टीवी पत्रकारिता का ‘श्वेत पत्र’ : श्वेता सिंह

करीब दो दशकों से टीवी पत्रकारिता से जुड़ीं श्वेता  सिंह किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. राजनीति हो या खेल, बिज़नेस हो या सिनेमा हर क्षेत्र में श्वेता को महारथ हासिल है. टीवी न्यूज़ के मामले में श्वेता ऑलराउंडर हैं. उनकी कड़ी मेहनत और काम के प्रति जुझारूपन का ही नतीजा है कि श्वेता का नाम आज देश की शीर्ष महिला पत्रकारों में शुमार है.

श्वेता सिंह आजतक के स्पेशल प्रोग्रामिंग टीम की एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं. ‘ऊपरवाला देख रहा है’, ‘वंदेमातरम’, ‘आजतक का गांव कनेक्शन’ इस टीम के बनाए हुए चुनिंदा कार्यक्रमों में शामिल हैं. श्वेता आजतक पर रोज़ रात 9 बजे आने वाले न्यूज़ बुलेटिन ख़बरदार की एंकर हैं. साथ ही अलग-अलग मुद्दों पर उनका कार्यक्रम ‘श्वेतपत्र’ अपनी एक अलग पहचान बना चुका है.

21 अगस्त 1977 को पटना, बिहार में जन्मीं श्वेता ने अपनी पढ़ाई पटना वीमेन कॉलेज से की है. स्नातक के पहले साल से ही इन्होंने पत्रकारिता शुरू कर दी थी. टाइम्स ऑफ़ इंडिया, पटना और हिंदुस्तान टाइम्स, पटना ने इनके नाम से कई बाईलाइन्स छापी हैं. साल 1998 में श्वेता ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का रुख किया. साल 2002 में आजतक ज्वाइन करने से पहले श्वेता ने ज़ी न्यूज़ और सहारा में काम किया है. श्वेता की मानें तो वे पत्रकारिता में कभी आना नहीं चाहती थीं. लिखना उनका शौक है. इसी  शौक को पूरा करने के लिए वे अखबारों के लिए आर्टिकल्स और अपनी पर्सनल डायरी में कविताएँ लिखती थीं. श्वेता किसी ऐसे फील्ड में जाना चाहती थीं, जहाँ वे कुछ क्रिएट कर सकें लेकिन किस्मत उन्हें खींच लायी पत्रकारिता के क्षेत्र में. आज दो दशकों से ज्यादा पत्रकारिता कर चुकने के बावजूद श्वेता अपने आपको इस क्षेत्र के लिए मिसफिट मानती हैं. वे कहती हैं कि जो व्यक्ति रोज़ कुछ ना कुछ सीखना चाहता है उसके लिए पत्रकारिता बेस्ट प्रोफेशन है.

श्वेता को सपने देखना पसंद है. उन्होंने अपने लिए जो सपना देखा, उसे पूरा करने के लिए जी-जान लगा दिया. श्वेता का मानना है कि आज वे जो कुछ भी हैं, सपने देखने की बदौलत ही हैं. एक टीवी प्रोफेशनल जो-जो काम कर सकता है, श्वेता ने वो हर एक काम किया है. एंकरिंग और रिपोर्टिंग के अलावा उन्होंने अपनी स्टोरीज़ के लिए कैमरा और एडिटिंग भी की. साउंड मिक्सिंग की. यहाँ तक कि दूसरे एंकर्स का मेकअप भी किया. प्रिंटर्स तक ठीक किए. श्वेता कनफर्म्ड वोर्कोहलिक हैं. ‘बातें कम,काम ज्यादा’ यही उनका सिद्धांत है. श्वेता की ‘हर-हर गंगे’ और ‘वन्देमातरम’ तथा 2015 में बिहार लोकसभा चुनाव के दौरान की गयी सीरीज ‘हिस्ट्री ऑफ़ पाटलिपुत्र’  को लोगों ने खूब सराहा.

श्वेता सिंह के पति संकेत कोटकर इन लाइट सलूशन लिमिटेड कंपनी में सीनियर टेक्नोलॉजी मैनेजर हैं। दोनों की एक बेटी भी है. हालांकि श्वेता अपनी पर्सनल लाइफ मीडिया से दूर रखना बेहतर समझती हैं और ज्यादा खुलकर अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में नहीं बताती हैं।

खेल की खबरें कवर करने में श्वेता को महारथ हासिल है. उनके शो ‘सौरव का सिक्सर’ के लिए स्पोर्ट्स जर्नलिज्म फेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने उनको साल 2005 में सम्मानित भी किया था. इसके अलावा श्वेता ने अपने काम के लिए बेस्ट एंकर, रिपोर्टर और प्रोड्यूसर समेत कई अवार्ड जीते हैं.

शक्तिशाली नारी शक्ति के इस सर्वे में फेम इंडिया मैगजीन – एशिया पोस्ट ने नॉमिनेशन में आये 300 नामों को विभिन्न मानदंडों पर कसा , जिसमें सर्वे में सामाजिक स्थिति, प्रतिष्ठा, देश की आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था पर प्रभाव, छवि, उद्देश्य और प्रयास जैसे दस मानदंडों को आधार बना कर किये गये स्टेकहोल्ड सर्वे में आजतक की एंकर व एक्जीक्यूटिव एडिटर श्वेता सिंह उन्नीसवें स्थान पर हैं |