जन -जन के प्रिय और योग्य राजनेता ताम्रध्वज साहू

* अपने राज्य को महतारी कहने वाले सरल, सहज व सुलभ व्यक्ति
* राज्य में जनमत पर मजबूत पकड़ वाले योग्य राजनेता
* राज्य में कानून और सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू प्रदेश की राजनीति में ऐसे दिग्गज हैं जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सरकार की छवि को बनाये रखने का हुनर जानते हैं. प्रदेश में नक्सली समस्या हो या कानून और व्यवस्था की परेशानी, इन्होंने कम समय में ही हर मोर्चे पर सफलता के झंडे गाड़े हैं. ये बेहद सहज, सरल और मिलनसारस्वभाव के हैं और समाज के हर वर्ग पर मजबूत पकड़ रखते हैं. 2014 के आम चुनाव में जब पूरे देश और प्रदेश मेंमोदी लहर की आंधी थी, ताम्रध्वज साहू एक विशालकाय बरगद की तरह अपनी जड़ों से जमे रहे. वे 16 वीं लोकसभा में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के इकलौते सांसद चुने गये थे.

6 अगस्त 1949 को छत्तीसगढ़ के पटोरा जिले में एक साहू किसान परिवार में मोहन लाल साहू और जियान बाई साहू के घर ताम्रध्वज का जन्म हुआ. अपने छात्र जीवन में ये दुर्ग के पूर्व नेता चंदूलाल चंद्राकर से खासे प्रभावितरहते थे और उन्हीं के सान्निध्य में राजनीति में उतरे. इन्होंने अपनी सियासी पारी की शुरुआत वर्ष 1998 में तत्कालीन मध्यप्रदेश विधानसभा से की थी. छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद ये वर्ष 2000-2003 तक छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री रहे. 2003 और 2008 के चुनावों में जीतकर ये भाजपा लहर के बावजूद छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य बने और रमन सिंह के शासनकाल में विपक्ष के एक मजबूत स्तंभ बने रहे. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की ज़बरदस्त लहर की वजह से कांग्रेस के सारे उम्मीदवार धाराशायी हो गये, लेकिन ताम्रध्वज अपनी पार्टी की झोली में दुर्ग लोकसभा सीट डालने में कामयाब रहे.

विवादों से दूर रहने वाले ताम्रध्वज साहू पर पार्टी नेतृत्त्व को पूरा भरोसा है. यही कारण है कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले इन्हें कांग्रेस की ओबीसी यूनिट का अध्यक्ष बनाया और केंद्रीय कार्य समिति में भी जगह दी गयी.

छत्तीसगढ़ में साहू समाज के लोगों की संख्या लगभग 16 फीसदी है और वे यहां की राजनीति को प्रभावित करते हैं. इस जातीय समीकरण के कारण भारतीय जनता पार्टी ने इस समाज के प्रभाव को देखते हुए साहू समाज के 14 उम्मीदवारों को टिकट दिया था, लेकिन कांग्रेस के ताम्रध्वज साहू तुरुप का इक्का साबित हुए. साहू समाज ने इनका भरपूर साथ दिया और बीजेपी के 14 में 13 साहू उम्मीदवार चुनाव हार गये. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आयी और ताम्रध्वज साहू को सबसे महत्पूर्ण विभाग गृह मंत्रालय की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी.

बतौर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू प्रदेश की जनता के लिए पूर्ण रूप से समर्पित हैं. ये जनता एवं जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर जनमानस की आवश्यकताओं व परेशानियों का ख़ुद जायज़ा लेते हैं और समस्याओं के निराकरण की पूरी कोशिश करते हैं. खुद किसान होने के नाते वे किसानों की समस्याओं को भली-भाँती समझते हैं और किसानों के हक़ में कई योजनायें ला रहे हैं. साथ ही युवाओं को रोजगार दिलाने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाये हैं. मंत्री बनने के बाद भी वे अपने क्षेत्र की जनता से कटे नहीं हैं. दुर्ग में उनकी जनसंपर्क यात्रा लगातार जारी है.

ताम्रध्वज साहू भले ही शांत स्वभाव के हों, बात जब छत्तीगढ़ के विकास की हो तो उनके तेवर सख्त नज़र आते हैं.इन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस के आला अधिकारियों के साथ नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने , नक्सल उन्मूलन और नक्सली इलाकों में विकास कार्यों के लिए बैठक की . छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता को बचाने और बनाये रखने के लिए भी वे पूरे प्रयास कर रहे हैं. अपनी दूरदर्शी सोच से वे छत्तीसगढ़ को नया आयाम देने की तैयारी में हैं. अपने प्रदेश को वे ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ (मां) कहकर संबोधित करते हैं और एक बेटे की तरह ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं. कुल मिलाकर ताम्रध्वज साहू “गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” (गढ़ेंगे नया छत्तीसगढ़) के नारे को पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ते दिखायी दे रहे हैं.

फेम इंडिया मैगजीन- एशिया पोस्ट के “सर्वश्रेष्ठ मंत्री 2019 सर्वे” में छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ‘योग्य ’ कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ मंत्री के तौर पर चुने गये हैं.