एक प्रेरक स्वप्नदृष्टा हैं डॉ. उदय शंकर अवस्थी

 

ये कहानी है मजबूत इरादे के एक ऐसे व्यक्ति की जिसने कोऑपरेटिव ऑर्गनाइजेशन – इफको को किसानों का सच्चा साथी बनाना ही जीवन का लक्ष्य बनाया और विगत 24 वर्षों में इफको को दुनिया की सबसे बड़ी फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव बना कर कॉर्पोरेट सेक्टर की बड़ी-बड़ी कम्पनियों के समकक्ष ला खड़ा किया।

इंडियन किसान फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के प्रबंध निदेशक डॉ उदय शंकर अवस्थी ने मात्र 20 वर्ष की आयु में देश के लिये कुछ बड़ा करने का सपना देखा था। इस स्वप्न-दृष्टा ने वर्ष 1993 से दिन रात की मेहनत और लगन से सफलता का वो मुकाम हासिल किया जो आज इफको से जुड़े करीब चालीस हजार कोऑपरेटिव सोसाइटियों और साढ़े पांच करोड़ किसानों के गर्व का कारण है। डॉ अवस्थी के देशभक्ति के जज्बे की बदौलत इफको देश दुनिया में अपनी कामयाबी की गाथा स्थापित कर चुका है।

सफलता का सफ़र आसान नहीं होता है , शुरुआत और सफलता के बीच का संघर्ष प्रेरणा बिंदु बन जाता है। बनारस हिंदू युनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त डॉ. उदय शंकर अवस्थी का प्रारंभिक जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव में 12 जुलाई 1945 को उदय शंकर अवस्थी का जन्म स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार में हुआ. इनके दादा जी और नाना जी दोनों स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी थे। कहते है न जज्बा और जुनून जन्म के साथ भी प्राप्त होता है। देश के किसानों के सम्मान को शीर्ष पर ले जाने का डॉ. अवस्थी का लगातार प्रयास देशप्रेम और समर्पण का बड़ा उदाहरण ही तो है।

डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने संघर्ष की तपन बचपन से ही महसूस की है, इनके मात्र 2 वर्ष की आयु में पिता का निधन हो गया। माँ एक जीवट महिला थी जिनके ऊपर चार बच्चों के लालन पालन की बड़ी जिम्मेवारी आ गयी थी। बेहद विपरीत परिस्थितियों में भी इनकी माँ ने अपने को कमजोर नहीं होने दिया और बच्चों को बेहतर शिक्षा और उत्तम संस्कार देने का हर संभव प्रयास किया। बालक उदय शंकर अवस्थी ने प्राथमिक पढ़ाई गाँव में करने के बाद आगे की पढ़ाई सेंट जार्ज स्कूल कानपूर से की। बेहद छोटे से गांव से निकल कर बड़े शहर के माहौल ने इनकी सोच, समझदारी और व्यक्तित्व विकास को एक और सकारात्मक मोड़ दिया। वहां की पढ़ाई पूरी करने के बाद बनारस हिंदू युनिवर्सिटी (बीएचयू) में इनका दाखिला केमिकल इंजीनियरिंग के लिये हो गया।

वैसे तो ये शुरुआत से ही भावनात्मक होने के साथ-साथ मेधावी भी थे परन्तु बीएचयु के परिवेश ने इन्हें एक दूरदर्शी टेक्नोक्रेट बनने में मदद की। इन्होंने वर्ष 1966 में बीएचयू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान देश चीन के साथ युद्ध और भीषण अकाल के दौर से गुजर रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के देश की जनता से “जय जवान–जय किसान” का नारा बुलंद करने की अपील की। हिंदुस्तान के हालात अच्छे नहीं थे और देश हर मोर्चे पर संघर्ष कर रहा था। इस माहौल का इनकी सोच पर गहरा असर पड़ा और इन्होंने उसी समय महसूस किया कि उन्नत किसान ही सशक्त देश की नींव बन सकता है। यही वह समय था जब इन्होंने देश के लिये एक बड़े बदलाव के वाहक बनाने का सपना देखा था। इन्हें भी क्या पता था कि ये सपना एक दिन किस भांति पूरा होगा। केमिकल इंजीनियरिंग के बाद ये फर्टिलाइजर इंडस्ट्री में आ गये और यही से इनके सपनों को उडान मिली।

वर्ष 1966 में इन्होंने श्री राम फर्टिलाइजर्स में ट्रेनी इंजिनियर के तौर पर ज्वाइन किया। इन्हें राजस्थान के कोटा में बने नये प्लांट भेजा गया जो उन दिनों देश का पहला एडवांस फर्टिलाइजर प्लांट माना जाता था। यहाँ इन्होंने 1971 तक कार्य किया। यह समय था जब इन्होंने मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी के बेहतर उपयोग का तरीका सीखा। वर्ष 1971 में बिडला ग्रुप का जुआरी एग्रो गोवा में नया फर्टिलाइजर प्लांट लगा रहा था, जिसके इंस्टालेशन और मैनेजमेंट के लिये उन्हें बेहद काबिल इंजीनियर की खोज थी। उनकी तलाश पूरी हुई उदय शंकर अवस्थी पर जहां वे वर्ष 1976 तक रहे।

