नया सीखने की ललक ने बनाया खास चेहरा

बचपन से ही घर में सियासत के दावपेंच देखकर बड़े हुए तेजस्वी यादव के लिए सार्वजनिक जीवन कोई नई बात नहीं है। कहने की जरूरत नहीं कि उनके मां-बाप यानी लालू प्रसाद और राबड़ी देवी दोनों ही बिहार के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं। राजनीति में कदम रखने से मध्यम क्रम के क्रिकेट खिलाड़ी रह चुके तेजस्वी वर्ष 2008 में टी 20 क्रिकेट मैच के दिल्ली डेयर डेविल्स टीम में शामिल कर लिए गए। मगर क्रिकेट में उनका मन नहीं लगा और पारिवारिक राजनीति की ओर बढ़ चले।

वर्ष 2004 आते आते तेजस्वी राजनीति में सक्रिय तौर पर नजर आने लगे। फिर करीब एक साल बाद चुनावी राजनीति में दस्तक दे दी और राधोपुर असेंबली सीट से चुनाव मैदान में कूद पड़े। इस तरह से जीत दर्ज कर वे पहली बार बतौर विधायक बिहार विधानसभा में दाखिल हुए। इस चुनाव में मतदाताओं के साथ परिवार व्यक्तिगत रिश्ते ने तेजस्वी यादव की मंजिल आसान कर दी। लिहाजा कुछ लोग इस जीत के पीछे तेजस्वी की पारिवारिक पृष्ठभूमि की भूमिका को अहम मानते हैं तो साथ उनके हंसमुख प्रभावशाली व्यक्तित्व को। दरअसल लालू प्रसाद और राबड़ी देवी दोनों ही राघोपुर से विधानसभा से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसे में वोटरों ने तेजस्वी को अगली पीढ़ी का नेता मानकर अपना भरपूर प्यार दिया।

चुनाव के बाद नवंबर 2015 में महागठबंधन की सियासत रंग लाई। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी नई सरकार ने तेजस्वी चुनाव के बाद नवंबर 2015 में महागठबंदन की सियासत रंग लाई। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी नई सरकार ने तेजस्वी यादव की प्रतिभा को पूरा महत्व देते हुए बतौर चेहरा उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की अहम जिम्मेदारी दी। साथ ही सरकार को गति देने के लिहाज से इन्हें पथ एवं भवन निर्माण मंत्रालयों का अहम दायित्व भी सौंपा गया। इस दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और उन्हें बहुत कुछ सीखने और समझने का मौका मिला। बीस महीने तक उपमुख्यमंत्री के रूप में सरकार चलाने का अनुभव हासिल करने के बाद तेजस्वी इन दिनों नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रहे हैं। यही वजह है जो तेजस्वी यादव पक्ष- विपक्ष दोनों ही ओर के नेताओं के पसंदीदा माने जाते हैं और अपने पारिवारिक चेहरे से अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं।