देश और देश की जनता के प्रति समर्पित नौकरशाह रहे हैं नृपेंद्र मिश्र

Nripendra Mishra

भारतीय प्रशासनिक अधिकारी रहे नृपेंद्र मिश्र जनता की भलाई के लिए सरकारी व्यवस्था में अनुशासन को सर्वोपरि मानते हैं। एक नौकरशाह के रूप में विभिन्न पदों पर उनकी कार्यशैली ने बताया है कि उनके लिए देश और देश की जनता सर्वोच्च है। यही कारण है कि वे लक्ष्यों को तय कर उनके अनुसार व्यवस्था को बदलने में माहिर हैं। जटिल स्थितियों के बीच से राह निकाल कर लक्ष्य प्राप्त करना उनका जुनून है। सरल व्यक्तित्व के धनी मिश्र अपने बारे में स्वयं नहीं बोलते बल्कि उनका काम बोलता है।

8 मार्च, 1945 को जन्मे श्री मिश्र प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव बनने से पूर्व श्री मिश्र विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की कार्यकारिणी परिषद के सदस्य थे। यहाँ वे देश को उन्नति के शिखर पर ले जाने जाने वाली नीतियों पर अध्ययन करते थे। इससे पूर्व आईएएस की नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद मार्च, 2006 से श्री मिश्र तीन वर्ष के लिए दूरसंचार नियामक (ट्राई) के चेयरमैन भी रहे। ट्राई चेयरमैन के रूप में श्री मिश्र ने दूरसंचार क्षेत्र की निविदाओं के लिए बहुस्तरीय निविदा प्रणाली की सिफारिश की थी जिसे खारिज कर तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने अपनी नीति लागू की जो 2जी घोटाले के रूप में सामने आया। श्री मिश्र ने इस मामले में ए. राजा के झूठ को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मूल निवासी श्री मिश्र के व्यक्तित्व को सजाने-सँवारने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा की विशेष भूमिका रही है। उनके दादा चंद्रशेखर मिश्र अंग्रेजी हुकूमत में बड़े अफसर थे जहाँ से उऩ्हें अनुशासन का पाठ मिला। उनके पिता सिवेशचंद्र मिश्र कानपुर विद्युत विभाग में कार्यरत थे जहाँ से वे आम आदमी की जरूरतों से परिचित हुए। इस पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र, लोक प्रशासन और रसायनशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि ली। और फिर स्वयं को और माँजने के लिए जॉन एफ. कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, हार्वर्ड विश्वविद्यालय से भी लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। श्री मिश्र के पुत्र साकेत मिश्र वर्तमान में विश्व बैंक, शिकागो में हैं। श्री मिश्र के एक दामाद कर्नाटक कैडर के 1998 बैच के आईएएस हैं जबकि दूसरे दामाद दिल्ली में वकील हैं।

उत्तर प्रदेश कैडर के 1967 बैच के आईएएस अधिकारी नृपेन मिश्र अगस्त, 1985 में वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में सचिव (आर्थिक) बने और वे बहुपक्षीय और द्विपक्षीय अनुदानित कार्यक्रमों की निगरानी समेत भारत और अमेरिका के बीच व्यापार एवं आर्थिक संबंधों के सभी पहलुओं के लिए जिम्मेदार थे। जनवरी, 1990 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रधान सचिव बने। उनका यह काल उत्तर प्रदेश में अच्छे प्रशासन के रूप में याद किया जाता है। अक्टूबर, 1992 में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के चेयरमैन एवं सीईओ बनने पर उन्होंने ग्रेटर नोएडा के विकास में महती भूमिका अदा की। वर्ष 1995-96 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में प्रधान सचिव, गृह-द्वितीय बनाया गया। नवंबर, 1996 से जनवरी, 2002 तक उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय में काम किया। फिर वे दो वर्ष उर्वरक सचिव और दो वर्ष तक दूरसंचार सचिव रहे।

नृपेन मिश्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मई, 2014 को अपना प्रधान सचिव बनाया। प्रधान सचिव के रूप में अपने अब तक के तीन वर्ष के कार्यकाल में श्री मिश्र ने प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के बीच तालमेल कर सरकारी विभागों की छवि में आमूलचूल परिवर्तन कर दिया है। ईमानदार और सख्त प्रशासक के रूप में जाने जाने वाले मिश्र को पिछले तीन वर्षों के कार्यकाल में केंद्र के सरकारी कर्मचारियों के रवैये को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का श्रेय है। उन्होंने न केवल प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और स्वप्निल योजनाओं के निर्माण में महती भूमिका निभायी बल्कि उनमें से कई योजनाओं को जमीन पर उतार कर भी दिखाया। काम के प्रति शिथिलता या लापरवाही के प्रति सख्त रवैया रखने और काम को अंजाम तक पहुँचाने के श्री मिश्र के इतिहास के कारण ही उन्हें हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के काम-काज पर भी नजर रखने की विशेष जिम्मेदारी दी गयी है। फेम इंडिया एशिया-पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें देश के प्रमुख प्रभावशाली नीति निर्माताओं में से पाया है।