मानव संसाधन की ‘पॉवर’ लेडी: मीनाक्षी डावर

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पॉवर सेक्टर में ह्यूमन रिसोर्स कितनी अहमियत का होता है अगर ये बात कोई बारीकी से जानता है तो वो हैं मीनाक्षी डावर. ये पॉवर वुमन जिस भी संगठन में गयीं, अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता और कार्यकुशलता के दम पर उस संगठन की कार्यशैली पर अपनी गहरी छाप छोड़ी. मानव संसाधन विभाग को किसी भी प्रतिष्ठान की रीढ़ कहा जाता है. प्रतिष्ठान का विकास मानव संसाधन प्रबंधन पर ही निर्भर करता है और इनको मानव संसाधन प्रबंधन में महारथ हासिल है. मीनाक्षी डावर पॉवर सिस्टम ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पोसोको) की डायरेक्टर (एचआर) हैं. मीनाक्षी ना केवल पोसोको की बल्कि विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में भी पहली महिला पूर्णकालिक निदेशक हैं.

मीनाक्षी डावर का जन्म 3 दिसम्बर 1960 को देहरादून,उत्तराखंड में हुआ था. मीनाक्षी के पिता एस.के. सरीन भारतीय नेवी में कमांडर थे और माँ चंचल सरीन इंग्लिश टीचर थीं. पिता की ट्रांसफरेबल जॉब के चलते मीनाक्षी की शुरूआती शिक्षा 6 अलग-अलग राज्यों के 6 अलग-अलग स्कूलों में हुई. नाइजीरिया के लागोस से शुरू हुआ ये सफ़र देहरादून के कैंब्रियन हॉल, दिल्ली के मेटर डे कान्वेंट, बालाचडी सैनिक स्कूल, गुजरात से होता हुआ सिकंदराबाद के केन्द्रीय विद्यालय के बाद विशाखापत्तनम के केन्द्रीय विद्यालय पर ख़त्म हुआ. यहाँ रोचक बात ये कि बालाचडी सैनिक स्कूल लड़कों का स्कूल था और मीनाक्षी क्लास 5 से लेकर 9 तक अपनी क्लास में इकलौती लड़की थीं. आंध्रप्रदेश यूनिवर्सिटी से बीएससी करने के बाद इन्होंने डीयू से मास्टर्स की डिग्री ली. इसके बाद यूके की हल यूनिवर्सिटी से एमबीए किया. मीनाक्षी ने इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी में भी डिप्लोमा किया है और सॉफ्ट स्किल्स की प्रमाणित प्रशिक्षक हैं.

मीनाक्षी डावर पिछले 35 सालों से मानव संसाधन के क्षेत्र में हैं. इनकी पहली जॉब साल 1982 में एनटीपीसी में लगी. एनटीपीसी में 9 साल काम करने के बाद इन्होंने 26 साल पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया में काम किया. वहां से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (एचआर) के पद से निवृत्त होने के बाद दिसम्बर 2017 से मीनाक्षी पोसोको में डायरेक्टर (एचआर) हैं. इन्होंने अप्रेज़ल से लेकर प्रमोशन, ट्रेनिंग, एस्टाब्लिश्मेंट तक ,पॉलिसी मेकिंग से लेकर इंडस्ट्रियल रिलेशन्स, मैनपावर प्लानिंग और एडमिनिस्ट्रेशन तक एचआर के सभी क्षेत्रों का कुशलतापूर्वक संचालन किया है.

मानव संसाधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम के लिए मीनाक्षी डावर को एमिटी वुमन अचीवर अवार्ड 2016 और ऊर्जा व सार्वजनिक क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए ‘वुमन परसोना-इन्वेना ऑफ़ द डिकेड’- पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज अवार्ड 2017 से सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा इन्हें फरवरी 2018 में महिलाओं के फोरम द्वारा अचीवर अवार्ड और कुशल नेतृत्व क्षमता के लिए एमिटी लीडरशिप अवार्ड 2018 मिला है.

मीनाक्षी डावर के पति आईआईटी-आईआईएम से पढ़े हुए हैं और चैनल टेक्नोलॉजीज़ के नाम से खुद की कंपनी चलाते हैं. ये दो बच्चों की माँ हैं. बेटा अर्जुन डावर इंजिनियर है और बेटी मलिका डावर एकोनिमिस्ट है. मीनाक्षी को पढ़ना, हिंदी फिल्में देखना, घूमना और लंबी सैर पर जाना पसंद है. महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर मीनाक्षी फिक्रमंद हैं. इनके अनुसार महिलाओं के सम्मान के लिए ज़रूरी है कि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों. वे कहती हैं कि हर माँ का ये कर्तव्य है कि वह अपने बेटों को महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देना सिखाये. तभी हमारे समाज की लड़कियां सुरक्षित महसूस कर पाएंगीं.

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