इंदिरा की झलक और राजीव का विजन रखती हैं प्रियंका गांधी

देश के सबसे डायनमिक राजनेताओं में से एक रहे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी की दूसरी संतान प्रियंका के व्यक्तित्व का सानी नहीं है. उनमें अपनी दादी आयरन लेडी इंदिरा गांधी की झलक दिखायी देती है और वैसे ही तेवर भी.

कांग्रेस में उनका खासा प्रभाव है और उनकी बात को पार्टी का हर छोटा-बड़ा नेता गंभीरता से लेता है. ऐसा शायद इसलिये भी है क्योंकि वे उस इंदिरा नेहरू परिवार की शानदार विरासत की वारिस हैं जिसका पार्टी में कई पीढ़ियों से प्रभुत्व कायम है.

कहा जाता है कि बचपन में दून पब्लिक बोर्डिंग स्कूल जाने के नाम पर भड़क जाने वाली प्रियंका को दिल्ली के मॉडर्न स्कूल व कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मेरी में दाखिला दिलवाया गया. उन्होंने दिल्ली युनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की है.

प्रियंका को अपनी बेहद दूरदर्शी रणनीतिक समझ के लिये जाना जाता है और अकसर वे चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों के बने-बनाये खेल को अपने चंद बयानों भर से तहस-नहस कर देती हैं. सन 1999 के लोकसभा चुनाव में जब रायबरेली सीट कांग्रेस के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गयी थी तब 27 साल की प्रियंका ने जाकर अपने रिश्ते के चाचा अरुण नेहरू के खिलाफ ऐसी बयानबाजी की कि फिजा बदल गयी. इसी साल भाजपा के गढ़ रहे बेल्लारी में अपनी मां सोनिया गांधी के पक्ष में धुआंधार कैंपेनिंग कर उन्हें जीत दिलाने का श्रेय भी प्रियंका को ही जाता है.

हाल ही में उन्हें देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की इकाई के महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. उनका राजनीतिक दखल इतना अधिक है कि प्रदेश में किस्मत आजमाने वाली सपा-बसपा औऱ यहां तक कि सत्ताधारी पार्टी भाजपा भी अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर हो गयी है.

हालांकि प्रियंका खुद को राजनीति से दूर रह कर जनसेवा करने वाला मानती रही हैं, लेकिन उनकी छवि एक तेज तर्रार और सोच-समझ कर बोलने वाली आक्रामक राजनेता की है औऱ प्रदेश व देश की जनता को उनसे काफी उम्मीदें हैं. 

व्यक्तित्व, रणनीतिक समझ, जिम्मेदारी, पार्टी में प्रभाव, छवि और राजनीतिक दखल आदि मानकों को ध्यान में रख कर किये गये देशव्यापी सर्वे में प्रियंका गांधी को धाकड़ नेताओं में अहम स्थान प्राप्त हुआ है.