हिंदुस्तान के हाईवे के हीरो : नितिन गडकरी

राजनीति और क्रिकेट, दोनों ही  मैदानों में टीम में भले ही कप्तान एक और कई सारे चमकते सितारे हों लेकिन कोई एक ऑल राउंडर ऐसा होता है जो किसी भी परिस्थिति में प्रदर्शन की दशा और दिशा ही बदल देता है. केंद्र में वर्तमान मोदी सरकार में ऐसे ही चैंपियनों के चैंपियन साबित हुए हैं नितिन गडकरी. एक ऐसे कुशल और मंझे हुए नेता, जो किसी भी लक्ष्य को पाने की कसौटी पर निरंतर खरे उतरते रहे हैं.

राजनीति की पिच पर चार साल से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर के मोदी सरकार के सबसे चमकते हुए सितारे के तौर पर उभरने वाले नितिन गडकरी ना केवल  मैन ऑफ द मैच या मैन ऑफ द टूर्नामेंट बल्कि मैन ऑफ द गवर्नमेंट बन कर उभरे हैं. सच तो यह है कि प्रदर्शन की यही उत्कृष्टता और निरंतरता नितिन गडकरी के अब तक के राजनीतिक कैरियर की सबसे बड़ी पहचान और उपलब्धि रही है. एक ऐसी शख्सियत, जिस पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का भरोसा किया जा सकता है.

स्वभाव से सौम्य, सरल, मृदुभाषी नितिन गडकरी हमेशा ही जमीनी हकीकत से जुड़े हुए कार्यकर्ता रहे हैं तथा व्यक्तित्व और आत्मविश्वास के मांमले में एक दबंग और लोकप्रिय नेता के तौर पर उभरे हैं। अपने काम, लक्ष्यों और आकांक्षाओं को लेकर हमेशा केंद्रित रहने वाले नितिन गडकरी के यही गुण और खासियतें उन्हें नये उभरते नेताओं के लिए एक आदर्श प्रेरणा स्रोत और मिसाल के तौर पर स्थापित कर रहे हैं.

भाजपा में तमाम दिग्गज और अनुभवी नेताओं की मौजूदगी के बावजूद केंद्रीय मंत्रिमंडल में सबसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने की जिम्मेदारी उन पर सौंपना ही यह दर्शाता है कि ना केवल उनकी क़ाबलियत, कार्यकुशलता और प्रबंधन क्षमता संदेह के परे है बल्कि हकीकत यह भी है कि अकस्मात किसी प्रतिकूल परिस्थिति के पैदा होने पर उन्हें निःसंदेह सार्वाधिक योग्य मंत्री के सबसे प्रबल दावेदारों में शुमार किया जा सकता है.

उनके पक्ष में एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कर्मठ कार्यकर्ता रहे हैं और उनकी यही विश्वसनीयता उन्हें अन्य नेताओं के मुकाबले ठोस धरातल प्रदान करती है. गडकरी खुद को पार्टी की विचारधारा और नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध मानते हैं और पार्टी द्वारा तय की गयी किसी भी जिम्मेदारी को उठाने से कभी नहीं हिचकिचाते.

नितिन गडकरी को सड़क परिवहन क्षेत्र में अपने क्रांतिकारी और ऐतिहासिक विचारों और योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ख्याति अर्जित हुई है. यही वजह है कि केंद्र में मोदी सरकार के गठन के समय से ही देश में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर सौंपी गयी. नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अलावा राजमार्ग और जहाजरानी मंत्रालय का कामकाज भी देख रहे हैं.  इसके अलावा वे जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे हैं.

नितिन गडकरी के कार्यकाल के दौरान ना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश काफी तेजी से बढ़ा है बल्कि देश भर को सड़कों के जाल से जोड़ने का काम काफी तेजी से हो रहा है. मंत्रालय द्वारा चलायी जा रही योजनाओं में निवेश की कुल लागत 8 लाख करोड़ रुपये की है. देश में अपनी तरह के पहले और छह लेन  वाले मुंबई-पुणे एक्सप्रेस हाईवे को रिकॉर्ड समय में पूरा करके ख्याति  अर्जित करने वाले गडकरी की अध्यक्षता में नैशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम करते हुए उपलब्धियों के नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.

