पुराने जूतों की मरम्मत कर किया करोड़ों का कारोबार

ऐसी कई कहानियां पढ़ीं और सुनी होगी, जहाँ कोई जूते पॉलिश करने वाला इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस जैसे ऊँचे पद पर पहुँचता है। लेकिन आज की यह कहानी बिलकुल इसके विपरीत एक ऐसे शख्स की है जो इंजीनियरिंग छोड़ जूते साफ़ करने के धंधे को गले लगाया। इतना ही नहीं आज ये कोई रोड साइड जूते साफ़ करने वाले मोची नहीं बल्कि देश के एक सफल उद्यमी हैं। शू पॉलिशिंग एंड रिपेयरिंग की इनकी कंपनी सालाना करोड़ों रूपये की आमदनी करती है। आप यह जानकर हैरान होंगें कि इनकी कंपनी से आज लोकप्रिय ब्रांड नाइकि, रिबॉक, प्युमा, फिला समेत कई बड़ी कंपनियां जुड़ी हुई हैं।
यह कहानी है द शू लॉन्‍ड्री नाम के एक शू पॉलिशिंग एंड रिपेयरिंग कंपनी शुरू करने वाले संदीप गजकस की। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सचिन ने स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद इंजीनियरिंग करने का फैसला किया। इसी कड़ी में इन्होंने नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फायरिंग इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी की खातिर संदीप ने खाड़ी देशों का रुख करने को सोचा।
लेकिन इसी बीच अमेरिका में हुए आतंकी हमले को मद्येनज़र रखते हुए संदीप ने विदेश जाने के अपने फैसले को छोड़ देश में ही अपना कोई खुद का कारोबार शुरू करना चाहा। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति को ध्यान रखते हुए संदीप ने एक ऐसे प्रोजेक्ट की तलाश करनी शुरू कर दी, जिसमें काफी कम इन्वेस्टमेंट में बिज़नेस खड़ा किया जा सके तथा सफलता के आसार भी हों।
काफी रिसर्च करने के बाद संदीप ने शू पॉलिश का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। बेटे के आइडिया को सुनते ही माँ-बाप के होश उड़ गये, उन्होंने संदीप को शक्त हिदायत दे दी कि ऐसा बिज़नेस खानदान की नाक कटा देगा। जब संदीप ने अपने कुछ करीबी दोस्तों के साथ इसे साझा किया तो उन लोगों ने भी इनका खूब मज़ाक उड़ाया। मां-बाप और दोस्‍तों को अपना यूनीक आइडिया समझाने के बाद कुछ महीनों तक संदीप ने खुद जूता पॉलिश की।
करीब 12,000 रुपए खर्च कर उन्‍होंने बिजनेस शुरू करने की तैयारी शुरू की। इन्होंने अपने बाथरूम को वर्कशॉप बनाकर उन्‍होंने शू पॉलिशिंग को लेकर रिसर्च करना शुरू किया। शुरुआत में संदीप ने अपने दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों के जूते पॉलिश करने का काम किया। संदीप काम के साथ-साथ अपना रिसर्च भी जारी रखा और पॉलिश के धंधे से निकलकर जूते रिपेयरिंग का अनूठा आइडिया भी निकाल लिया।
पुराने जूतों को एकदम नया बनाने और उन्‍हें रिपेयर करने के इनो‍वेटिव तरीके ढूंढने के बाद संदीप ने 2003 में देश की पहली द शू लॉन्‍ड्री कंपनी शुरू की। मुंबई के अंधेरी इलाके में शुरू हुई यह कंपनी आज देश के कई शहरों तक पहुंच चुकी है। शुरुआत में इन्हें 50 आर्डर प्रतिदिन की दर पर मिलते थे और इन्होंने मुफ्त में पिकअप और डिलीवरी की सुविधा प्रदान करते थे।
संदीप बताते हैं कि जूता रिपयेर करने और साफ करने की उनकी फीस महज 99 रुपए होती थी, लेकिन ट्रांसपोर्ट और पिकअप व डिलीवरी खर्च मिलाकर यह 150 से भी ज्‍यादा चला जाता था। लेकिन संदीप को अपने यूनीक बिजनेस आइडिया पर इतना ज्‍यादा भरोसा था कि 20 लाख रुपए का नुकसान होने के बाद भी वह बिजनेस चलाते रहे।
आज संदीप की कंपनी देश के 10 से भी ज्‍यादा राज्यों में अपनी पैठ जमा चुकी है। इतना ही नहीं केन्‍या और भूटान में भी अपनी फ्रेंचाइजी खोलते हुए संदीप आज कई करोड़ रूपये की सालाना कमाई कर रहें हैं। आज इनकी कंपनी से लोकप्रिय जूता बनाने वाली ब्रांड नाइके, रिबोक, पुमा, फिला समेत कई बड़ी कंपनियां जुड़ी हुई हैं।
संदीप ने अपने दिल की सुनी और लोगों के द्वारा उपहास का पात्र बनने के बावजूद अपने लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते गये। आज सफलता इनकी कदम चूम रही है।