समस्याओं के स्थायी समाधान वाले प्रतिभाशाली नेता हैं विश्वजीत राणे

* राज्य की राजनीति में प्रभाव रखने वाले प्रतिभाशाली व्यक्ति
* प्रदेश में कौशल विकास योजना को ले कर बेहद संजीदा राजनेता
* गोवा में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ाने की योजना पर कार्यरत

गोवा जैसे महत्वपूर्ण राज्य में एक व्यक्ति जिसने न सिर्फ सरकार बनवायी बल्कि गोवा में बीजेपी के किले को मजबूत और अभेद्य कर दिया है, वो हैं विश्वजीत राणे. विश्वजीत राणे का नाम गोवा के उन चुनिंदा नेताओं में शुमार है जिनका गोवा की राजनीति में वर्चस्व है. फिलहाल राणे के पास गोवा की जनता के स्वास्थ्य को सुधारने और बेहतर बनाने की महत्त्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है. इसके अलावा उन्हें महिला एवं बाल कल्याण, कौशल विकास और इंडस्ट्रीज ट्रेड एंड कॉमर्स का भी कार्यभार सौंपा गया है.

विश्वजीत राणे को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता प्रताप सिंह रावजी राणे गोवा कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं और चार बार गोवा के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. 23 मार्च 1971 को मुंबई में जन्मे विश्वजीत राणे राजनीतिक माहौल के बीच ही पले-बढ़े. उन्होंने पणजी के पीपुल्स हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और गोवा विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ कॉमर्स डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की. साथ ही मणिपाल की टीए पाई मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से मैनेजमेंट स्टडीज़ में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. विश्वजीत गोवा पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन थे और गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री भी रहे

विश्वजीत ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस के साथ ही की थी लेकिन वर्ष 2007 में जब कांग्रेस ने तय किया कि एक ही परिवार से दो लोगों को टिकट नहीं दिया जायेगा तो विश्वजीत ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वालपोई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. उन्होंने कांग्रेस के पद एवं प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया . विश्वजीत निर्दलीय भी जीत गए. उन्हें कांग्रेस में शामिल करके स्वास्थ्य एवं कृषि मंत्री बनाया गया. 2012 के विधानसभा चुनाव में विश्वजीत खुद तो चुनाव जीत गये परंतु उनके जितने भी प्रत्याशी थे उनमें से ज्यादातर हार गये और गोवा में कांग्रेस की सरकार गिर गयी. 2016 में उन्होंने सत्तरी युवा मोर्चा बनाया और सत्तरी युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. 2017 के विधानसभा चुनाव में विश्वजीत राणे ने एक बार फिर पूरी ताकत से प्रदर्शन किया और इस बार गोवा में सबसे ज्यादा विधायक कांग्रेस के जीतकर आये परंतु यह संख्या भी सरकार बनाने के लिये नाकाफ़ी थी. भारी मशक्कतों के बाद भी कांग्रेस सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं जुटा पायी.

विश्वजीत राणे प्रदेश के पार्टी आलाकमान से रुष्ट the और इस्तीफ़ा देकर बीजेपी में आ गये. राणे के बीजेपी का हाथ थामते ही कांग्रेस की स्थिति चुनौती से परे हो गयी. राणे के साथ 2-3 और कांग्रेस विधायक बीजेपी में आ गये और बीजेपी की राज्य में स्थिति मज़बूत हो गयी. 12 अप्रैल 2017 को विश्वजीत राणे ने मनोहर पर्रिकर की अगुवाई वाली कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. इसके साथ फिर से वालपोई से विधानसभा उपचुनाव लड़कर विधानसभा की सदस्यता भी प्राप्त की.

गोवा सरकार के मंत्रिमंडल में विश्वजीत राणे की छवि एक अनुभवी और प्रभावशाली मंत्री की है. स्वास्थ्य मंत्री के रूप में विश्वजीत राणे स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी लाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं. गोवा के अस्पतालों में जो दूसरे राज्यों से मरीज़ इलाज करवाने आते हैं, उनसे ली जाने वाली फीस को कम कर दिया है. साथ ही राणे शादी से पहले एचआईवी टेस्ट करवाने को अनिवार्य करने का नियम लाने पर विचार कर रहे हैं. इसके अलावा स्थानीय युवकों को बेहतर रोजगार दिलाने की दिशा में कई कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना करवायी है. साथ ही स्किल इंडिया के प्रमाणित लोगों को नौकरी में प्राथमिकता देने पर भी विचार बना रहे हैं.

फेम इंडिया मैगजीन- एशिया पोस्ट के “सर्वश्रेष्ठ मंत्री 2019 सर्वे” में गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ‘प्रतिभाशाली’ कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ मंत्री के तौर पर चुने गये हैं.