निश्चय के पक्के, गंभीर और कर्मठ राजनेता हैं सुशील मोदी

जेपी आंदोलन की उपज सुशील कुमार मोदी को बिहार के मृदुभाषी लेकिन दृढ़ इरादों वाले राजनेता के तौर पर जाना जाता है. उनकी छवि बिहार में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरे के तौर पर है और उन्हें शालीन व जुझारू राजनेता की श्रेणी में रखा जाता है.

सुशील मोदी 27 जुलाई 2017 से फिलहाल बिहार के उप मुख्य मंत्री होने के साथ-साथ वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं. इससे पहले वे सन 2005 से 2013 तक लगभग आठ वर्षों तक यही जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. बचपन से ही आरएसएस से जुड़े सुशील ने छात्र राजनीति में जेपी आंदोलन के समय कदम रखा था. वे कई बार जेल भी गये और आंदोलन के बाद संघ के आजीवन सदस्य के तौर पर प्रचार प्रसार में जुट गये.

सक्रिय राजनीति में उन्होंने कदम रखा 1990 में और पटना मध्य (अब कुम्हरार) क्षेत्र से विधायक बने. 1996 से 2004 में भागलपुर से सांसद चुने जाने तक वे बिहार विधान सभा में नेता-प्रतिपक्ष रहे. बीच में अल्पकालिक नीतीश सरकार में वे कैबिनेट मंत्री भी बने. बिहार में लालू यादव के लंबे शासन को सुनियोजित तरीके से पीआईएल के जरिये हटाने में इनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण मानी जाती है. 

सुशील मोदी के कुशल वित्तीय प्रबंधन का ही कमाल था कि बिहार लगातार कई वर्षों तक विकास दर में अव्वल राज्य बना. 2018 में भी बिहार 11.3 प्रतिशत ग्रोथ रेट के साथ देश में टॉप पर है. उनकी उपलब्धियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां 2005 से पहले प्रदेश का बजट महज कुछ हजार करोड़ तक सिमटा था, वहीं अब ये आंकड़ा दो लाख करोड़ पार कर गया है. 

अकसर गठबंधन की सरकारें नेताओं व पार्टियों महत्त्वाकांक्षाओं के कारण बिखर जाती हैं, लेकिन सुशील मोदी औऱ नीतीश कुमार की जोडॉी शायद भारतीय राजनीति में मौजूद गठबंझन की सरकारों में सार्वाधिक गैर विवादित रही है. हालांकि जब वे विपक्ष में आये तो उन्होंने अपना धर्म निभाते हुए सरकार को सड़क से विधानसभा तक एक कड़ी चुनौती पेश की. 

सुशील मोदी को बिहार भाजपा में एक रुतबेदार राजनेता के तौर पर पहचाना जाता है. व्यक्तित्व, रणनीतिक समझ, जिम्मेदारी, पार्टी में प्रभाव, छवि और राजनीतिक दखल आदि मानकों को ध्यान में रख कर किये गये देशव्यापी सर्वे में सुशील मोदी को धाकड़ नेताओं में अहम स्थान प्राप्त हुआ है.