पर्यावरण सुरक्षा को लेकर गंभीर दिखती मोदी सरकार: अभय के. ओझा

वर्तमान की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की तुलना में पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दों पर काफी अच्छा काम करती दिख रही है।

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अभय के. ओझा

इन्होंने विभिन्न परियोजनाओं को पर्यावरण क्लीयरेंस को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाये हैं, जो एक अच्छी पहल है | इस मामले को लेकर सरकार सजग दिखती है और इसने प्रदूषण के मानक को लेकर काफी प्रयास भी किया है। विशेष तौर पर औद्योगिक प्रदूषण के मानकीकरण व निगरानी पहले से बेहतर हुई है। सरकार तकनीक आधारित निगरानी व बचाव पर जोर दे रही है। वर्तमान में केंद्र सरकार ने शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ गंभीर प्रयास किये हैं। परन्तु व्यापक योजना को तैयार कर काम करना अभी बाकी है।

उज्जवला योजना के तहत गांव-गांव तक कुकिंग गैस के तौर पर एलपीजी की पहुंच बढ़ाने की कोशिश सरकार का एक अच्छा प्रयास है। इससे खाना पकाने के लिए लकड़ी जलाने से होने वाले प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे आम लोगों के, खासकर महिलाओं के स्वास्थ्य पर अच्छा असर भी पड़ेगा।

जलापूर्ति, सीवेज, शहरी परिवहन, पार्क समेत आधारभूत नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने व इन्हें बेहतर बनाने के लिये अटल मिशन फॉर रीजुविनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन यानि अमृत नामक कार्यक्रम की शुरूआत भी एक अच्छी पहल है । आगामी पांच वर्षों के दौरान इस कार्यक्रम पर 50,000 करोड़ रुपये की राशि खर्च किया जाना प्रस्तावित है। इस अभियान में घरेलू शौचालय, सामुदायिक शौचालय और सार्वजनिक शौचालय बनाने और ठोस कचरा प्रबंधन समेत अन्य कई उपायों के साथ शहरी इलाकों को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य तय करना सही प्रयास है ।

ऐतिहासिक महत्व के शहरों यानी हेरिटेज सीटिज को संरक्षित करने और पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑग्मेंटेशन नामक एक योजना की शुरूआत इनकी सकारात्मक कार्य मंशा को दर्शाता है | ऊर्जा क्षेत्र मे सोलर एनर्जी को बढावा देना मोदी सरकार का एक बेहद उम्दा कदम माना जाएगा | इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने से उनके घरों में भी बिजली पहुंच जायेगी जहां आज नहीं है।

हालांकि ग्रीन क्लीयरेंस, वनारोपण तथा सरकार की खुद शुरु की गयी स्वच्छता एवं गंगा सफाई अभियान पर बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। स्वच्छ भारत योजना के तहत घरों में शौचालय बनाने की योजना को प्रभावी बनाया जाना है। इसी तरह नमामि गंगे के तहत गंगा का पुनरुद्धार को लेकर जमीनी एक्शन न के बराबर है। इस काम के लिए यद्यपि सरकार ने भारी धनराशि बजट में आवंटित की है लेकिन उसे खर्च करने की योजनाओं पर काम होना बाकी है। मोदी सरकार पशुओं पर क्रूरता को रोकने के लिये भी गंभीर दिखती है और इसने वर्ष 2017 में इससे संबंधित ऐक्ट भी लागू किया था। हालांकि बाद में इसे कुछ तकनीकी कमियों की वजह से वापस लेना पड़ा, लेकिन उम्मीद है सरकार को इसे दोबारा नयी तैयारी के साथ लाना चाहिये । अभय के. ओझा

( लेखक – न्यूज नेशन चैनल के प्रेसिडेंट – सेल्स एंड मार्केटिंग है )