बाबा साहब के सपने को मोदी सरकार ने सही अर्थों में पूरा किया: डॉ. किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेत्तृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने समाज के सभी वर्गों विकास के लिये अभूतपूर्व कार्य किया है। यहां मैं खासकर अनुसूचित जाति-जनजाति के विकास के लिये हुए कार्यों का जिक्र करना चाहूंगा। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मोदी सरकार ने जाति-जनजाति के लोगों को समाज में सम्मान और बराबरी का दर्जा दिलाने के लिये जितने कार्य किये हैं उतने कार्य अब तक देश में किसी सरकार ने नहीं किये हैं।

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डॉ किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी

सबसे पहले बात कानून की। दलित उत्पीड़न कानून जिसे प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज ऐक्ट भी कहते हैं देश में सर्वप्रथम विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में वर्ष 1989 में अस्तित्व में आया। इससे पहले किसी भी उत्पीड़न को सामान्य कानून के दायरे में ही रख कर कार्रवाई होती थी। हालांकि इस कानून में 22 विभिन्न प्रकार के उत्पीड़नों को निर्धारित किया गया और उनके लिये सजा का प्रावधान किया गया था, लेकिन ये एक तरह से केवल बरगलाने वाला कानून था। एक तो इसमें बहुत कम अपराधों का जिक्र था औऱ न तो इसकी धाराएं स्पष्ट थीं, न उन्हें साबित करने का अवसर था क्योंकि उनकी सुनवाई सामान्य अदालतों में ही होती थी। नरेन्द्र मोदी जी ने अपनी सरकार में आते ही इस कमी पर विशेष ध्यान दिया और वर्ष 2015 में एक विशेष संशोधन के जरिये इस कानून में प्रभावी बदलाव किया। संशोधन में संज्ञेय अपराधों की संख्या 47 कर दी गयी और इन अपराधों की सुनवाई के लिये विशेष अदालतें भी गठित करने का प्रावधान रखा गया। यह एक तरह से एक कमजोर कानून को प्रभावी बनाने और उसे पर्याप्त शक्ति प्रदान करने का ऐतिहासिक कदम है जिसके बारे में पूर्ववर्ती सरकारों ने ध्यान भी नहीं दिया।

नौकरियों व प्रमोशन में आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में भी नरेंद्र मोदी जी की सरकार में विशेष प्रयास किये गये। वर्ष 2006 में नागराज बनाम भारत सरकार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोमोशन में एससी/एसटी के लिए आरक्षण पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक रोजगार में इस वर्ग के पिछड़ेपन और पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने की बात को सिद्ध करने के लिए उपयुक्त आंकड़े जुटाने होंगे। यह मामला एक अरसे से लंबित था। नरेंद्र मोदी सरकार ने अटॉर्नी जनरल के जरिये अदालत में अपना पक्ष रखते हुए अदालत से अनुरोध किया कि फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण को जारी रखा जाये जिसे मान लिया गया।

संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर दलितों के सम्मान के प्रतीक माने जाते हैं और उनके नाम का इस्तेमाल कई पार्टियां अपने राजनीतिक लाभ के लिये करती रही हैं, लेकिन सही अर्थों में भारतीय जनता पार्टी ने ही उनके प्रतीकों का संरक्षण कर उनका गौरव बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे भाजपा का सौभाग्य मानते हैं कि लगातार प्रयासों के बाद बाबा साहब से जुड़े तीर्थ स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने में सफलता मिल रही है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कई अवसरों पर यहां जाने का अवसर प्राप्त हुआ है। चाहे अंबेडकर की जन्मस्थली महू जाने का अवसर हो या महाराष्ट्र में इन्दू मिल की जमीन खरीद कर चैतन्य भूमि पर स्मारक के विकास करने की पहल; नागपुर में दीक्षास्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की बात हो या दिल्ली में बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण स्थल और 15 जनपथ पर 250 करोड़ की लागत से स्मारक बनाने की कोशिश – सरकार जी-जान से पंचतीर्थों के विकास में जुटी हुई है।

मोदी जी के सरकार संभालने के बाद पहली बार डॉ. भीम राव अंबेडकर पर संसद में चर्चा हुई। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ही यह निर्णय लिया कि बाबा साहेब ने जिस दिन संविधान प्रस्तुत किया था उस दिन यानी 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाये। उन्होंने उज्जवला योजना में अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। जन-धन योजना में तो इस वर्ग के लोगों की 35-40 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया जबकि मुद्रा व स्टार्टअप और स्टैंडअप योजनाओं में बैंको को निर्देश जारी किये गये कि हर शाखा को कम से कम एक अनुसूचित जाति-जन जाति के व्यक्ति को जरूर शामिल करना है।

अगर सही अर्थों मे देखा जाये तो बाबा साहेब के सपनों, यथा हर घर तक 24 घंटे बिजली पहुंचाने, सड़कें, नहरों व सिंचाई की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ही नेतृत्त्व में पूरा हुआ है जिन्हें पिछली सरकारों ने आजादी के 70 वर्षों बाद तक पूरा नहीं किया था।

( लेखक – एससी एसटी संसदीय कमिटि के चेयरमैन और अहमदाबाद दक्षिण के लोकसभा सांसद हैं. )