छात्र जीवन से ही सियासी उफान पर हैं प्रेमचंद सिंह

जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता प्रेमचंद सिंह युवा राजनीति में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। 45 वर्षीय प्रेमचंद की प्रारंभिक शिक्षा सिवान के साघर सुल्तानपुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय में हुई।1983 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा द्वारा प्रस्तावित संस्कृत मध्य विद्यालय से संस्कृत बोर्ड द्वारा आयोजित प्रथमा परीक्षा पास किया। छात्र जीवन से नेतृत्व क्षमता की वजह से स्कूल में वर्ग मॉनीटर बनते रहे। इंटर की पढ़ाई इन्होंने बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से 1991 में किया, इसी दौरान छात्र एकता मंच कें माध्यम से छात्र राजनीति की शुरुआत की।

जिस वक्त इन्होंने छात्र राजनीति की शुरुआत की उस वक्त देश और प्रदेश में मंडल कमीशन और राम मंदिर का मुद्दा आमजन एवं छात्र नौजवानों के बीच ज्वलंत मुद्दा बना हुआ था। इन दोनों मुद्दे की लड़ाई को लेकर छात्र एकता मंच के माध्यम से अपने आपको छात्र राजनीति में सक्रिय किया, अपने शिक्षक पिता के इच्छा विरुद्ध राजनीति में सक्रिय हो गये। पिताजी ने राजनीति में सक्रियता को देखते हुए मुजफ्फरपुर से नाम कटवाकर पढ़ाई के वास्ते पटना के ए एन कॉलेज में नामंकन करवा दिया। उस वक्त ए एन कॉलेज को पटना के सभी राजनीतिक दलों का चारागाह माना जाता था। प्रेमचंद जो चाहते थे वही उन्हें यहां मिला मानो पंछी को पंख लग गया हो। पटना आने के बाद पुनः छात्र राजनीति में सक्रिय हो गये।

वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार गिरने के बाद एक कार्यक्रम में भाग लेने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पटना आये। प्रेमचंद सिंह को उस कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला और उनके दल में सक्रिय कार्यकर्त्ता के रुप में जुड़ गये। लगभग छः वर्षों तक राष्ट्रीय समाजवादी जनता पार्टी में विभिन्न पदों पर रहते हुए छात्र राजनीति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्य किया। इस दौरान राज्य के छात्र राजनीति के ज्वलंत मुद्दों को लेकर संघर्ष का सफरनामा ने इन्हें सामाजिक और वैचारिक रुप से राजनीति में सबलता प्रदान की। पप्पू यादव ने जब जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक दल बनाया तो प्रेमचंद को उन्होंने पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता बनाया, इस पद पर रहते हुए आज भी अपने कर्तव्यों का सफल निर्वहण करते आ रहे हैं।