बदलते प्रदेश में निर्माण और विकास के लिए सक्रिय नंदकिशोर यादव

* जनता से सीधे तौर पड़ जुड़े सक्रिय राजनेता
* राज्य में प्रगति पथ के कुशल योजनाकार
* बेहतर कार्य शैली और कार्यक्षमता के लिए प्रसिद्ध

बिहार के पथ-निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव एक ऐसे कद्दावर नेता हैं जिन्हें बिहार के विकास में योगदान के लिए जाना जाता है. इन्हें बिहार की सड़कों को एक अरसे से योजनाबद्ध तरीके से दिनोंदिन सुधारते-संवारते देख बिहार की जनता के साथ-साथ सत्ता और विपक्ष दोनों ही प्रशंसा किये बिना नहीं रह सकते.

26 अगस्त 1953 को खाजेकलां, पटना में जन्मे नंद किशोर यादव के पास हर स्तर की राजनीति का अनुभव है.प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा पटना में ही हुई. स्नातक की पढ़ाई के दौरान छात्रों की परेशानियों और सवालों को लेकर ये आवाज़ उठाते रहे. इस दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का हिस्सा रहे. अपने जुझारू तेवरों से उनकी पहचान बनती चली गयी. जब इमरजेंसी के दौरान जय प्रकाश नारायण का सम्पूर्ण क्रान्ति का अभियान जोर पकड़ रहा था, तो उनके एक आह्वान पर युवा नंद किशोर पढ़ाई बीच में ही छोड़कर आन्दोलन में कूद पड़े. इनपर भी मीसा ऐक्ट लगा और जेल भेज दिये गये. डेढ़ साल जेल में रहे औऱ घर की कुर्की भी हो गयी. इतनी मुसीबतों के बावजूद इनके हौसले डिगे नहीं. वे जेपी के साथ मजबूती से खड़े रहे.

इमरजेंसी हटने के बाद वर्ष 1978 में इन्होंने पटना नगर निगम के लिये पार्षद पद का चुनाव लड़ा और जीते. यहां से शुरू हुई इनकी राजनीतिक यात्रा, जो अनवरत जारी है. वर्ष 1982 में पटना के उप महापौर चुने गये. 1983 में पटना महानगर अध्यक्ष बने और 1990 में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाये गये. 1995 में पटना पूर्वी क्षेत्र (बाद में पटना साहिब) से विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीते. ये इनकी लोकप्रियता का ही असर है कि इस सीट से इन्होंने लगातार छह बार जीत हासिल की है.

नन्द किशोर यादव बीजेपी में पिछड़ी जाति के बड़े नेता हैं. बिहार संगठन में भी उनकी मज़बूत पकड़ है. 1998 से 2003 तक ये भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे. नीतीश कुमार की अगुवाई में बनी बिहार की पहली एनडीए सरकार में पथ परिवहन, पर्यटन और स्वास्थ्य मंत्री बने. ‘फेम इंडिया-सीवोटर सर्वे 2013’ में इन्हें बेहतर कामकाज करने वाले मंत्री के तौर पर बिहार का ‘मंत्री नंबर 1’ भी चुना जा चुका है. जून 2013 में जदयू और भाजपा के अलग होने के बाद ये बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाये गये. नेता प्रतिपक्ष के रूप में विधान सभा में दिया उनका भाषण इतना लोकप्रिय हुआ कि पार्टी ने इसे बुकलेट के रूप में प्रकाशित कर लाखों प्रतियां लोगों में बंटवायी. 2015 में ये बिहार विधानसभा की पब्लिक एकाउंट्स कमिटी के चेयरमैन बनाये गए. साल 2017 में बीजेपी-जेडीयू की नयी सरकार में एक बार फिर इन्हें पथ निर्माण विभाग की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है. इस विभाग के मंत्री बनकर ये नये बिहार के सपने को साकार करने की कोशिश कर रहे हैं. बेहतर सड़कों का मतलब है तेज़ कनेक्टिविटी, कानून और व्यापार का आसान प्रवाह जो किसी भी प्रदेश के विकास को गति देते हैं.

नंदकिशोर यादव उम्दा सड़कों, पुल-पुलियों का निर्माण कर लोगों की यात्रा और व्यापार के लिये यातायात को तेज और आसान बनाने की कोशिश में हैं. हाल ही में इन्होंने एक नारा दिया है “कहीं से चलिये पांच घंटे में राजधानी पहुंचिये” जिसे सच करने में लगे हुए हैं. प्रदेश में सड़कों पर जिस तरह से काम हुआ है और उनकी हालत में सुधार हुआ है- उसका श्रेय सबसे अधिक इन्हें ही जाता है.

नंद किशोर यादव की अद्भुत सांगठनिक क्षमता और सहनशीलता की तारीफ़ उनके विरोधी भी करते हैं. यही कारण है कि उनसे मतभेद रखनेवाले भी कभी मनभेद नहीं रखते. ये उनकी राजनीतिक सक्रियता का ही परिणाम है कि चाहे वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हो या भारतीय जनता पार्टी का संगठन या फिर बिहार सरकार – 1971 से आज तक नन्द किशोर यादव बिना किसी जिम्मेदारी के नहीं रहे हैं. आगे भी बिहार के युवा नेताओं और नौजवानों के पथ-प्रदर्शन की ज़िम्मेदारी बिहार के इस पथ निर्माण मंत्री के कंधों पर है.

फेम इंडिया मैगजीन- एशिया पोस्ट के “सर्वश्रेष्ठ मंत्री 2019 सर्वे” में बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव को ‘ सक्रिय ‘ कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ मंत्री के तौर पर चुने गये हैं.