अंधेरे में उजाले का अभियान: पीयूष गोयल

एक सफल चार्टर्ड एकाउंटेंट के तौर पर देश के कई बड़े बिजनेस हाउसों के लिये काम कर चुके पीयूष गोयल आज भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। मोदी सरकार में गोयल की गिनती उन मंत्रियों में की जाती है जो चार साल में तीन मंत्रालयों के लिये शानदार तरीके से काम कर चुके हैं। बेजोड़ काम की बदौलत ही पिछले चार सालों में पीयूष गोयल का कद मोदी सरकार में बहुत तेजी से बढ़ा है। ऊर्जा मंत्रालय संभाल चुके पीयूष के पास इस वक्त रेलवे और कोयला जैसे मंत्रालय हैं। पार्टी के वित्तीय मामलों का देखरेख करने वाले पीयूष गोयल अमित शाह के तो करीबी हैं ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनपर काफी भरोसा करते हैं। यही वजह है कि पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना वाले मंत्रालय उनके पास है।

राजनीति पीयूष गोयल के खून में है। पीयूष के पिता वेद प्रकाश गोयल भी लंबे वक्त तक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके पीयूष के पिता वेदप्रकाश गोयल की गिनती भी शीर्ष के नेताओं में होती थी। पीयूष गोयल की मां भी राजनीति के क्षेत्र में कुशल मानी जाती रही हैं। पीयूष गोयल की मां भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई थीं। वो मुंबई बीजेपी से तीन बार महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुईं हैं।

अपने माता- पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए पीयूष गोयल साल 1984 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। शुरुआती दौर में पीयूष भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य थे। उनके पिता भले ही भारतीय जनता पार्टी में पहले से जुड़े रहे हों, कद्दावर रहे हों लेकिन पार्टी में स्थान बनाने के लिये पीयूष गोयल ने खुद से काफी मेहनत की है।

पीयूष गोयल का जन्म साल 1964 में जून महीने की 13 तारीख को महाराष्ट्र में हुआ था। उनकी पढ़ाई-लिखाई डॉन बॉस्को हाई स्कूल, माटुंगा से पूरी हुई है। शुरू से ही गोयल पढ़ने-लिखने में होशियार छात्रों में गिने जाते रहे हैं। स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई दफे अवॉर्ड जीते हैं। अपनी कुशाग्रता को गोयल ने लगातार बनाए रखा, आर्थिक रूप से संपन्न परिवार में पैदा हुए गोयल ने पढ़ाई-लिखाई पर पूरा ध्यान दिया। नतीजा ये हुआ कि वे लगातार सफल होते रहे। स्कूल की पढ़ाई के बाद उन्होंने कॉमर्स विषय में महारथसिल की।

जब-जब मौका मिला उन्होंने अपनी कुशाग्रता को साबित किया है। अखिल भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट की परीक्षा में उन्हें पूरे देश में दूसरा स्थान मिला था। कॉमर्स के साथ-साथ गोयल लॉ की भी पढ़ाई की है। गोयल ने मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई में दूसरा स्थान हासिल किया था। पीयूष गोयल की गिनती अच्छे निवेश बैंकरों में भी की जाती है। गोयल ने देश की शीर्ष की कॉरपोरेट कंपनियों के मैनेजमेंट, रणनीति और विकास के क्षेत्र में शानदार सेवाएं दी हैं। अभी भी गोयल मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी और विकास को लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को सलाह देते रहते हैं। पीयूष गोयल को साल 2011 में येल विश्वविद्यालय से, 2012 में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से और साल 2013 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय के लीडरशिप प्रोग्रामों में भाग लेने के लिये बुलाया गया था।

पीयूष गोयल को 3 दशकों से राजनीति करने का अनुभव है। पार्टी के कई कार्यक्रमों और कई जिम्मेदारियों को उन्होंने वक्त -वक्त पर संभाला। पार्टी के लिये हर मोर्चे पर लड़ने वाले गोयल अच्छे वक्ता भी हैं। पीयूष गोयल ने अपने काम करने के अंदाज़ और रणनीति बनाने के तरीके से पार्टी को साल 1991 में ही परिचय करा दिया था, जब उन्हें साल 1991 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार-प्रसार और अभियान की जिम्मेदारी दी गयी थी। कहा जाता है कि गोयल ने उस वक्त शानदार काम किया।

शुरू से ही चुनावों में पार्टी के लिये पीयूष गोयल प्रचार-प्रसार में प्रमुख भूमिका निभाते आये हैं। 90 के दशक के बाद साल 2004 में भी उन्होंने पार्टी के लिये कई चुनावों में शानदार काम किये। 33 वर्ष के लंबे राजनैतिक जीवन में गोयल को भारतीय जनता पार्टी ने जहां और जिस पद पर काम करने का मौका दिया, गोयल उस मौके को अपने हिसाब से अवसर में बदलते चले गये। इस वक्त वो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य हैं। गोयल को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कद्दावर राजनेताओं के साथ काम करने का अनुभव और गौरव दोनों प्राप्त है, वाजपेयी भी गोयल की खूब तारीफ किया करते थे।

पीयूष गोयल को साल 2010 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का पद दिया गया। ये वही मुबारक साल था जब पार्टी की ओर से उन्हें राज्यसभा के लिये भी चुना गया। साल 2012 के बाद गोयल राज्यसभा के सदस्यों के लिये कंप्यूटर के प्रावधान के बारे में बनी एक समिति में सदस्य के रूप में चुने गये। वक्त के साथ-साथ पीयूष गोयल सियासत में सीढ़ियों  पर कदम बढ़ाते गये और पार्टी में अपने काम-कौशल और ईमानदारी के दम पर ऊंचे मुकाम को छूते चले गये।

पीयूष गोयल की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंकों में से एक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा के बोर्ड में भी रहे हैं। पीयूष गोयल साल 2001 से लेकर साल 2004 तक बैंक ऑफ बड़ौदा के निदेशक थे। बाद में वो साल 2004 में बैंक ऑफ इंडिया के निदेशक बन गये। पीयूष गोयल को साल 2002 में भारत सरकार ने नदियों के इंटरलिंकिंग के लिये बनी टास्क फोर्स टीम में भी रखा था।

फिलहाल पीयूष गोयल के पास कोयला और रेल मंत्रालय का जिम्मा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीमार होने की वजह से उन्हें अस्थायी तौर पर वित्त मंत्रालय का काम भी सौंपा गया है। पीयूष गोयल राज्य सभा के सदस्य हैं। उन्हें साल 2016 में 3 जून को महाराष्ट्र से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर राज्य सभा भेजा गया।

साल 2014 का लोकसभा चुनाव बीजेपी के लिये कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण था। इस चुनाव के लिये पार्टी ने खास रणनीति तैयार की थी और इसी के तहत नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने गोयल के हिस्से कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी थीं। गोयल को सोशल मीडिया आउटरीच के साथ-साथ पार्टी के प्रचार और विज्ञापन अभियान से जुड़े कामों को देखने की जिम्मेदारी दी गयी थी। गोयल भारतीय जनता पार्टी की सूचना संचार अभियान समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

2014 में जब देश भर में बीजेपी की शानदार जीत हुई तो गोयल को फिर से अहम जिम्मेदारी दी गयी। मोदी सरकार बनने के साथ ही पीयूष गोयल को ऊर्जा मंत्री का पद दिया गया था। ये काम आसान न था। देश के उन सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का काम गोयल के लिये चुनौती के समान था, जिनमें आजादी के बाद से अब तक कभी बिजली पहुंची ही नहीं थी। एक आंकड़े के अनुसार अब पूरे देश में बिजली नहीं पहुंचने वाली गांवों की संख्या चार हजार से भी कम रह गयी है। साल 2014 में मोदी सरकार के आने से पहले ये आंकड़ा 18 हजार से भी अधिक था। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ छह गांव ऐसे बचे हैं. जहां तक बिजली नहीं पहुंच पायी है, जबकि कुछ समय पहले तक यह संख्या 1,500 से भी ज़्यादा थी।इसके अलावा बिहार में कुल 319 गांव ऐसे हैं, जहां बिजली पहुंचाने का काम बाकी रह गया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक ग्रामीण विद्युतीकरण मामले में बिहार सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाले राज्यों में से एक है। देश में अभी मात्र 3 हजार 9 सौ 97 गांवों में बिजली नहीं पहुंची है। सरकार को उम्मीद है कि ये आंकड़ा जल्द ही शून्य में बदल जायेगा।

मोदी सरकार और बीजेपी की ओर से चार साल पूरे होने पर जब सरकार के मंत्रियों के कामों की समीक्षा की गयी तो पीयूष गोयल के काम को सबसे शानदार पाया गया। कहा जा रहा है कि उनके बेहतर कामों को देखते हुए ही पीएम मोदी और अमित शाह ने उनकी जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। ऊर्जा और कोल के क्षेत्र में उनके काम को देखकर पार्टी और कैबिनेट दोनों ही जगह गोयल की तारीफ होती है।

पीयूष गोयल के काम को देखते हुए ही उन्हें सुरेश प्रभु के बाद रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गयी। रेल के क्षेत्र में भी वे अपनी पूरी टीम के साथ शानदार काम करने में लगे हुए हैं। देश में कुछ-कुछ दिनों पर होने वाले रेल हादसों को रोकने की दिशा में वे काम कर रहे हैं। ये रेलवे के लिये बड़ी चुनौती है लेकिन उम्मीद जतायी जा रही है कि गोयल की टीम इसे पूरा कर सफलता हासिल कर लेगी। रेल मंत्री बनते ही पीयूष गोयल ने सबसे पहले ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिये, इसके साथ-साथ ट्रेन के रख रखाव और सफाई पर भी गोयल ने जोर दिया है। गोयल के रेल मंत्री बनते ही सभी ट्रेनों में बॉयो टॉयलेट लगाने की योजना पर भी काम हो रहा है। उम्मीद है साल 2018 के आखिर तक सरकार इसे पूरा कर लेगी। रेलवे अधिकारियों को गोयल ने सभी ट्रेनों में लगे गंदे कोच हटाने के निर्देश भी दिये हैं। लगे हाथ कोच को हाईटेक करने पर भी विचार किया जा रहा है।

इससे पहले बतौर कोयला मंत्री भी उन्होंने शानदार काम किया था। बीजेपी आलाकमान ने इस बात को काफी गंभीरता से महसूस किया है कि मोदी सरकार के कद्दावर मंत्रियों में से एक पीयूष गोयल ने ऊर्जा और कोल क्षेत्र में सुधार लागू करने के लिये हर जरूरी काम किये हैं। कोल विभाग में बगैर भ्रष्टाचार कोल ब्लॉक के आवंटन को भी एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों ने भी इस बात को बताया कि गोयल के मंत्री रहते हुए कोयले की उत्पादकता काफी बढ़ी है। कहा तो ये भी जा रहा है कि शॉर्ट सप्लाई घटी है जिससे आयात में काफी बढ़ोत्तरी हो गयी है। अब आंकड़ों के हिसाब से अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत का सौर ऊर्जा उत्पादन 18 गीगा वा तक बढ़ सकता है। यह गोयल के साल 2014 में ऊर्जा मंत्री के तौर पर पद संभालने के समय से 6 गुना ज्यादा है।

वक्त के साथ ऐसा भी मौका आया जब पीएम मोदी ने पीयूष गोयल को अस्थायी तौर पर देश के वित्त मंत्री की जिम्मेदारी भी दे दी। अरूण जेटली की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें छुट्टी पर भेजा गया और गोयल को साल 2018 के मई महीने के दूसरे हफ्ते में अस्थायी वित्त मंत्री बना दिया गया। पूरी पार्टी और कैबिनेट में गोयल ने अपने काम से सबको प्रभावित किया है, यही कारण है कि पीएम मोदी ने वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय के लिये जेटली के बाद पीयूष गोयल पर भरोसा जताया।

पीयूष गोयल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का मैन फ्राइडे यानी संकटमोचन कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी ने एक अतिरिक्त सीट जीतने का दांव चला तो उसके प्रबंधन के लिये पीयूष गोयल को लखनऊ भेजा गया था। पीएम मोदी ने उन्हें झारखंड में भी राज्यसभा चुनाव का प्रबंधन देखने को कहा था, ये सारी बातें उनके मेहनती होने के साथ ही उनकी ईमानदारी को दिखाता है।

पीयूष गोयल का विवाह सन् 1991 में 1 दिसंबर को हुआ था। उनकी पत्नी सीमा गोयल फिलहाल एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रही हैं। दो बच्चों के पिता पीयूष गोयल के बेटे ध्रुव गोयल न्यूयॉर्क में नौकरी करते हैं। जबकि उनकी बेटी राधिका गोयल हॉरवर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका से पढ़ाई कर रही हैं।

पीयूष गोयल भारतीय जनता पार्टी के मजबूत स्तंभों में से एक माने जाते हैं। पार्टी के लिये रणनीति बनाने, केंद्र से लेकर राज्य तक पार्टी को आगे बढ़ाने से लेकर राजनीति को सफल दिशा में मोड़ने में उन्हें महारथ हासिल है। अपने लक्ष्य की तरफ लगातार बढ़ रहे हैं। पीयूष गोयल को उम्मीद है कि वो एक दिन जरूर सफल होंगे।

” मंत्री नंबर-1 वर्ष 2018″ में फेम इंडिया ने एशिया पोस्ट के साथ मिलकर मंत्रियों की छवि, उनका प्रभाव, विभाग की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता और परिणाम जैसे कुल 10 बिंदुओं पर केंद्र सरकार के मंत्रियों का आकलन किया और उनमें उपरोक्त आकलन में पीयूष गोयल “असरदार” कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं.