मोदी सरकार का विजय ध्वज थामे मंत्री नं.वन

1984 के बाद 2014 में पहला मौका आया था जब देश की जनता ने किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत दिया। आज़ादी के बाद पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ। जब ऐसा प्रचंड जनसमर्थन हासिल हुआ तो जनता की उम्मीदें भी आसमान पर होना लाजमी था। लोग भ्रष्टाचार, आर्थिक पिछड़ेपन, कुशासन और महंगाई की मार से त्रस्त थे और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में एक मसीहा दिख रहा था। अब वे अपने चार साल का कार्यकाल का पूरा कर चुके हैं और जनता अब हिसाब किताब करने में जुटी है कि सरकार उसकी कसौटी पर कितना खरा उतरी।

भाजपा का दावा है कि मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में कल्याणकारी योजनाओं से करीब 22 करोड़ गरीब परिवारों को प्रत्यक्ष फायदा पहुंचा है। इसने “साफ नीयत, सही विकास” के नारे को चरितार्थ करते हुए एक उदाहरण पेश किया है कि कैसे एक जनहितैषी सरकार चलायी जाती है। भाजपा का मानना है कि मौजूदा सरकार ने देश के आत्म-गौरव को सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाया है।

किसी भी अर्थव्यवस्था को सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण गति प्रदान करते हैं परिवहन के साधन। मोदी सरकार में न सिर्फ साफ व चौड़ी सड़कों के निर्माण को वरीयता दी गयी बल्कि प्रतिदिन बनने वाली सड़कों की लंबाई में लगभग 12-14 गुना वृद्धि हुई है। 2017-18 में देश में 1,16,324 करोड़ रुपये की लागत से रिकॉर्ड 9,829 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया। बंदरगाहों और जहजरानी की दशा सुधरने से न सिर्फ जन साधारण को बल्कि सरकार को भी हजारों करोड़ का लाभ पहुंचा। आवास को बुनियादी आवश्यकता मानते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गयी जिससे करोड़ों लाभार्थी अपने आशियाने का सपना साकार करने में सफल हुए।

अपने चार वर्षों के कार्यकाल में एनडीए सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण सुधारों की शुरुआत की है जिनमें सड़कों का जाल बिछाना, व्यापारिक मार्गों को सुधारना, जीएसटी, स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार, कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश से जुड़े सुधार, घर-घर बिजली पहुंचाना, उज्जवला और जन-धन योजना व आधार-बैंक को जोड़ने वाले सब्सिडी सुधार कार्यक्रम प्रमुख हैं। इतना ही नहीं, सरकार के 4 साल के कार्यकाल में देश में स्वच्छता अभियान 2014 में 38 फीसदी से बढ़कर 2018 में 83 फीसदी हो गया, जिसमें 7.25 करोड़ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण किया गया। 3.6 लाख गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया। महिला सुरक्षा और किसान की आय दोगुनी करने के कदम भी उठाये गये। मोदी सरकार ने किसानों के लिये उन्नत बीज व खाद उपलब्ध कराने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है। यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिये उसे नीम कोटेड कर दिया गया। भूमि सुधार में ऐतिहासिक उपलब्धि आयी जब मई, 2018 तक 13,33,13,396 सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए गये।

आर्थिक मोर्चे पर सरकार पहली बार गरीबों के दरवाजे तक पहुंची। आज़ादी के लगभग 70 साल बीत जाने के बवजूद देश की करोड़ों की आबादी बैंकिंग व्यवस्था से अछूती रही थी, और अधिकांश जनता के पास एक बैंक बचत खाता तक नहीं था। मोदी सरकार ने पहली बार 31.52 करोड़ से ज्यादा लोगों से जन-धन खाते खुलवाये और देशवासियों ने ज़ीरो-बैलेंस खाते होने के बावजूद 81,203 करोड़ रुपये बैंकों में जमा कराये।

भारत में जीवन बीमा के लिये कई कंपनियां मौजूद हैं, जिनके पास करोड़ों ग्राहक भी हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कभी कोई बीमा पॉलिसी जारी नहीं की गयी थी। जनसुरक्षा योजना के तहत तीन योजनाओं की घोषणा की गयी थी, जिनमें 19 करोड़ से भी अधिक भारतीय शामिल हो चुके हैं। 5.22 करोड़ परिवारों को 330 रुपए के वार्षिक प्रीमियम पर दिये गये जीवन बीमा कवर से फायदा हुआ।

