लोकप्रियता के पर्याय हैं मराठवाड़ा के वीर शरद पवार

जो चार बार महाराष्ट्र जैसे बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, जो देश के प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गये, जिन्हें राजनीति में विरोधी भी चाणक्य की उपाधि देते हैं, सियासत के उसी सूरमा का नाम है शरद पवार. कभी क्रिकेट के मैदान के सिकंदर रहे शरद ने राजनीति के मैदान में भी कई चौके-छक्के जड़े और हर फ्रंट पर बैटिंग-बॉलिंग की. सियासत के माहिर शरद पवार पांच दशकों से भी ज्यादा समय से राजनीति के मैदान में हैं. वे जब भी कोई बयान देते हैं पूरा देश उसे गंभीरता से लेता है.

2 दिसंबर, 1940 को पुणे, महाराष्ट्र के बारामती में जन्मे शरद पवार का असली नाम शरतचंद्र गोविंदराव पवार है. वे पुणे के बीएमसीसी काॅलेज से कॉमर्स ग्रैजुएट हैं औऱ कॉलेज की राजनीति में महासचिव भी चुने गये थे. उनके नेतृत्व और संगठन कौशल का लोहा हर कोई मानता था. इसी दौरान उन्हें यशवंतराव चव्हाण जैसे मार्गदर्शक मिले जो कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. उनके ही मार्गदर्शन से शरद पवार पहले युवा कांग्रेस से और फिर कांग्रेस पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े. 

महज 26 वर्ष की उम्र में पवार पहली बार बारामती से विधायक बने और सिर्फ 38 साल की उम्र में सन 1978 में वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गये. सोनिया गांधी के इतालवी मूल के मुद्दे पर वे कांग्रेस पार्टी का नेतृत्‍व किए जाने के विरोध में वे कांग्रेस से अलग हो गए और 25 मई 1999 को राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्‍थापना की. राजनीति, कला, साहित्य और यहाँ तक कि क्रिकेट में भी उनका बराबर का दखल रहा. वे आईसीसी और बीसीसीआई के चेयरमैन रह चुके हैं. 

मराठवाड़ा विद्यापीठ के नामांतर जैसा संवेदनशील मुद्दा हो या मुंबई ब्लास्ट जैसी दिल दहला देने वाली घटना हो या लातूर का महाप्रलयकारी भूकंप हो,शरद पवार का व्यक्तित्व इन अग्निपरीक्षाओं से और निखरता चला गया. उन्होंने महिलाओं को पुरुषों के बराबर का हक देने के लिए उन्होंने महिला नीति को भी महाराष्ट्र में लागू किया. प्रदेय़ को प्रगति के रास्ते पर लाने के बाद पवार ने दिल्ली की राह पकड़ी. वे जब रक्षामंत्री बने तो महिलाओं को सेना में प्रवेश दिलाने जैसा क्रांतिकारी कदम उठाया वहीं जब कृषि मंत्री बने तो इस भूमिपुत्र के नेतृत्व में किसानों ने खाद्यान उत्पादन के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले. 

कामयाबी, यश-अपयश, संकट, चुनौती कुछ भी हो पवार कभी विचलित नहीं होते. वे ज़मीन से जुड़े हुए नेता हैं. उनकी दूरदर्शी सोच का चमकदार उदाहरण उनकी कर्मभूमि बारामती है जिसको देखकर अरुण जेटली ने भी कहा था कि अगर देश को सौ स्मार्टसिटी की सौगात देनी है तो सौ शरद पवार चाहिए. साल 2017 में शरद पवार को दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरुस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है.