संघ और भाजपा के बीच समन्वय सेतु हैं रामलाल

भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस दोनों ही संगठनों के प्रमुख स्तंभ माने जाने वाले रामलाल का व्यक्तित्व बेहद धीर-गंभीर और स्थायित्व भरा है. वैसे तो वे मथुरा के मूल निवासी हैं, लेकिन अब पूरा देश उन्हें अपने घर के समान लगता है. पार्टी के देश भर में चलने वाले अभियानों, शिविरों और कार्यक्रमों को दिशा देने में उनकी भूमिका अहम रहती है. उन्हें जमीन पर पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है.

अपनी कुशल प्रबंधन क्षमता और दूरदर्शिता के कारण बड़े से बड़े आयोजन को भी आसानी से निपटा देने वाले रामलाल एक बेहद साधारण व्यापारी परिवार से आते हैं. हालांकि वे बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध रहे थे, लेकिन सन 1974 में एक पूर्णकालिक प्रचारक के तौर पर कार्य प्रारंभ किया. सन 1998 में वे ब्रज के प्रांत प्रचारक बनाये गये. सन 2000 में उन्हें ब्रज, मेरठ और उत्तराखंड का क्षेत्र प्रचारक बनाया गया.

जुलाई 2006 में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गये और राष्ट्रीय संगठन मंत्री बनाये गये. कहा जाता है इस पद का गठन ही संघ ने भाजपा नेताओं की निगरानी करने के लिये किया है. संगठन मंत्री का कार्य भाजपा और संघ में समन्वय बनाये रखने का है. इस पद पर उनसे पहले संजय जोशी थे जिनके इस्तीफे के बाद श्री रामलाल को लाया गया.

रामलाल को लगातार कई चुनावों में महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गयीं जिनका निर्वहन बेहद सफलता पूर्वक कर उन्होंने अपनी क्षमता साबित की. हर चुनाव में उन्होंने खुद स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उन्हें पार्टी के पक्ष में काम करने के लिये प्रेरित किया.

रामलाल को चुनावों के विशेषज्ञ के तौर पर माना जाता है और भाजपा का बड़े से बड़ा नेता भी उनसे सलाह लेकर ही अपनी रणनीति तय करता है. उनकी छवि एक सुलझे हुए राजनेता की है और उन्हें बेहद कर्मठ माना जाता है.

व्यक्तित्व, रणनीतिक समझ, जिम्मेदारी, पार्टी में प्रभाव, छवि और राजनीतिक दखल आदि मानकों को ध्यान में रख कर किये गये देशव्यापी सर्वे में रामलाल को धाकड़ नेताओं में अहम स्थान प्राप्त हुआ है.