मोदी की शिक्षा के ‘प्रकाश’ हैं जावड़ेकर

1971 में पुणे, महाराष्ट्र के एक नौजवान छात्र नेता को बैंक में नौकरी मिल गयी। हालांकि बैंक में उसके काम-काज से सभी प्रभावित थे, लेकिन वो जिस विचारधारा से प्रभावित था उसकी राह आंदोलनों से भरी थी। इमरजेंसी के दौर में इस नौजवान बैंक कर्मी को अपने तेवरों की वजह से जेल भी जाना पड़ा। जेल से छूटा तो बैंक ने उसे दोबारा काम पर रख लिया, लेकिन उसका लक्ष्य सरकारी नौकरी नहीं, लाखों-करोड़ों देशवासियों का संघर्ष था जो भ्रष्टाचार, अत्याचार और पक्षपात का शिकार होकर बेरोजगारी, भुखमरी और गरीबी की पीड़ा झेलने को विवश थे। उसने नौकरी छोड़ राजनीति का दामन थाम लिया। लंबे संघर्ष के बाद जब उसकी विचारधारा वाली सरकार आयी तो उसे केंद्र सरकार के एक महत्त्वपूर्ण मंत्रालय का मुखिया बनाया गया है। इस शख्य का नाम है प्रकाश केशव जावड़ेकर, जो केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री हैं और देश में शिक्षा जैसे अहम विभाग के अगुवा हैं।

प्रकाश केशव जावड़ेकर की गिनती देश के बड़े नेताओं में की जाती है। वे केंद्रीय मंत्री हैं और मोदी सरकार में बड़ा ओहदा रखते हैं व पार्टी के बड़े और सफल रणनीतिकार माने जाते हैं। प्रकाश जावड़ेकर पार्टी में अमित शाह, और पीएम मोदी के करीबी हैं तो संघ में भी खासा दखल वाले नेता माने जाते हैं। देश के काबिल मंत्रियों में शुमार प्रकाश जावड़ेकर ने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी। ये अलग बात है कि उनके परिवार का सियासत से कोई सीधा नाता नहीं था। एक मध्यम वर्गीय परिवार से निकलकर राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने की प्रकाश जावड़ेकर की कहानी आसमान में ध्रुव की तरह चमकने की कहानी जैसी है।

प्रकाश जावड़ेकर फिलहाल भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री हैं। वर्ष 2016 के जुलाई महीने की 5 तारीख को उन्हें राज्य मंत्री के पद से पदोन्नत करते हुए कैबिनेट मंत्री बनाया गया और मानव संसाधन विकास जैसा महत्त्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा गया। जावड़ेकर 2014 में सांसद नहीं थे, बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद् में उन्हें सबसे पहले 26 मई 2014 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और सूचना और प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री रूप में नियुक्त किया गया। इसके साथ-साथ 9 नवम्बर, 2014 तक उन्होंने संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में भी शानदार काम किया। इसके बाद उन्होंने 2016 के जुलाई महीने की 5 तारीख को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के राज्य मंत्री के काम को संभाला।

मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर मंत्रियों के कामों के बारे में जब समीक्षा की गई तो प्रकाश जावड़ेकर के नाम का खासा जिक्र किया गया। उन्होंने देश की नयी शिक्षा नीति में बदलाव करने की एक समिति बनायी। जावड़ेकर के शानदार काम-काज को देखते हुए ही मोदी सरकार अपने कैबिनेट में कई दफे उनका प्रमोशन कर चुकी है। बीजेपी सरकार के बीते चार सालों में जावड़ेकर के पास पर्यावरण, और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा भी रहा है। और लगभग हर विभाग में उन्होंने कमाल का काम किया है।

प्रकाश जावड़ेकर राज्य सभा के सदस्य हैं और वर्ष 2014 के जून महीने से मध्य प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सबसे पहली बार उन्हें मई, 2008 में महाराष्ट्र से राज्य सभा के लिए चुना गया था। प्रकाश जावड़ेकर ने रक्षा, मानव संसाधन विकास की संसदीय स्थायी समितियों और ऊर्जा सलाहकार समिति में सफलतापूर्वक शानदार कार्य किया। वे सदन के पटल पर रखे जाने वाले कागज़ात संबंधी समिति और अधीनस्थ विधायन संबंधी समिति के सदस्य भी थे। वे भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख वक्ताओं में से एक प्रकाश जावड़ेकर की सियासी समझ और ईमानदारी ही उनकी सफलता का राज है।

