आइएएस ऑफिसर त्रिपुरारी शरण ने फिल्म, टेलिविजन और कला के क्षेत्र में राज्य में जमाई धाक

1985 बैच के आइएएस ऑफिसर त्रिपुरारी शरण वर्तमान में अध्यक्ष सह सदस्य राजस्व परिषद हैं। इसके साथ ही, मुख्य सचिव स्तर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी त्रिपुरारी शरण को विभागीय जांच आयुक्त और एवं वन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। त्रिपुरारी भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपने करियर की शुरुआत असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर किए। इसके बाद लैंड रेवेन्यू मैनेजमेंट और जिला प्रशासन के असिस्टेंट जिलाधिकारी के पद पर पदस्थापित रहे। त्रिपुरारी शरण भौतिक विज्ञान में ग्रैजुएशन और समाज शास्त्र से पोस्ट ग्रैजुएशन किए हैं। एक कुशल प्रशासक और बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी त्रिपुरारी शरण जनता के चहेते अधिकारी हैं। त्रिपुरारी शरण जब सारण के जिला अधिकारी थे, उन्होंने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी जिसका शीर्षक था ‘वो सुबह कब निकल गई’ जिसको एफटीआईआई ने प्रोड्यूस किया था। त्रिपुरारी शरण बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्‍ता मामलों के मंत्रालय में अतिरिक्‍त सचिव एवं बिहार स्‍टेट फायनेंस कॉर्पोरेशन में एमडी भी रहे हैं। लगभग दो वर्ष तक जन-वितरण और उपभोक्ता विभाग के सचिव के तौर पर जन-वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा जनहित में सराहनीय कार्य किए हैं। किसानों की समस्याओं का निष्पादन करते हुए धान और गेहूं जैसी नकदी फसलों के उचित सरकारी मूल्यों पर खरीदनें की व्यवस्था करवाई। त्रिपुरारी शरण को कला समीक्षक के तौर पर भी जाना जाता है। वैसे तो त्रिपुरारी शरण बिहार कैडर के अधिकारी हैं, लेकिन 1997 से 2007 तक वो केंद्र के प्रतिनियुक्ति पर रहे। इस बीच  पांच साल तक पुणे के प्रतिष्ठित फिल्‍म एंड टीवी इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया यानि एफटीआईआई के डायरेक्‍टर भी रहे। उनके  कार्यकाल को काफी सराहा भी गया है। 2008 से 2011 तक होम कैडर बिहार में विभिन्न पदों पर अपना योगदान देने के बाद एक बार फिर त्रिपुरारी वर्ष 2011 में केंद्रिय प्रतिनियुक्ति पर प्रसार भारती, दूरदर्शन के महानिदेशक बने। बिहार शॉर्ट एवं डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म महोत्सव 2016 के दौरान त्रिपुरारी शरण ने कला संस्‍कृति विभाग बिहार की सराहना करते हुए कहा था कि भले ही महाराष्‍ट्र फिल्‍मों की मंडी मानी जाती है, लेकिन वहां भी बिहार के लेखक और कलाकारों का बड़ा आधार है। उद्योग विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए त्रिपुरारी शरण उद्यमियों की मुश्किलों का हल करना अपनी पहली प्राथमिकता बनाए थे। यहां तक कि कोई भी उद्यमी विभागीय अनुदान, वैट प्रतिपूर्ति समेत तमाम व्यक्तिगत मसलों में हो रही परेशानी के लिए उन्हें स्वयं संपर्क के लिए आजाद थे और विभाग को लिखित प्रतिवेदन भी दे सकते थे। त्रिपुरारी शरण कामकाज के उच्च मापदंड को बनाए हुए हैं तथा देश और राज्य के हित में अपना योगदान दे रहे हैं।
फेम इंडिया मैगजीन-एशिया पोस्ट सर्वे के ‘असरदार आईएएस 2018’ के सर्वे में विभिन्न पैरामीटर में की गई रेटिंग में त्रिपुरारी शरण को प्रमुख स्थान पर पाया है।