इनमें दिल्ली से मेरठ के बीच पहला 14 लेन एक्सप्रेस हाईवे, मुंबई में वर्ली बांद्रा सी-लिंक, दिल्ली का द्वारका एक्सप्रेस हाईवे और सागरमाला प्रोजेक्ट शामिल हैं. वर्तमान सरकार से पहले तक एक दिन में सड़क निर्माण की अधिकतम सीमा 2 किलोमीटर रह गयी थी जो अब  मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 27 किलोमीटर के आस-पास चल रही है. नितिन गडकरी का लक्ष्य है कि सड़क निर्माण का यह आंकड़ा इस साल के अंत तक रोज़ाना 40 किलोमीटर तक पहुँच जाये.

नितिन गडकरी भारत में सामानों के आवागमन के लिये जल परिवहन का विकल्प उपलब्ध कराने की महत्त्वाकांक्षी योजना पर भी काम कर रहे हैं जो यातायात की रूपरेख बदल देगा। जल मार्ग, सड़क या रेल मार्ग के मुकाबले, न सिर्फ सस्ते हैं बल्कि इनमें प्रदूषण या ट्रैफिक जाम की समस्या भी न के बराबर है। गडकरी ने जब इस मंत्रालय का कार्यभार संभाला था तब देश में सिर्फ 4-5 जलमार्ग मौजूद  थे जिन्हें बढ़ा कर देश की 101 नदियों में जलमार्ग विकसित करने की योजना पर काम शुरु किया गया है. इसके परिणाम आने भी लगे हैं। वे विदेशों की तरह भारत में क्रूज़ टूरिज़्म विकसित करने के लिये भी प्रयत्नशील हैं। 

जहाजरानी मंत्रालय के अंतर्गत उनकी महत्वाकांक्षी योजना देश के 12 बंदरगाहों को जोड़ने की है. इन सभी बंदरगाहों के विकास का काम भी काफी तेज गति से चल रहा है. इनमें स्पेशल इकोनॉमिक जोन और आधुनिकतम सुविधाएं भी उपलब्ध  होंगी. इसके अलावा गंगा कायाकल्प मंत्रालय के तहत चलाये जा रहे अभियान में मार्च 2019 तक गंगा को तकरीबन 70 फ़ीसदी साफ करने का लक्ष्य रखा गया है.

एक कुशल नेता के तौर पर नितिन गडकरी ने अपनी उपयोगिता विपरीत परिस्थितियों में कई बार साबित की है. 2009 में सबसे कम उम्र के भाजपा का अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने जिस तरह पुनर्गठन और नीतियों में बदलाव किया, उसने इस राजनीतिक दल में कामकाज करने के तरीकों का कायाकल्प कर दिया. 2014 में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत के लिये इस संगठनात्मक बदलाव को एक बड़ी वजह माना जाता है। ग़ौरतलब है कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार रिकॉर्ड तोड़ जन समर्थन हासिल करने वाली बड़ी ताकत बनकर उभरी बल्कि 1984 के बाद पहली बार पूर्ण बहुमत पाने वाली पार्टी भी बनी.

27 मई, 1957 को महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे और पले-बढ़े नितिन गडकरी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा नागपुर में ही हुई और वहीं से उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर तक की पढ़ाई भी पूरी की. अपनी युवावस्था के दौरान ही वे भारतीय जनता पार्टी (तब जनसंघ) के युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में काफी सक्रिय रूप से राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते रहे. उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से कॉमर्स और कानून की पढ़ाई पूरी की. इसके अलावा बिजनेस मैनेजमेंट में डिप्लोमा हासिल करने वाले गडकरी का मानव संसाधन क्षमता प्रबंधन में भी खासा रुझान रहा है. इसी वजह से वे एक सफल उद्यमी बनने में भी कामयाब रहे हैं.