प्रकाश जावड़ेकर का जन्म वर्ष 1951 में जनवरी के महीने में 30 तारीख को पुणे में हुआ था। उनके पिता श्री केशव कृष्ण जावड़ेकर पत्रकार थे और लोकमान्य तिलक द्वारा स्थापित प्रतिष्ठित मराठी समाचार पत्र ‘केसरी’ में वरिष्ठ पद पर थे। उनकी माता श्रीमती रजनी जावड़ेकर प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका थीं। बालक प्रकाश की शिक्षा-दीक्षा महाराष्ट्र में ही हुई। उन्होंने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की महाड तहसील के जिला परिषद् स्कूल और सरकारी सहायता-प्राप्त हाई स्कूल में कक्षा पहली से लेकर नौवीं तक शिक्षा प्राप्त की। इसी दौरान उनका झुकाव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर हो गया। बाद में वे महाड में अपने स्कूल समय से ही संघ से पूरी तरह जुड़ गये। इसी के साथ जावड़ेकर ने राजनीति का ककहरा पढ़ना शुरू कर दिया। तब कोई नहीं जानता था कि सियासत की जिस राह पर वे चल पड़े हैं, एक दिन वही राह उन्हें उनके सपनों की मंजिल तक पहुंचाने में मददगार साबित होगी।

छात्र जीवन के दौरान ही प्रकाश जावड़ेकर ने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। आंदोलन के लिए जावड़ेकर हमेशा तैयार रहते थे। इसी दौरान वर्ष 1975 में ग्रेजुएट कॉन्सटीच्युएन्सी क्षेत्र से पुणे विश्वविद्यालय की सीनेट में चुने गये। इससे तीन वर्ष पहले वर्ष 1972 में जावड़ेकर गोपीनाथ मुंडे के नेतृत्व में श्री जय प्रकाश नारायण को सम्मानित करने वाली छात्र समिति के सचिव थे। जावड़ेकर के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जुड़े दिनों में प्रो. यशवंतराव केलकर और प्रो. बाल आप्टे ने उनका मार्गदर्शन किया। बकौल जावड़ेकर, केलकर और आप्टे ने उन्हें बताया कि कैसे राजनीति को बड़े अवसर में बदलना है।

छात्र जीवन और छात्र राजनीति के बीच 1971 में प्रकाश जावड़ेकर का चयन बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हो गया, लेकिन नौकरी के दौरान भी सियासत से उनका मोह नहीं छूटा। तमाम छात्र आंदोलनों से वो सक्रिय रूप से जुड़े रहे। 70 के दशक के मध्य में जब वे नौकरी कर रहे थे, दूसरी तरफ देश में वर्ष 1975 में कांग्रेस शासन ने इमरजेंसी को कड़ाई से लागू कर दिया। जावड़ेकर भी इस आंदोलन में फिर सक्रिय हो गये। हर रोज आंदोलन के दौरान जावड़ेकर भाषण जरूर देते थे। लोगों को उनकी बातें रास आती थीं और आसपास के लोग उनके भाषणों से काफी प्रभावित होते थे। 1975 के 11 दिसंबर की तारीख को सुबह 11 बजे से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जावड़ेकर समेत कई प्रमुख छात्र नेताओं की अगुवाई में पुणे में 11 कॉलेजों में सत्याग्रह का आयोजन किया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

जावड़ेकर कहीं भी खुद को खाली नहीं रखते थे और यरवदा जेल में भी उन्होंने एक साप्ताहिक वालपेपर ‘निर्भय’ निकाला जो लगभग 400 राजनैतिक कैदियों में बेहद लोकप्रिय हुआ। वहां उनकी मुलाकात तत्कालीन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अध्यक्ष बालासाहेब देवरस से भी हुई जिनसे वे बेहद प्रभावित रहते थे। जेल से निकलकर जावड़ेकर ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लिए कई सराहनीय कार्य किये लेकिन बैंक की नौकरी में राजनीति औऱ जनसेवा के लिये समय नहीं मिल पा रहा था।

एक साल एक महीने के बाद जेल से निकलकर जावड़ेकर ने साल 1978 और साल 1980 के बीच में मनोर, तहसील पालघर, और थाणे जिला में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की जनजातीय परियोजना पर कार्य करना शुरू किया। इसे काफी सफल काम माना गया। बाद में प्रकाश जावड़ेकर ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लिए सिक यूनिट सेल और रोजगार वृद्धि कार्यक्रम में भी काम किया। इस काम के लिए भी उन्हें जबरदस्त तरीके से सराहा गया। जावड़ेकर इस अवधि के दौरान महाराष्ट्र सरकार के युवा कल्याण बोर्ड के सदस्य भी थे और उन्होंने अनौपचारिक रूप से जनता पार्टी के लिए काम करना शुरू कर दिया।

इसी दौरान वर्ष 1977 में प्रकाश जावड़ेकर की शादी हो गयी। उनकी पत्नी प्राची का नाता भी सियासत से रहा है। वे भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कार्यकर्ता रह चुकी हैं। प्राची को भी वर्ष 1975 में इमरजेंसी का विरोध करने पर जेल भेज दिया गया था। वे शिक्षण से जुड़ीं और पुणे के इंदिरा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की डायरेक्टर भी रह चुकी हैं। बैंक के काम से ज्यादा जावड़ेकर को राजनीति के काम में मन लग रहा था। एक तरफ बैंक की नौकरी दूसरी तरफ सियासत। स्थिति ऐसी बनी कि दोनों में से किसी एक को चुनकर एक को अलविदा कहना था। हालांकि शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ गयीं थीं, फिर भी प्रकाश जावड़ेकर ने वर्ष 1981 में बैंक की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।

उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में काम करना शुरू कर दिया। उन्हें महासचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा का काम सौंपा गया। उन्होंने महाराष्ट्र में लगातार अच्छा काम किया और आने वाले वर्षों में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) की राष्ट्रीय कार्यकारी का सदस्य और बीजेवाईएम के बेरोजगार सेल का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। उन्होंने राज्य में बेरोजगारी के मामलों पर विस्तार से लिखा और बेरोजगारी के मसले पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई आंदोलन किये। जावड़ेकर ने पूरे महाराष्ट्र में ‘संघर्ष रथ’ की अगुवाई की। वर्ष 1989 के 10 मार्च को मुंबई में हजारों युवाओं को एकजुट किया। उन्हें बीजेवाईएम के अखिल भारतीय सचिव और महासचिव का पद दिया गया। वे वर्ष 1985 में यूएसए के युवा राजनीतिक नेताओं के हर एक काम के हिस्सेदार थे।

प्रकाश जावड़ेकर को 1990 और 1996 में पुणे क्षेत्र की ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएन्सी से महाराष्ट्र विधान परिषद् के लिए चुना गया। उन्हें भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र के प्रवक्ता का उत्तरदायित्व भी सौंपा गया। इसके साथ-साथ उन्हें महाराष्ट्र बीजेपी के प्रचार विंग के अध्यक्ष का काम भी दिया गया था। इस काम को भी जावड़ेकर बाखूबी निभा रहे थे। इस बीच में देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए छह लोकप्रिय डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनायीं। इन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को खूब पसंद किया गया। वर्ष1995 और वर्ष 1999 वे राज्य आयोजना बोर्ड,महाराष्ट्र के कार्यकारी अध्यक्ष बने।

वर्ष 2003 में प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली की राजनीति शुरु की जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया। इस पद पर वे वर्ष 2014 तक रहे और इस दौरान उन्होंने अपने काम को बहुत ही पेशेवर और वैज्ञानिक तरीके से निभाया। जावड़ेकर ने देश में हुए वोट के बदले नोट कांड का पर्दाफाश किया। कहा जाता है कि उस पूरे घटना को लोगों के सामने लाने में उनकी अहम भूमिका थी। वर्तमान सरकार में जावड़ेकर एक सुपर परफॉर्मर बनकर उभरे हैं और उनकी गिनती ऐसे मंत्रियों में होती है जो सिर्फ घोषणा नहीं करते बल्कि उन्हें अंजाम तक भी पहुंचाते हैं।

शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में जावड़ेकर ने जो काम किया है वो आंकड़े बताते हैं कि देश के शिक्षा क्षेत्र में इससे कितना बड़ा बदलाव आने वाला है। बीते चार सालों में देशभर में 103 केंद्रीय विद्यालयों और 62 नवोदय विद्यालयों की स्थापना की गयी है। इसके साथ-साथ 7 IIT, 7 IIM, 14 IIIT, 1 NIT की स्थापना की गयी है। जावड़ेकर ने साल 2014 से लेकर 2016 के बीच तीन करोड़ 30 लाख विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप देने का काम किया है। मानव संसाधन विकास मंत्री रहते हुए जावड़ेकर ने एससी-एसटी-ओबीसी छात्रों के लिए भी शानदार काम किया है। इन छात्रों के लिए फ्री कोचिंग की व्यवस्था भी की है। मंत्रालय अब इस तैयारी में है कि देश के 20 संस्थानों को प्रतिष्ठित संस्थानों के रूप में घोषित किया जाए। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जावड़ेकर की पूरी टीम ने शानदार काम किया है।

प्रकाश जावड़ेकर बीजेपी के लिए मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। पार्टी के लिए रणनीति बनाने से लेकर राजनीति को सफल दिशा में मोड़ने में उन्हें महारथ हासिल है। महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदार को लेकर आगे बढ़ रहे जावड़ेकर से पीएम मोदी और पार्टी को ढेरों आशाएं और उम्मीदें हैं। वे अपने लक्ष्य की तरफ लगातार बढ़ रहे हैं।

” मंत्री नंबर-1 वर्ष 2018″ में फेम इंडिया ने एशिया पोस्ट के साथ मिलकर मंत्रियों की छवि, उनका प्रभाव, विभाग की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता और परिणाम जैसे कुल 10 बिंदुओं पर केंद्र सरकार के मंत्रियों का आकलन किया और उनमें उपरोक्त आकलन में प्रकाश जावड़ेकर “चर्चित” कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं.