मुश्किलों को आसानी से सुलझाने के अनुभवी सुधीर मुनगंटीवार

* उच्च शिक्षा प्राप्त दूरदर्शी योजनाकार
* राज्य के किसानों की कर्ज़ माफी के लिए शेतकरी सम्मान योजना जैसे बड़े कदम
* राज्य में नीति और विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ मिल कर वार रूम की स्थापना

महाराष्ट्र के वित्त, योजना एवं वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार का परिचय है कि वे कैबिनेट के सबसे कार्यकुशल व प्रभावी सदस्य हैं. वे एक ऐसे करिश्माई राजनेता हैं जो हर उम्र वर्ग, जाति-धर्म के लोगों में समान रूप से लोकप्रिय हैं. उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त कुशल प्रशासक और दूरदर्शी योजनाकार माना जाता है. वे इससे पहले भी भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में 1995 से 1999 तक महाराष्ट्र के पर्यटन व उपभोक्ता सुरक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुके हैं.

30 जुलाई 1962 को महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के चंद्रपुर जिले में सुधीर मुनगंटीवार मात्र 17 साल की उम्र में चंद्रपुर के सरदार पटेल महाविद्यालय में छात्र संघ के सचिव बन गये थे और तब से वे लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं. उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से एम.फिल की पढ़ाई पूरी की और 1993 में महाराष्ट्र में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष बने. इसके बाद वे चंदरपुर सीट से तीन बार विधायक चुने गये। 1998 में विधानसभा में उनके अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें सबसे उम्दा वक्ता का सम्मान भी मिला. विकलांगों के हित में भी सुधीर ने कई सराहनीय कार्य किये हैं, जिसके लिये उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है.

समय के साथ-साथ पार्टी में मुनगंटीवार का कद बढ़ता रहा. 1996 में वे भाजपा की महाराष्ट्र राज्य इकाई के महासचिव और 2001 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये गये. 2010 में मुनगंटीवार को सर्वसम्मति से महाराष्ट्र में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया. उन्होंने वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी का स्थान लिया, जो तब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे. 2014 में, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद, मुनगंटीवार देवेंद्र फड़नवीस मंत्रालय में वित्त और योजना और वन मंत्री बने।

बतौर बित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने महाराष्ट्र में ‘शेतकरी सम्मान योजना’ चलाने में एक अहम भूमिका निभायी. इस योजना के तहत महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लगभग 34,000 करोड़ रुपये के ऋणों को माफ करने का निर्णय लिया. अपने 2015 के बजट भाषण में, इन्होंने एक ‘एविडेंस बेस्ड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ को लागू करने की घोषणा की, जिससे महाराष्ट्र ऐसा सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया. इन्होंने सरकारी कर्मचारियों का बीमा कवरेज बढ़ाने और महिला सरकारी कर्मचारियों को 180 दिनों की पेड मैटरनिटी लीव देने जैसे लैंडमार्क फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

वन मंत्री के रूप में, सुधीर मुनगंटीवार ने एक राज्यव्यापी वृक्षारोपण अभियान शुरू किया जिसका उद्देश्य 2019 तक 50 करोड़ पौधे लगाना था. इसके तहत एक ही दिन, 1 जुलाई 2016 को 2.81 करोड़ पौधे लगाए गये, जिससे इस अभियान ने ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में जगह बनायी.

राज्य में नीति और विकास परियोजनाओं को ट्रैक करने के लिये सुधीर मुनगंटीवार ने संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर एक ‘वॉर रूम’ स्थापित करने में मदद की. इन्होंने सरकारी खरीद, स्कूलों-कॉलेजों की फीस और छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से कई समितियों का गठन किया. 2017 में, उनके नेतृत्व में, मन्त्रालय में वित्त और वन विभागों के कार्यालयों को मानकीकरण (आईएसओ) प्रमाणन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन – आईएसओ 9001: 2015 से सम्मानित किया गया.

सुधीर मुनगंटीवार कई सामाजिक पहलों और सकारात्मक आंदोलनों में शामिल रहे हैं. नागपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय’ और अमरावती विश्वविद्यालय का नाम ‘संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय’ रखने में इनका बड़ा योगदान रहा है. बल्लारपुर शहर को एक स्वतंत्र तहसील में शामिल कराने में भी वे सफल रहे. 2011 में उन्होंने चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिलों के लिए, गोंडवाना विश्वविद्यालय की स्थापना में मदद की.

अपने बेहतरीन कार्यों के चलते सुधीर मुनगंटीवार को साल 2015 में आफ्टरनून वॉइस द्वारा ‘बेस्ट परफॉर्मिंग पॉलिटिशियन’ और साल 2016 में लोकमत समूह व जूनियर चैम्बर इंटरनेशनल द्वारा ‘मैन ऑफ़ द ईयर’ अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है.

फेम इंडिया मैगजीन- एशिया पोस्ट के “सर्वश्रेष्ठ मंत्री 2019 सर्वे” में महाराष्ट्र के वरिष्ठ मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ‘अनुभवी’ कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ मंत्री के तौर पर चुने गये हैं.