नितिन गडकरी दिसंबर, 2009 से  जनवरी, 2013 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. अपने राजनीतिक कैरियर में हासिल उपलब्धियों की बदौलत ही 52 वर्ष की आयु में वे पार्टी के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने. सच तो यह है कि उनका कार्यकाल इतना प्रभावशाली रहा कि भाजपा ने उन्हें लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बनाने के लिए अपनी पार्टी के संविधान में संशोधन भी किया. इसकी  एक प्रमुख वजह यह भी रही कि नितिन गडकरी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ज्यादा करीबी और विश्वासपात्र माने जाते हैं. इसके पूर्व उन्होंने महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष पद का कार्यभार भी संभाला और महाराष्ट्र विधान परिषद में भाजपा की ओर से विपक्ष के नेता भी रहे.

जब  उन्होंने भाजपा के नौवें राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पदभार संभाला, उस समय भाजपा अंदरूनी राजनीति का शिकार थी और संक्रमण काल के दौर से गुजर रही थी.  2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में पराजय के बाद भाजपा पुनर्गठन और फिर से जड़े जमाने के दौर से गुजर रही थी. ऐसे समय में भाजपा को नयी दिशा देने की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी गडकरी पर सौंपी गयी. संगठन को संभालने और नया रूप देने के प्रयास के दौरान उन्होंने भाजपा की कार्यशैली और नीतियों का काफी हद तक कायाकल्प किया और आश्चर्यजनक परिणाम हासिल किया. उनके कार्यकाल के दौरान ही भाजपा ना केवल सभी राज्यों में अभी जड़े मजबूत करने में कामयाब हुई. थोड़े अंतराल के बाद भाजपा केंद्र में भी सरकार बनाने में सफल हुई.

अध्यक्ष का पदभार संभालने के साथ ही गडकरी ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया था कि उनका मुख्य एजेंडा विकास पर ध्यान केंद्रित करना है. गौरतलब है कि लेखक तुहिन सिन्हा के साथ मिलकर उन्होंने ‘’इंडिया एस्पायर्स’’ नाम की किताब लिखी, जिसमें उन्होंने विकास से जुड़े अपने विचार काफी विस्तृत तौर पर पेश किये हैं. गडकरी की विकास की योजना में ग्रीन ऊर्जा के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग,वैकल्पिक ईंधन और प्रभावशाली कूड़ा प्रबंधन पर खास तौर से ध्यान दिया गया है.

विकास को लेकर गडकरी का यह अति-उत्साही रवैया भारत जैसे विकासशील देश के लिए काफी जरूरी भी है ताकि सालों से धीमी पड़ी हुई विकास की गति को तेज रफ्तार प्रदान की जा सके. उनके कार्यकाल के दौरान ही पार्टी में विभिन्न ऐसे सेल गठित किये गये, जो भाजपा की राज्य सरकारों द्वारा विकास की दिशा में राज्यों में किये जा रहे प्रयासों को नियमित अंतराल पर मॉनिटर कर सकें. नीतियों की लगातार समीक्षा कर उनमें सुधार लाने और नये विचारों का कार्यान्वयन करने या उन्हें समाहित करने की उनकी रणनीति एक काफी प्रभावशाली कदम साबित हुआ.

नितिन गडकरी के राजनीतिक कैरियर पर नजर डालें तो उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र संगठन से शुरुआत की. जल्दी ही सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. इसके बाद में लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गये और 1990 में पहली बार विधान परिषद के लिए चुने गये जबकि 2008 में आखिरी बार. वे महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे. जमीन से जुड़े कार्यकर्ता के रूप में पहचान बनाने वाले गडकरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अपने ऊर्जावान और सरल व्यक्तित्व के कारण वे हमेशा सभी वर्गों और नेताओं की नजरों में तो लोकप्रिय रहे ही, विपक्षी नेताओं से भी उन्हें हमेशा सम्मान हासिल होता रहा है.

