विशालतम राज्य के प्रभावशाली सिरमौर हैं केशव प्रसाद मौर्य

* राजनितिक परिपक्व , लोकप्रिय और प्रभावशाली राजनेता
* राज्य में सड़कों की स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान
* पर्यावरण संरक्षण , जल संरक्षण सहित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यों में सक्रिय भागीदारी

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगर चंद बड़े नामों की गिनती की जाये तो केशव प्रसाद मौर्य का नाम चोटी के राजनेताओं में आता है. प्रदेश के उप मुख्यमंत्री का पद और कई महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे केशव प्रसाद मौर्य एक सुलझे हुए राजनीतिज्ञ, दूरदर्शी योजनाकार व कठोर प्रशासक हैं.

केशव प्रसाद मौर्य सोलहवीं लोकसभा में फूलपुर से सांसद भी रह चुके हैं और विश्लेषक मानते हैं कि 2017 के विधानसभा चुनाव में बतौर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पार्टी को पिछड़ा व दलित वोट दिलवाने में उनकी भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण रही. उन्हें अप्रैल 2016 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया
गया था और चुनाव उनके नेतृत्त्व में लड़ा गया था.

7 मई 1969 को कौशाम्बी जिले के सिराथू कस्बे में जन्मे केशव प्रसाद मौर्य ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन से साहित्य रत्न की डिग्री हासिल की है. कहते हैं गरीब परिवार से आये मौर्य उच्च शिक्षा के लिये जब इलाहाबाद पहुंचे तो वहां के भारी खर्चे को चलाने के लिये उन्होंने अखबार भी बेचा और सड़क के किनारे अपनी चाय की दुकान भी खोल ली. इसी दौरान एक दिन चाय की दुकान पर ही उनकी मुलाकात विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ लोगों से हुई और उनका जुड़ाव संघ की विचारधारा से हो गया.

राजनीति केशव प्रसाद मौर्य के लिये बिल्कुल नयी थी और उनका कोई सगा-संबंधी भी इसमें नहीं था. जब विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल उनसे मिले तो उनकी वाक्पटुता और सरलता से वे काफी प्रभावित हुए. यहीं से उनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत हुई. वे 12
साल तक गंगापार और यमुनापार में प्रचारक रहे. उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और भाजपा के अनेक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया. श्रीराम जन्म भूमि और गोरक्षा व हिन्दू हित के लिये अनेकों आन्दोलन किये और जेल भी गये.

राजनीति की मुख्य धारा से जुड़े तो भाजपा के टिकट पर इलाहाबाद के शहर पश्चिमी से बाहुबली अतीक अहमद के खिलाफ व उनके भाई खालिद अजीम के खिलाफ विधानसभा का चुनाव भी लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सिराथू
विधानसभा सीट सामान्य हुई तो पार्टी के टिकट पर मौर्य मैदान में उतरे. पूरे प्रदेश में सपा की लहर के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य ने सिराथू में पहली बार कमल का फूल खिलाते हुये ये सीट भाजपा की झोली में डाली थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद की फूलपुर से
टिकट मिला और उन्होंने तीन लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज कर देश की संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी.

केशव प्रसाद मौर्य ने संसद में राष्ट्रहित, जनहित और किसान हित के मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाने का काम किया. उत्तर प्रदेश सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री उनके पास लोक निर्माण विभाग, फ़ूड प्रोसेसिंग, मनोरंजन कर और सार्वजनिक उद्यम विभाग हैं. प्रदेश के सर्वांगीण
विकास के लिये उन्होंने राज्य भर की सड़कों को जल्दी और गुणवत्तापूर्वक बनवाने के निर्देश दिये. पर्यावरण संरक्षण के लिए औषधीय पौधों की खेती पर जोर दे रहे हैं. साथ ही गाँव-गाँव जाकर जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन के प्रति जागरुकता अभियान भी चला रहे हैं. कुंभ 2019 को ‘अंतर्राष्ट्रीय महाकुंभ’ में बदलने में भी केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा योगदान रहा है.

केशव चाहते हैं कि इस ज़िम्मेदारी पर रहते हुए वे अपने समाज, देश और पार्टी के लिए अधिक से अधिक काम कर सकें ताकि उनके कार्यों से उनके परिजनों और पार्टी का सर हमेशा गर्व से ऊँचा रहे.

फेम इंडिया मैगजीन- एशिया पोस्ट के “सर्वश्रेष्ठ मंत्री 2019 सर्वे” में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और पथ निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ‘प्रभावशाली’ कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ मंत्री के तौर पर चुने गये हैं.