टेक्नोक्रेटिक विश्वसनीयता ने दिलाई जिम्मेवारी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह एन के सिंह को

Niti Nirmata, NK Singh

पूर्व सांसद, राजस्व एवं व्यय सचिव एनके सिंह को 15 वें वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वरिष्ठ नौकरशाह के रूप में शानदार कार्यकाल, टेक्नोक्रेटिक विश्वसनीयता और राज्य एवं केंद्र की वित्तीय स्थितियों की जानकारी के कारण उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।

एनके सिंह का जन्म 27 जनवरी 1941 को कोलकात्ता में हुआ। पढ़ाई में शुरु से ही मेधावी छात्र रहे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से मास्टर डिग्री की। बेहद नामी अर्थशास्त्री सुखोमाय चक्रवर्ती, अमर्त्य सेन और जगदीश भगवती उनके सागिर्द रहे हैं। एनके सिंह सेंट स्टीफेंस कॉलेज में फेकेल्टी रहते हुए आईएएस के लिए चयनित हुए।

भारतीय जनता पार्टी के सदस्य एनके सिंह 2008 से 2014 तक राज्य सभा के सांसद रहे हैं। उन्होंने वित्त मंत्रालय के राजस्व एवं व्यय विभाग में सचिव के रूप में सेवाएं प्रदान की है। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में एनके सिंह आफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी थे। वह योजना आयोग के सदस्य भी रहे हैं। योजना आयोग में सदस्य के रूप में अहम भूमिका भी निभा चुके हैं।

हाल तक एनके सिंह वित्तीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन समिति के चेयरमैन रहे हैं, जिन्होंने वित्त वर्ष 2023 तक के राजकोषीय खाके के मसौदा कानून का प्रस्ताव किया था, जिसे संसद के पटल पर पेश किया जा सकता है।

एनके सिंह देश के विभिन्न पदों पर रहे हैं। 1989-71 में वाणिज्य मंत्रालय में ट्रेड पॉलिसी डिवीजन में अवर सचिव के पद पर रहे। इसी मंत्रालय में 1973 में प्रभारी मंत्री के विशेष सहायक पद पर उनकी नियुक्ति हुई। 1977-79 में बिहार सरकार के सिंचाई विभाग में विशेष सचिव पद पर रहे। 1979-80 में बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर इनकी नियुक्ति हुई। 1981-85 में जापान स्थित भारतीय दूतावास में मंत्री (आर्थिक एवं वाणिज्यिक मामले) पर अपनी अहम भूमिका निभाई। 1987-90 में बिहार सरकार में अतिरिक्त वित्त आयुक्त पद पर इनकी अहम नियुक्ति हुई। 1990-91 में केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्ति हुई। 1991-93 में वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामले विभाग में संयुक्त सचिव पद अहम कार्यकाल निभाया। 1993-95 में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग में अतिरिक्त सचिव पद पर रहे। 1995-96 में एनके सिंह व्यय सचिव, सार्वजनिक निवेश विभाग के अध्यक्ष पद पर रहे। 1996-98 तक वे वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव के पद पर रहे। 1998-2001 के बीच प्रधानमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में अहम भूमिका में रहे। प्रधानमंत्री के व्यापार और उद्योग परिषद के सदस्य सचिव, दूरसंचार पर कार्यबल के सदस्य सचिव एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर गठिक कार्यबल के सदस्य सचिव के रूप में अहम भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा हाइड्रोकार्बल 2020 पर गठित मंत्रिसमूह के सदस्य के अलावा विभिन्न पदों पर सुशोभित भी किया। 2001-04 तक योजना आयोग के सदस्य रहे एवं ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सुधार पर गठित कार्यबल के अध्यक्ष पद पर इनकी नियुक्ति हुई। केंद्र सरकार में वित्त मंत्रालय में अहम पद पर कार्य करते हुए वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और यूएनडीपी के साथ बेहतर तालमेल के साथ कार्य किया।

एनके सिंह के विराट अनुभव का लाभ केंद्र सरकार को मिलेगा। क्योंकि इस बार वित्त आयोग का कार्य बिल्कुल अलग है। पहले योजना आयोग था जिसके द्वारा राज्यों को वित्त आवंटन किया जाता था। अब यह कार्य वित्त आयोग के पास होगा। एनके सिंह की यह जिम्मेवारी दी गई है जो जीएसटी के लागू होने के बाद केंद्र व राज्य के पैटर्न में बदलाव आया है इसे वित्तीय संतुलन को कैसे बेहतर बनाया जाए। जीएसटी के लागू हो जाने के बाद राज्यों की करों की वसूली में यदि कमी आती है तो उसके क्षतिपूर्ति की जिम्मेवारी केंद्र पर होगी जिसे एनके सिंह के अनुभव का लाभ लेकर सरकार इसका हल निकालेगी। एनके सिंह की अगुआई में वित्त आयोग मजबूत राजकोषीय प्रबंधन के लिए राजकोषीय स्थिति मजबूत करने की व्यवस्था पर सुझाएगा। फेम इंडिया एशिया पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें देश के प्रमुख प्रभावशाली नीति निर्माताओं में से पाया है।