कुशल नेतृत्व, मजबूत पकड़: राजीव मिश्रा

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जेहन में ऐसे सवाल कई बार गाहे-बगाहे उठते हैं की आखिर किसी समाज को क्यों होती है नेतृत्व की जरूरत? और एक अच्छा जन नेता हम किसे कह सकते हैं? इसका एक जवाब यह हो सकता है कि स्वयं से भी बड़ा लक्ष्य लेकर चलना और व्यक्तिगत सीमाओं से परे उठ जाना ही किसी अच्छे नेता के जरुरी गुण हो सकते हैं ।

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राजीव मिश्रा

सच तो यह है कि कोई भी व्यक्ति सही अर्थों में तब तक नेता बन ही नहीं सकता जब तक उसके जीवन का अनुभव और जीवन को देखने का तरीका उसकी व्यक्तिगत सीमाओं से परे न चला जाए। यानी नेता बनना या कहें नेतृत्व एक स्वाभाविक प्रक्रिया तब तक नहीं होगी, जब तक कि वह जीवन को देखने, समझने व महसूस करने के तरीके में एक व्यक्ति की सीमाओं से परे नहीं चला जाता।

नेतृत्व दरअसल मुख्य रूप से कार्यों को करने या संभव बनाने का विज्ञान है। लेकिन आज न सिर्फ भारत वर्ष में बल्कि कई अन्य देशों में स्थिति उलट है। अगर आप काम को होने से रोक सकते हैं तो आप नेता बन सकते हैं। अगर आप काम-काज ठप्प करा सकते हैं, शहर बंद कर सकते हैं, सडक़ रोको, रेल रोको जैसे आंदोलन सफल करा सकते हैं, तो इसका मतलब है कि आप नेता बन सकते हैं। दुर्भाग्य की बात है कि देश को रोकने की कला नेता बना रही है।

लेकिन नेतृत्व का मतलब तो यह होना चाहिए न, जहाँ नेता अपने व्यक्तिगत जीवन-यापन की चिंताओं से परे जाकर राष्ट्र निर्माण को वह एक बड़े फलक पर देखे। नेता का मतलब है,  एक ऐसा व्यक्ति जो उन चीजों को देख और कर सकता है, जो दूसरे लोग खुद के लिए नहीं कर सकते। नेता की उपस्थिति इसलिए जरूरी हो जाती है, क्योंकि लोग सामूहिक रूप से जहां पहुंचना चाहते हैं, वहां पहुंच नहीं पा रहे होते हैं | सभी एक लक्ष्य तक पहुंचना तो चाह रहे होते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वहां तक पहुंचा कैसे जाए।

कई बार कुछ लोगों के भीतर की करुणा इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वे अपनी सीमाओं से परे जाकर सोचने लगते हैं और खुद को ऐसे कामों और विचारों के साथ जोड़ लेते हैं जो उनके निजी स्वार्थों से संबंधित नहीं होते।  या, समाज में किसी बड़े स्तर पर हो रहे अन्याय के विरोध की वजह से, तो कई बार संघर्ष के पलों में अपनी व्यक्तिगतसीमाओं से आगे बढ़ जाने से ही किसी नए नेतृत्व का जन्म होता है और फिर अगर इन परिस्थितियों की वजह से  समाज अगर किसी व्यक्ति को अपना नेता बनाती है औरजन प्रतिनिधि के रूप में चुनती है तो उन्हें उनसे अपेक्षाएं भी ज्यादा होती हैं |

इसी सन्दर्भ में हमने सोंचा की क्यों न वैसे लोगो के काम-काजों की समीक्षा की जाये जिनके कन्धों पर अभी भारत निर्माण का दायित्व है | हमारी पूरी टीम कई दिनों तक भारत सरकार के मंत्रियों के कार्यों का लेखा जोखा लेती रही | हमने, मंत्रालयों में किये जा रहे काम, नौकरशाही पर पकड़ और आम लोगो के बीच उनके इमेज को काफी गंभीरता से टटोला और फिर दस श्रेष्ठ मंत्रियों का चुनाव किया गया | हम सभी चुने गए मंत्रियों के कार्यों की सराहना करते हैं और आशा करते हैं कि अन्य सभी मंत्री भी अपने कार्यो को लेकर और सजग होंगे जिससे हमारा भारत विश्व की शक्तिशाली इकोनॉमी बनने की राह पर और तेजी से आगे बढ़ सकेगा |

(राजीव मिश्र वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की जानी-मानी सर्वे एजेंसी एशिया पोस्ट के एडिटर-इन-चीफ़ हैं.)