महाराष्ट्र विधानसभा में 1995 में शिवसेना के साथ भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन वाली सरकार में वे लोक निर्माण मंत्री बने. 1999 तक इस पद पर बने रहने के दौरान के चार सालों में उन्होंने मंत्रालय की कार्य प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया. इसी दौरान नितिन गडकरी ने इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश के निजीकरण को बढ़ावा दिया और निजी निवेशकों, कांट्रेक्टरों, बिल्डरों तथा अन्य व्यापार संगठनों के साथ बातचीत करके उन्हें इसके लिए राजी किया. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पूरे राज्य में सड़कों, हाईवे और फ्लाईओवरों का जाल बिछा दिया. इनमें भारत का पहला छह लेन वाला हाई स्पीड एक्सप्रेसवे भी शामिल है, जो मुंबई और पुणे को जोड़ता है. गौरतलब है कि कई सालों से अटकी हुई यह परियोजना उनके कार्यकाल के दौरान ही गति पकड़ पाई और दो साल के समय में पूरी की गयी. इससे मुंबई से पुणे तक की सड़क यात्रा के समय और दूरी में काफी कटौती हुई है.

इसी परियोजना के कार्यान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में भूमिका निभायी. इस परियोजना ने उनकी मानव संसाधन विकास और अन्य संसाधनों के बेहतरीन प्रबंधन क्षमता को भी उजागर किया. उनके इसी गुण पर विश्वास जताते हुए राज्य सरकार ने चार  सालों में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाने के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा. इस परियोजना को सफलता से अंजाम देने के कारण ही आज महाराष्ट्र का 98%इलाका सड़कों के जरिये जुड़ा हुआ है. इसके अलावा उनके कार्यकाल के दौरान मुंबई महानगर में 55 फ्लाईओवरों का निर्माण भी हुआ, जिससे वहां की ट्रैफिक समस्या काफी हद तक सुचारु हुई.

उनकी कार्यकुशलता और प्रबंधन क्षमता से प्रभावित होकर केंद्र सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर देश भर को सड़कों से जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्घाटन किया गया. 600 अरब रुपये की कुल लागत वाली इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत देशभर के गांवों को सड़कों के जाल से जोड़े जाने का अभियान इस समय  जोर-शोर से चल रहा है.

राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास समिति के अध्यक्ष होने के पहले गडकरी महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं. नितिन गडकरी इस समय भारत सरकार की सीपीडब्ल्यूडी आकलन समिति के अध्यक्ष भी हैं. वे महाराष्ट्र सरकार की खनन नीति इंप्लीमेंटेशन समिति के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं.

महाराष्ट्र में एक सशक्त नेता साबित होने के बाद देश के राजनीतिक परिदृश्य पर उन्होंने 2014 में पहली बार संसद का चुनाव लड़ा और नागपुर सीट पर बड़े अंतर से जीत हासिल करके 16 वीं लोकसभा के सदस्य चुने गये. केंद्र में भाजपा की सरकार के गठन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया और कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया. हालांकि वे पहली बार केंद्र सरकार में शामिल हुए, लेकिन उन्हें सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में से एक और केंद्र सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना वाले सड़क परिवहन विभाग का कार्यभार सौंपा गया.

नितिन गडकरी एक काबिल राजनीतिज्ञ व प्रशासक ही नहीं बल्कि एक सफल किसान और उद्योगपति भी हैं. वे औद्योगिक क्षेत्र में कई कंपनियों से जुड़े हुए हैं. वे पूर्ति पावर एंड शुगर लिमिटेड के अलावा पॉली सैक  इंडस्ट्रियल सोसाइटी लिमिटेड के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं और  पूर्ति ग्रुप ऑफ कंपनीज़  के अध्यक्ष भी. इसके अलावा वे निखिल फर्नीचर प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर और निदेशक भी हैं. वे  एंप्रेस इंप्लॉइज कॉपरेटिव पेपर मिल्स लिमिटेड के संस्थापक और अध्यक्ष होने के अलावा अंत्योदय ट्रस्ट से संस्थापक और सदस्य के नाते जुड़े हुए हैं.

किसानों की समस्याओं और खेती के प्रति अपने नजरिये में नयी सोच और विचारों का समावेश करने के कारण ही आज नितिन गडकरी एक सामाजिक उद्यमी के तौर पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहे हैं. उनकी सफलता का एक बहुत बड़ा श्रेय विभिन्न क्षेत्रों में उनकी रुचि और लगाव को भी जाता है. जमीन से जुड़े हुए नेता के तौर पर अपनी छवि बनाने में वे इसलिए भी कामयाब हुए हैं क्योंकि एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार से आने के कारण आम आदमी और किसानों के जीवन में आने वाली समस्याओं से नितिन गडकरी भली-भांति परिचित हैं.

कृषि क्षेत्र में नये औजारों और तकनीक का इस्तेमाल तथा बेहतर जल प्रबंधन जैसी बातों पर ख़ास ध्यान केंद्रित करके उन्होंने विदर्भ जैसे पिछड़े क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिये 1995 में उन्होंने पूर्ति शुगर मिल की स्थापना की और गन्ने की फसल से मिलने वाले सभी उत्पादों का इस्तेमाल किया.

इससे किसानों को उनकी पैदावार का वाजिब दाम मुहैया कराने के अलावा इथेनॉल से बिजली और पैदा हो रहे कचरे से बायो खाद बनाने का काम किया गया. पूर्ति ग्रुप ऑफ़ कंपनीज अब कई सामाजिक और जन कल्याण परियोजनाओं में तो अपना योगदान दे ही रही है, इसके अलावा इस समूह द्वारा सुपर बाजार और कॉपरेटिव जनरल स्टोर भी चलाये जा रहे हैं.

इस समय नितिन गडकरी एक बायोडीजल पंप, चीनी मिल, इथेनॉल ब्लेंडिंग संयंत्र,एक बिजली संयंत्र और एक सोयाबीन संयंत्र का सफलतापूर्वक प्रबंधन कर रहे हैं. ये सभी उद्योग ना केवल आसपास के इलाकों और दूरदराज के गांवों के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में सफल रहे हैं बल्कि आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े हुए क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर सुधारने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.  इन इलाकों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बड़े पैमाने हो रहा है और सौर ऊर्जा से चालित रिक्शों के अलावा 100 से अधिक गांवों को सौर ऊर्जा उपलब्ध करवा कर गाँवों तथा वहां के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक नितिन गडकरी भाजपा की नयी छवि का चेहरा बनकर उभरे हैं. उनका मानना है कि वक्त के साथ सब कुछ बदलता है लेकिन भाजपा यानी कि मूल संगठन का लक्ष्य और उसकी आकांक्षाएं अब भी वही हैं क्योंकि व्यक्ति से बड़ी होती है पार्टी और पार्टी से बड़ी होती है उसकी विचारधारा. उन्हें इस बात का पूरा श्रेय दिया जा सकता है कि वे भाजपा की नीतियों के कर्णधार भी रहे हैं और संकटमोचक भी.

विभिन्न मंत्रालयों में अपनी उपलब्धियों के बल पर उन्हें भाजपा के आधार स्तंभ नेताओं में शुमार किया जा सकता है. व्यक्तिगत तौर पर भी बात की जाये तो खासतौर से इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उनकी भूमिका और योगदान अपने पूर्ववर्ती मंत्रियों के मुकाबले काफी सराहनीय रहा और भविष्य में इस पद पर काबिज होने वाले मंत्रियों के लिए एक मिसाल का काम करेगा.

” मंत्री नंबर-1 वर्ष 2018″ में फेम इंडिया ने एशिया पोस्ट के साथ मिलकर मंत्रियों की छवि, उनका प्रभाव, विभाग की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता और परिणाम जैसे कुल 10 बिंदुओं पर केंद्र सरकार के मंत्रियों का आकलन किया और उनमें उपरोक्त आकलन में नितिन गडकरी  “प्रभावशाली” कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं.