सफल कर्मयोद्धा हैं झारखंड के दिग्गज मंत्री सी पी सिंह

* प्रदेश की राजनीति के दिग्गज लोकप्रिय राजनेता
* राज्य के शहरों के आर्किटेक्ट के तौर पर प्रसिद्ध व्यक्तित्व
* झारखंड में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट करवाने का श्रेय

झारखंड के नगर विकास, आवास एवं परिवहन मंत्री चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ सीपी सिंह एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें उनके विरोधी भी कर्मठ और सुयोग्य राजनेता मानते हैं. प्रदेश की राजनीति में ये एक दिग्गज गैर आदिवासी चेहरा हैं और लगातार पांच बार राजधानी रांची की सीट से विधायक रहे हैं. वर्तमान में ये मुख्यमंत्री रघुबर दास की सरकार में उनके सबसे विश्वस्त सहयोगियों में से एक हैं. राजनीति के धुरंधर सी पी सिंह प्रगतिशील सोच वाले नेता हैं और अपने बेबाक अंदाज़ के लिये जाने जाते हैं.

पलामू जिले के एक किसान परिवार में 16 जनवरी 1956 को जन्मे सीपी सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई. स्कूली पढ़ाई के बाद ये रांची आ गये. रांची युनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद छोटानागपुर लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री ली और दो साल प्रैक्टिस भी की. स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही सीपी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े. 1973 से 1976 तक एवीबीपी का जिला प्रमुख होने के नाते, इन्होंने जेपी आंदोलन में कांग्रेस सरकार के खिलाफ छात्र विरोध का नेतृत्व किया और जेल भी गये. ये मानते हैं कि उनकी भागीदारी देश और राजनीति में उनके उल्लेखनीय योगदान में से एक है.

सीपी सिंह ने अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत वर्ष 1978 में जनता पार्टी से की. 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तो पार्टी ज्वाइन की और शुरूआत में यूथ विंग में काम किया. वर्ष 1982 से 1996 तक बिहार में रांची जिला अध्यक्ष और भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष रहे. ये बिहार में भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनावी ज़मीन तैयार करने में पूरी तल्लीनता के साथ लगे रहे. ये मेहनत रंग लायी और वर्ष 1996 में पहली बार सीपी सिंह रांची विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और जीतकर विधानसभा पहुंचे. इसके बाद तो जैसे जीत का सिलसिला चल निकला. ये लगातार इस सीट से जीतते आ रहे हैं. वर्ष 2000 से 2006 तक सीपी सिंह विधानसभा में सत्तारूढ़ पार्टी के प्रमुख सचेतक और वर्ष 2006 से 2009 तक विरोधी पार्टी के प्रमुख सचेतक रहे. जनवरी 2010 में इन्हें झारखंड विधानसभा का स्पीकर चुना गया. वर्ष 2014 में राज्य में बीजेपी की सत्ता आने के बाद रघुबर दास के मंत्रिमंडल में सीपी सिंह को जगह दी गयी.

सीपी सिंह की एक बड़ी उपलब्धि प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल निष्पादन में है जिसके कारण झारखंड की अलग पहचान बनी है. प्रदेश में कुल एक लाख 80 हजार 78 आवासों को स्वीकृति मिली है. इनमें से एक चौथाई से भी अधिक बन चुके हैं और लगभग इतने ही निर्माणाधीन हैं. स्मार्ट सिटी में भी झारखंड देश में तीसरे स्थान पर है. इन्होंने शहरी निकायों में 2,17,000 शौचालय बनवाये. कम्युनिटी शौचालय और मोबाइल शौचालय के जरिये स्वच्छ भारत अभियान में योगदान के लिये इन्हें 2019 में राष्ट्रपति के हाथों स्वच्छता पुरस्कार मिला. इससे पहले वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सीपी सिंह को झारखंड में हुए विकास के कार्यों के लिए ‘बेस्ट परफोर्मिंग स्टेट’ का पुरस्कार दे चुके हैं.

मंत्री बनने के बाद सीपी सिंह ने झारखंड के विकास और परिवहन की सुविधा को बढ़ाने के लिये ऐतिहासिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट करवाया जिसमें दुनिया भर के निवेशकों को झारखंड में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति आदि में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया. सीपी सिंह को झारखंड के शहरों का आर्किटेक्ट भी कहा जा सकता है. उन्होंने नगर विकास विभाग का एक टोल फ्री नंबर भी जारी करवाया है, जिस पर शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. उन्होंने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम की भी शुरुआत की है ताकि लोग स्वस्थ रहें और ट्रैफिक जाम व प्रदूषण में भी कमी आये.

सीपी सिंह के प्रयासों से रांची में ‘अटल स्मृति वेंडर्स मार्केट’ बना है जो देश का सबसे अनोखा मल्टी वेंडर्स मार्केट है. सीपी सिंह जनता की सेवा के लिए अपना निजी जन सेवा केंद्र चलाते हैं जिसमें क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनी जाती हैं. इसका सक्सेस रेट 95.2 प्रतिशत है. इस जनसेवा केंद्र द्वारा सबसे ज्यादा समस्याओं का निस्तारण किया गया जिसके चलते सीपी सिंह का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी दर्ज है. कुल मिलाकर सीपी सिंह ऐसे राजनेता के तौर पर उभरे हैं जिनके नेतृत्व में झारखंड की तस्वीर बदलती नज़र आ रही है.

फेम इंडिया मैगजीन- एशिया पोस्ट के “सर्वश्रेष्ठ मंत्री 2019 सर्वे” में झारखंड के नगर विकास , आवास और परिवहन मंत्री सीपी सिंह ‘कर्मयोद्धा’ कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ मंत्री के तौर पर चुने गये हैं.