युवा जोश से भरपूर हैं फायरब्रांड मुरलीधर राव

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पी मुरलीधर राव का व्यक्तित्व फायरब्रांड जोश से लबरेज है और उन्हें साफ-साफ दो टूक बात करने वाला राजनीतिज्ञ माना जाता है. तेलंगाना के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले राव की छवि एक कट्टर हिन्दुवादी नेता की है.
बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े मुरलीधर राव ने तेलंगाना जैसे कांग्रेसी और वामपंथी प्रभुत्त्व वाले राज्य में अपने विचारों पर कायम रहने के लिये कड़ा संघर्ष किया है. उनपर जानलेवा हमले हुए और कई बार उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश भी की गयी, लेकिन वे अडिग रहे. भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनने से पहले वे स्वदेशी जागरण मंच के संगठन मंत्री जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर थे. उन्होंने भाजपा के स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी में लंबा समय बिताया है. एबीवीपी के उम्मीदवार के तौर पर वे ओस्मानिया युनिर्सिटी के महासचिव चुने गये. वहां उन पर नक्सलियों ने नजदीक से गोली चलायी, लेकिन सौभाग्य से वे बच गये. बाद में एबीवीपी ने उन्हें राजस्थान भेजा तो वहां उन्होंने काफी बढ़िया प्रदर्शन किया. 1991 में उन्हें एबीवीपी ने जम्मू-कश्मीर भेजा जहां आतंकवाद चरम पर था, लेकिन निर्भीक राव डरे नहीं. उन्होंने वहां कई रैलियां निकालीं और आतंकवादियों के खिलाफ माहोल तैयार किया.
जब आरएसएस के वरिष्ठ नेतओं दत्तोपंत ठेंगड़ी, मदनदास और एस गुरुमूर्ति ने स्वदेशी जागरण मंच का गठन किया तो राव ने उसमें बतौर युवा शक्ति खासा योगदान दिया. वे इसके संगठन मंत्री भी बने. भाजपा में वे राजनाथ सिंह के सहायक के तौर पर आये और फिर राष्ट्रीय सचिव तथा उसके बाद राष्ट्रीय महासचिव बनाये गये. 2014 के चुनावों में राव की खासी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही.
पी मुरलीधर राव को आधुनिक सोच का रणनीतिकार माना जाता है. हाल ही में हुए कर्णाटक चुनाव में उन्होंने 222 कॉल सेंटर्स बनवा कर एक-एक वोटर से संपर्क साधा औऱ भाजपा के विचारों से अवगत कराया. उन्होंने कई प्रयोगों को जमीन पर उतारा जिनमें विधानसभा प्रभारी, बूथ लेवल कमेटियां, वाट्सएप्प ग्रुप, हर पांच बूथ पर एक शक्ति केंद्र, हर बूथ पर दस कार्यकर्ता, पुराने कार्यकर्ता, स्थानीय प्रभावशाली लोगों की कमेटी आदि प्रमुख थे. इसका नतीजा ये हुआ कि भाजपा कर्णाटक में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी.