त्वरित फैसले के लिए जाने जाते हैं मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत

Niti Nirmata, Om Prakash Rawat

1977 बैच के मप्र कैडर के आईएएस अधिकारी रहे ओम प्रकाश रावत की पहचान हमेशा से एक लगनशील और ईमानदार अधिकारी के रूप में रही है। 31 दिसंबर, 2013 को केंद्र सरकार में सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए श्री रावत मध्यप्रदेश में बाबू लाल गौर सरकार में मुख्य सचिव पद पर भी रह चुके हैं। 19 अगस्त 2015 को उन्होंने चुनाव आयुक्त का पद संभाला। 23 जनवरी 2018 को देश के मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला है।

ओम प्रकाश रावत का जन्म 02 दिसंबर 1953 को उत्तर प्रदेश के झांसी में हुआ है। रावत स्कूल के दिनों से ही मेधावी छात्र रहे हैं। वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी किया है। रावत ने यूके से सोशल डेवलपमेंट प्लानिंग में एमएससी किया है। ओम प्रकाश रावत फैसले लेने में देरी नहीं करते हैं। यह उनकी मजबूती है। खास बात यह है कि उनके फैसले मैरिट पर आधारित होते हैं। इनके तेज तर्रार काम के लिए, ईमानदारी के लिए ख्यात रावत को प्रधानमंत्री की ओर से सर्वश्रेष्ठ लोकसेवक का पुरस्कार भी मिल चुका है। उन्होंने मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जमीन के हक से संबंधित कानून को कामयाबी से लागू कराने में अहम किरदार निभाया था। रावत नर्मदा नदी के लिए भी कार्य कर चुके हैं। ओम प्रकाश रावत 31 दिसंबर, 2013 को केंद्र सरकार में सचिव पद से रिटायर हुए।

ओम प्रकाश रावत अपने सेवा काल में मध्यप्रदेश राज्य सरकार के कई अहम पदों पर आसीन रहे। वे प्रदेश के नरसिंहपुर (1983-89) और इंदौर (1986-88) के डीएम रह चुके हैं। उन्होंने मऊ और इंदौर में सांप्रदायिक दंगों को रोकने में अहम रोल निभाया था। उन्होंने दंगा प्रभावित इन जिले में अपने विवेक और त्वरित फैसले से लोगों में आम जीवन के लिए आत्मविश्वास पैदा किया। रावत मध्यप्रदेश में बाबू लाल गौर शासनकाल के 2004-2006 में मुख्य सचिव पद पर भी कई अहम फैसले के लिए जाने जाते हैं। केंद्र और राज्य में कई अहम पदों पर रहकर रावत ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने नर्मदा वैली डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन और एक्साइज कमिश्नर भी रह चुके हैं। रावत ट्राइवल वेलफेयर डिपार्टमेंट में प्रधान सचिव पद पर रहते हुए आदिवासियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं को मूर्त रूप दिया। रावत केंद्र में रहते हुए कई सार्वजनिक क्षेत्र के कंपनियों के सचिव पद पर भी रहे। भारी उद्योग मंत्रालय में सार्वजनिक उद्यम विभाग में सचिव भी रहे। केंद्र में रावत ने वर्ष 1993 में रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया।

साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ओम प्रकाश रावत को चुनाव आयुक्त बनाया गया था। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। चुनाव आयुक्त बनने से पहले ओम प्रकाश रावत केंद्र में सचिव थे।

ओम प्रकाश रावत देश भर में चुनाव प्रक्रिया में सुधार लाने की दिशा में चलाए जा रहे जागरुकता अभियान के लिए पहचाने जाते हैं। श्री रावत की पहली प्राथमिकता देश में हर मतदाता को चुनाव प्रक्रिया से जोड़ना और मतदान में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। जिसके लिए वे सदा तत्पर हैं। फेम इंडिया एशिया पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें देश के प्रमुख प्रभावशाली नीति निर्माताओं में से पाया है।