असंभव को संभव कर दिखाने वाली शख्सियत का नाम है संजय कुमार

देश में उग्रवाद की समस्या ने ऐसा आतंक फैलाया है कि हर कोई इससे आतंकित है। बंदूक का जवाब अगर बंदूक होता तो शायद यह समस्या कब की सुलझ गयी होती, लेकिन ऐसे में एक शख्स ऐसे भी हैं जो इस समस्या का आध्यात्मिक समाधान श्री श्री रवि शंकर के निमित के तौर पर खोजने में जुटे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठत कॉलेज सेंट स्टीफेंस से ग्रैजुएट संजय कुमार को आमतौर पर संजय बिहारी के नाम से जाना जाता है। एक अरसे से वे श्रीश्री रविशंकर के मिशन से जुड़े हैं और उग्रवाद को शांति में बदलने का चमत्कारिक कार्य कर रहे हैं।

बिहार के पूर्वी चंपारन में जन्मे संजय कुमार का समाज के लिये कुछ करने के संस्कार उनमें परिवार से ही मिले। बचपन से ही आंदोलनकारी स्वभाव रहा और 8 साल की उम्र में ही गांव की सड़क बनवाने के लिये आंदोलन छेड़ दिया। बीबीसी तक में कवरेज मिली। गजब के मेघावी संजय कुमार ने सेंट स्टीफेंस से ग्रैजुएशन किया तो स्कॉलरशिप के साथ। संस्कृत भाषा से प्रेम के कारण देश-विदेश में शोोहरत मिली और कई पुरस्कार भी।

इसी बीच संजय कुमार श्रीश्री रविशंकर की नजरों में आये और उनके क्रांतिकारी विचारों को एक नया ही आयाम मिल गया। वे समाज की मुख्यधारा से भटक कर उग्रवादी बने लोगों को श्री श्री के ज्ञान और अध्यात्म की राह पर मोड़ने का अनूठा प्रयोग करने लगे। उनकी विचारधारा से प्रभावित होने वालों में बिहार-झारखंड, आंध्र प्रदेश, उत्तर-पूर्व व नेपाल के नक्सली, असम के उल्फा उग्रवादी और जम्मू-कश्मीर के आतंकवादी तक शामिल हैं। उन्होंने दर्जनों खूंखार उग्रवादियों को बिना डरे व बिना हथियार के, समझा-बुझा कर समर्पण करने या फिर उग्रवाद का रास्ता छोड़ कर मुख्य धारा में वापस लाने का ऐसा अद्भुत कार्य किया है जिसके बारे में सोच कर भी रूह कांप उठे।

उन्होंने बेरोजगारों, खासकर ग्रामीणों के स्वरोजगार पर काफी कार्य किया व उन्हें सम्मान पूर्वक जीवन-यापन करना सिखाया। उत्तर प्रदेश व बिहार-झारखंड आदि राज्यों के कई इलाकों में संजय कुमार की पहल पर लोगों ने जाति-धर्म की दीवारें तोड़ साथ मिल-जुल कर ‘प्रीति-भोज’ व ‘राष्ट्र-भोज’ जैसे कार्यक्रमों के जरिये एक साथ रसोई व भोजन करने की शुरुआत की। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों व नव चेतना शिविरों के जरिये लोगों को जीने का नया तरीका सिखाया। कुल मिला कर संजय बिहारी एक ऐसी करिश्माई शख्सियत हैं जिन्हें असंभव को संभव कर दिखाने वाले कार्यों के लिये जाना जाता है। अपनी राष्ट्रीय छवि, कार्यक्षेत्र में सफलता, सामाजिक सरोकार, राज्य से जुड़ाव और देश में बड़ा प्रभाव बना कर इन्होंने बिहार का मान देश-दुनिया में बढ़ाया है। उपरोक्त पांच मानदंडों पर एशिया पोस्ट व फेम इंडिया मैगजीन द्वारा किये गये सर्वे में (बिहार से आने वाले) प्रभावशाली व्यक्तियों में इन्हें प्रमुख स्थान पर पाया गया है। टीम फेम इंडिया की तरफ से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।