेत्र में 60 हजार युवाओं को रोजगार प्रदान किया है। इनमें से 27 हजार रोजगार के अवसर सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध करवाये गये हैं। हम अगले दो वर्षों में अकेले सरकारी क्षेत्र में 25 हजार नये रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के प्रति वचनबद्ध हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश में बेरोजगार युवाओं के कौशल विकास के लिये 500 करोड़ रुपये की कौशल विकास भत्ता योजना कार्यान्वित की जा रही है। इसके अलावा बेरोजगारी भत्ता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जा रही है।

प्रदेश की औद्योगीकरण नीति के बारे में कुछ जानकारी दें?
हिमाचल में दो तरह के उद्यमी आते हैं। कुछ सरकारी करों आदि में छूट के लालच में आते हैं तो कुछ हकीकत में उद्योग लगाने के मकसद से। राज्य सरकार ने औद्योगिक सलाहकार परिषद् का गठन किया है जो सीरियस उद्योगपतियों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करता है। उद्यमियों को प्रदेश में निवेश के लिये आकर्षित करने हेतु मुंबई, बैंगलुरु, अहमदाबाद तथा नयी दिल्ली में इंवेस्टर मीट्स आयोजित किये गये हैं। यह भी तय किया गया है कि हिमाचलियों को रोजगार प्रदान करने वाली 300 से अधिक नयी औद्योगिक इकाइयों से पांच वर्षों तक केवल एक प्रतिशत विद्युत शुल्क वसूला जायेगा।

हिमाचल प्रदेश को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये क्या नीतियां हैं?

प्रदेश में सैलानियों को सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान करने के लिये कई पर्यटन स्थलों का कायाकल्प किया गया है। हमने पाया है कि हाल के वर्षों में एडवेंचर टूरिज्म का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। इसे बढ़ावा देने के लिये हमने हाल ही में कांगड़ा जिले के बीड़-बिलिंग में पैराग्लाइडिंग विश्व कप का आयोजन किया। धर्मशाला-मैकलोड़गंज, हिमानी-चामुण्डा, शिमला बाईपास-लिफ्ट तथा पलछान-रोहतांग रज्जू मार्गों के निर्माण के लिये समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये हैं। प्रदेश सरकार पर्यटन के हर अवसर को भरपूर सहयोग प्रदान कर रही है।