देश की नई कर प्रणाली में राज्य को अव्वल स्थान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध ऑफिसर हैं सुजाता चतुर्वेदी

1989 बैच की आइएएस ऑफिसर सुजाता चतुर्वेदी महाराष्ट्र की रहने वाली हैं। सुजाता चतुर्वेदी इतिहास विषय से पोस्ट ग्रैजुएशन की हैं। तेज-तर्रार प्रशासनिक अधिकारी सुजाता चतुर्वेदी जब केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर थीं, उस समय इनको वर्ष 2014 में यूनिक आइडेंटीफिकेशन अथॉरटी ऑफ इंडिया का डेप्युटी डायरेक्टर जेनरल बनाया गया था। केंद्र की प्रतिनियुक्ति से वापस लौटने पर जिला स्तर पर विकासात्मक और कल्याणकारी योजनाओं-कार्यक्रमों के कार्यान्वयन और मुल्यांकन के लिए सुजाता चतुर्वेदी को प्रधान सचिव सह वाणिज्य कर आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वाणिज्य कर विभाग की प्रधान सचिव के साथ-साथ सुजाता चतुर्वेदी अतिरिक्त प्रभार में राज्य की वित्त विभाग की प्रधान सचिव भी हैं। वर्तमान में  देश आर्थिक सुधार के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में सुजाता चतुर्वेदी के विभाग का कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। जीएसटी कर प्रणाली आजादी के बाद सबसे बड़ा बदलाव है। एक कुशल प्रशासक के तौर पर सुजाता बखुबी अपने काम को अंजाम दे रही हैं। नई आर्थिक नीतियों के मद्देनजर कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं, जैसे आईटी मैनेजर को वाणिज्य कर विभाग के बेवसाइट पर सभी जानकारी अपडेट करना है। बिहार राज्य वाणिज्य कर विभाग, जीएसटी व्यवस्था के तहत 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत की कर श्रेणी में लाई गई वस्तुओं के मामले में लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने को लेकर बाजार सर्वे करवा रहा है। आयुक्त-सह-प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी का मानना है कि इस तरह के सर्वे से जिन उत्पादों पर कर घटाया गया है उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है या नहीं इसका पता लग पाएगा। हमेशा जनता की मदद के लिए तत्पर रहने वाली अधिकारी सुजाता ने ऐसी व्यवस्था की है कि उपभोक्ता फोन, फैक्स अथवा इमेल के जरिए स्टेट स्क्रीनिंग समिति से अपनी शिकायत कर सकते हैं। व्यापारी मुनाफाखोरी ना करें, इसके लिए राज्य में मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकार का गठन किया गया है। व्यवसायियों की समस्या के निदान के लिए विशेष ई-मेल बॉक्स की शुरुआत की गई है। छोटे-छोटे जगहों जहां जीएसटी की जानकारी नहीं है, विभाग के लोग जाकर प्रशक्षिण दें ऐसी व्यवस्था की गई है। राज्य में शिक्षा की स्थिति के सुधार के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लाई गई है, जिसके तहत 4 लाख रुपए तक शिक्षा ऋण देने का प्रावधान है। इसकी गारंटी सरकार स्वयं ले रही है। नन-बैंकिंग कंपनियों पर शिकंजा कसा गया है और एक वेब पोर्टल nbfc.bihar.gov.in  बनाया गया है जिस पर सभी नन-बैंकिंग कंपनियों को अपना ब्योरा रजिस्टर कराना है। परिवहन विभाग की प्रधान सचिव के रुप में सुजाता चतुर्वेदी ने अत्यंत सराहनीय कार्य किए हैं। काफी लंबे इंतजार के बाद बिहार एवम् यूपी के बीच 34 रूटों पर दस साल के लिए परिवहन समझौता हो पाया। इसके अलावा ओवरलोडिंग और इंट्री माफिया पर रोक के लिए विभाग की ओर से सख्त कारवाई की गई। यहां तक की सभी चेकपोस्टों पर सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम लगवाए। किसी भी राज्य की व्यवस्था का रीढ़ वित्त विभाग के प्रमुख सचिव के तौर पर सुजाता चतुर्वेदी अपने काम को कुशलतापूर्वक अंजाम दे रही हैं।

फेम इंडिया मैगजीन-एशिया पोस्ट सर्वे के ‘असरदार आईएएस 2018’ के सर्वे में विभिन्न पैरामीटर में की गई रेटिंग में सुजाता चतुर्वेदी को प्रमुख स्थान पर पाया है।