वस्तुतः इनके अन्दर एक खोज लगातार थी कुछ अलग पाने की। इसलिये गोवा में कार्य के दिनों ये स्थानीय विश्वविद्यालय में छात्रों को पढ़ाने भी जाने लगे जिससे वहां लोग उन्हें एक प्रोफेसर के तौर पर जानने लगे। वर्ष 1976 में इन्हें इफको के फाउंडर मैनेजिंग डायरेक्टर पॉल पाटन के साथ काम करने का मौका मिला। ये प्रोजेक्ट ऑफिसर के तौर पर उनके साथ जुड़े। डॉ अवस्थी हजीरा और औलाला प्रोजेक्ट के निर्माण के साथ-साथ 10 वर्षों के लम्बे समय तक इफको के विभिन्न प्रोजेक्ट से जुड़े रहे। यहीं वो समय था जब उन्होंने कोऑपरेटिव की शक्ति और भविष्य की संभावनाओं को समझा। इस दौरान इनकी पहचान यूथ एक्टिव टेक्नोक्रेट के साथ साथ एक बेहद सुलझे हुए इंटरप्रेन्योर की भी बनी, जिसकी वजह से मात्र 41 वर्ष की आयु में वर्ष 1986 में ये पीपीसीएल के सीईओ बनाये गये। भारत की किसी भी कॉर्पोरेट हाउस ने इससे पहले इतनी कम आयु में किसी को अपना सीईओ नहीं बनाया था।

पाइरिट्स फॉस्फेट्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर रहते हुए कम्पनी के विकास व विस्तार के लिये इन्होने कई बड़े सफल निर्णय लिये जिससे केवल 38 करोड़ का टर्न ओवर करने वाली कम्पनी विगत 7 वर्षो में 500 करोड़ की बन गयी। इनकी सफलता की चर्चा बिजनेस वर्ल्ड में जोरों पर थी। इसी दरम्यान वर्ष 1993 में इन्हें इफको से बुलावा आया। इफको का ऑफर इनकी तत्कालीन सैलरी से भी कम था परन्तु इन्हें पता था ये इनके उस सपने को सच करने का मौका है जिसे इन्होंने वर्षों पहले अपने देश के लिये देखा था। वर्ष 1993 में डॉ उदय शंकर अवस्थी इफको के सी ई ओ और फिर मैनेजिंग डायरेक्टर बनाये गये।

संस्था के प्रमुख के तौर पर ढेर सारी चुनौतियां इनके सामने थीं। एक ओर मैनेजमेंट और कोऑपरेटिव सोसाइटी के बीच की दूरी मिटानी थी, वही दूसरी ओर कर्ज देने वाले बैंकों की दखलंदाजी खत्म करनी थी। नयी टेक्नोलॉजी लाने और प्लांट की कैपेसिटी बढ़ने तक के लिये लोगों को समझाना एक अलग चुनौती थी। इन्हें इन चुनौतियों को ऑर्गनाइजेशन की अपॉर्चुनिटी में बदलने का हुनर आता था। इन्होंने ऑर्गनाइजेशन के लिये प्रोफेशनल्स की मजबूत टीम तैयार की। वहीं कोऑपरेटिव सोसाइटी और किसानों को साथ जोड़ने और उनके विश्वास की मजबूती के लिये देश भर में लम्बी-लम्बी यात्राएं कीं। इन्हें पता था कि एक मजबूत संस्था का निर्माण विश्वास की मजबूत डोर और संगठन से ही संभव है।

डॉ. अवस्थी की दूर-दृष्टि और प्रबंधन क्षमता ने देश में कोऑपरेटिव इम्पॉवरमेंट की दिशा तय की और इफको के आधुनिकीकरण के साथ ही विजन 2000 की शुरुआत हुई, जिसके तहत कलोल, कांडला, फूलपुर और औलाला के सभी चार प्लांट्स की प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसकी सबसे बड़ी बात यह रही कि इसे सही समय और लागत पर पूरा करने में भी डॉ अवस्थी कामयाब रहे। इन्होंने सभी प्लांट में एडवांस टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जिससे वे एनर्जी सेविंग करने के साथ ही कॉस्ट इफेक्टिव भी बने। फिर शुरुआत हुई विजन 2005 , 2010 और 2015 की। हर मोर्चे पर सफलता मिलती गयी, लोग जुड़ते गये। संगठन हो या व्यापार नित नये आयाम स्थापित होते गये। नयी सोसाइटियां जुड़ीं, किसानों की संख्या बढ़ी। टर्न ओवर हो या नेटवर्थ या फिर नैशनल व इंटरनेशनल जॉइंट वेंचर की बात – इफको बढ़ता ही जा रहा है।

आज एक विशाल समूह के रूप में इफको दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कोऑपरेटिव बन गया है। चुनौतियां आती रहीं पर डॉ. अवस्थी ने इतने वर्षों में इफको को एक परिवार बना दिया है जहाँ एक टीम भावना है और जिसका एक मात्र लक्ष्य है – उन्नत किसान सुदृढ़ भारत।