युवा और विकासशील जननायक हैं डॉ. सी विजय भास्कर

* प्रदेश में स्वास्थय संबंधित योजनाओं के लिये विकासशील मंत्री
* राज्य मे चिकित्सा संबंधी शिक्षा में अद्भुत सुधार का श्रेय
* युवाओं में लोकप्रिय और मंत्रालय की बेहतर समझ

देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं के कई क्षेत्रों में नंबर वन बनने वाले राज्य तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर सी विजय भास्कर कई दृष्टिकोणो से बेहद सफल और सार्थक राजनेता हैं. ये युवा जोश और कर्मठता से भरपूर हैं और प्रदेश की राजनीति में एक अरसे से प्रभावी और सक्रिय हैं. ये एक अरसे से विधानसभा के सदस्य चुने जाते रहे हैं और इन्हें प्रशासन, खासकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व स्वास्थ्य शिक्षा जैसे विभागों की गहरी समझ है.

8 अप्रैल 1974 को त्रिची के समीप पुदुकोट्टई जिले के इलुपुर तालुके में एक संभ्रांत परिवार में जन्मे सी विजय भास्कर की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई. वे बचपन से ही पढ़ाई में खासे मेधावी छात्र थे. पालाखुरिची के सेंट जेम्स हाई स्कूल से दसवीं करने के बाद इन्होंने बिशप हेबर हाई स्कूल त्रिची से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की. फिर इनका दाखिला अन्नामलाई के मुथइया मेडिकल कॉलेज में हो गया. वे छात्र जीवन में ही राजनीति के करीब आये और ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कज़गम यानी एआईएडीएमके प्रमुख जे जयललिता की विचारधारा से खासे प्रभावित थे.

वर्ष 2000 में डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद तक डॉ. सी विजय भास्कर ने एआईएडीएमके पार्टी के छात्र विंग में अच्छी जगह बना ली थी और वर्ष 2001 के प्रदेश चुनाव में इसी पार्टी के टिकट पर पुदुकोट्टई से विधायक चुने गये. हालांकि अगले चुनाव में इनकी पार्टी के साथ ही इनका भी प्रदर्शन बढ़िया नहीं रहा, लेकिन वर्ष 2011 के चुनाव में इन्होंने दोबारा जोरदार जीत हासिल की. तब तक परिसीमन के बाद इनके विधानसभा क्षेत्र का नाम विरालिमलाई हो चुका था. वर्ष 2016 के अगले चुनावों में भी इन्हें यहीं से विधायक बनने का मौका मिला और इन्हें कैबिनेट में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व स्वास्थ्य शिक्षा विभाग का जिम्मा सौंपा गया.

बतौर स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भास्कर ने प्रदेश में कई उम्दा प्रयोग किये जो काफी लोकप्रिय भी हुए. इनके कार्यकाल में सरकारी अस्पतालों की स्थिति में काफी गुणात्मक रूप से सुधार आया है. इन्होंने इन अस्पतालों में दवाओं के एटीएम लगवाये जिनमें मरीजों को उनके पर्चे के अनुसार मुफ्त दवाएं मिलती हैं. शुरुआत में प्रदेश भर में32 एटीएम सभी मेडिकल कॉलेजों और अन्य सरकारी अस्पतालों में लगाये गये हैं.

डॉ. सी विजय भास्कर ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि दर को आश्चर्यजनक रूप से कम किया है. जहां पूरे देश में यह वृद्धि दर छह प्रतिशत के आस-पास है वहीं तमिलनाडु में एक प्रतिशत से भी कम (0.83) है. इन्होंने उच्च जन्मदर वाले जिलों की पहचान कर वहां जागरुकता अभियान चलवाया और दो या अधिक बच्चों वाली करीब 80 प्रतिशत स्त्रियों का बंध्याकरण ऑपरेशन करवाने में सफलता हासिल की. इसके अलावे प्रदेश में टीकाकरण की दर भी 99 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से कहीं आगे है. देश भर में फैली कई गंभीर बीमारियों और महामारियों को तमिलनाडु में पांव जमाने का मौका तक नहीं मिला. बर्ड फ्लू, निपाह आदि कई खतरनाक बीमारियों के असर से इनका प्रदेश अछूता रहा. बतौर स्वास्थ्य मंत्री इनके कार्यकाल में तमिलनाडु की सुधरती सेवाओं की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी खूब सराहना की है.

स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री के तौर पर भी डॉ. सी विजय भास्कर के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आयी है और वहां पढ़ाई की स्थिति में भी काफी सुधार हुआ है. वर्ष 2019 से तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले के लिये होने वाली काउंसेलिंग भी ऑनलाइन हो गयी है जिससे पक्षपात या भ्रष्टाचार की गुंजाइश शूनय हो गयी है.

फेम इंडिया मैगजीन- एशिया पोस्ट के “सर्वश्रेष्ठ मंत्री 2019 सर्वे” में तमिलनाडु के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सी विजय भास्कर ‘विकासशील’ कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ मंत्री के तौर पर चुने गये हैं.