2013-2017 के बीच वर्तमान मूल्यों में भारत के जीडीपी में 31 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई जबकि इसी अवधि में वैश्विक बढ़ोत्तरी महज चार फीसदी रही। बेरोजगारी से निपटने के लिये मोदी सरकार ने लोगों को स्वरोज़गार की ओर मोड़ने का प्रयास किया, तथा युवाओं से अपना कारोबार स्थापित करने का आग्रह करते हुए मुद्रा योजना शुरू की, जिसके तहत सरकार की ओर से ऋण उपलब्ध कराया। इस योजना तहत अब तक 12,78,08,684 लोगों को ऋण वितरित किये जा चुके हैं। उज्जवला योजना के तहत जहां एक तरफ प्रधानमंत्री की एक अपील पर करोड़ों देशवासियों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी वहीं सरकार ने इस बचत के जरिये लगभग चार करोड़ गरीब महिलाओं के रसोईघरों में रसोई गैस पहुंचायी।

आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ कि देश के हरेक गांव तक बिजली की रोशनी पहुंची हो। मई, 2018 तक देश के ऐसे 18,374 गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है, जहां अब तक बिजली नहीं थी। इतना ही नहीं, मोदी सरकार ने सौर ऊर्जा व बिजली की बचत करने वाले करीब तीस करोड़ एलईडी बल्बों का वितरण करवाया जिनसे बिजली के समुचित वितरण व उपयोग की दिशा ही परिवर्तित हो गयी। गांव-गांव तक पेयजल की आपूर्ति हालांकि राज्य सरकारों का विषय है, लेकिन मोदी सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम को पुनर्गठित करते हुए 2017-18 से 2019-2020 के लिए इस कार्यक्रम हेतु 23050 करोड राशि की मंजूरी दी है। सरकार ने ब्रॉड बैंड कनेक्टिविटी को भी गांव-गांव तक पहुंचाया।

जीडीपी के हिसाब-किताब के तरीके में बदलाव से एनडीए सरकार के दौरान प्रति व्यक्ति जीडीपी में काफी इजाफा हुआ। लागत की दर से ये आमदनी औसतन 91,153 रुपए और बाजार भाव के हिसाब से 1 लाख 12,556 रुपये रही। यूपीए-1 और यूपीए-2 के राज में ये प्रति व्यक्ति जीडीपी विकास दर इसकी आधी ही रही थी। एनडीए सरकार के दौरान जम कर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। मोदी सरकार के पहले चार साल में देश में औसतन 52.2 अरब डॉलर सालाना का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। यूपीए-2 में सालाना औसतन 38.4 अरब डॉलर और यूपीए-1 के दौर में 18.1 अरब डॉलर सालाना का विदेशी निवेश आया था। मोदी सरकार ने जो तमाम सुधार किये हैं, उनका फायदा विदेशी निवेश में दिख रहा है।

इन विकास कार्यों का असर शेयर बाजार और सेंसेक्स पर भी दिखा जिसने मोदी सरकार के पहले चार सालों में औसतन 10.9 फीसदी की दर से रिटर्न दिया है। नैशनल शेयर इंडेक्स यानी निफ्टी ने 11.6 प्रतिशत के औसत से निवेशकों को मुनाफा दिया है, जबकि यूपीए-2 के कार्यकाल में सेंसेक्स ने 22.3 और निफ्टी ने 20.7 फीसदी की दर से रिटर्न दिया था। यूपीए-1 के कार्यकाल में सेंसेक्स ने 31.4 और निफ्टी ने 29.6 प्रतिशत की दर से रिटर्न दिया था। मौजूदा एनडीए सरकार के कार्यकाल में वित्त वर्ष 2015 में सेंसेक्स ने 24.9 प्रतिशत और निफ्टी ने 26.7 फीसदी की दर से रिटर्न दिया। वहीं यूपीए-2 में सेंसेक्स ने 80.5 प्रतिशत और निफ्टी ने 73.8 प्रतिशत की दर से रिटर्न दिया। इसी तरह यूपीए-1 के राज में वित्त वर्ष 2006 में सेंसेक्स ने 73.7 फीसदी तरक्की की, तो निफ्टी ने 67.1 प्रतिशत की दर से विकास किया।

इस ऐतिहासिक विकास की दिशा निस्संदेह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय की है, लेकिन उस निर्देशन पर समुचित कदम उठाने का काम उनके कर्मठ व विश्वस्त मंत्रियों की टीम ने किया है। कुछ मंत्रियों और उनके मंत्रालयों ने तो उम्मीद से बढ़ कर काम किया और नये भारत के निर्माण में अपना अहम योगदान दिया। ऐसे मंत्रियों पर न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को बल्कि पूरे देश को गर्व है। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में मोदी सरकार के ऐसे दस सर्वश्रेष्ठ मंत्रियों का आकलन किया है जिन्होंने अपनी सूझ-बूझ व कार्यकुशलता से साबित कर दिखाया कि वे ही हैं मंत्री नंबर वन।