एक साथ 104 सैटेलाइट का प्रक्षेपण कर इतिहास रचने के सूत्रधार रहे हैं किरण कुमार

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आम आदमी के लाभ के लिये अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग की योजनाओं के लिए ख्यात भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक पद्मश्री से सम्मानित अलुरू सीलिन किरण कुमार इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के अध्यक्ष हैं। उन्होंने 14 जनवरी, 2015 को पदभार संभाला। उन्हें चंद्रयान-1 और मंगलयान अंतरिक्ष यानों के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पुर्जों को विकसित करने का श्रेय प्राप्त है। उनके ही नेतृत्व में इसरो ने फरवरी, 2017 में एक साथ 104 सैटेलाइट प्रक्षेपित कर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर इतिहास रच दिया। किरण कुमार स्पेस अप्लीकेशंस सेंटर, अहमदाबाद के निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

41 से ज्यादा शोधपत्र लिख चुके एआर किरण कुमार का जन्म कर्नाटक के हासन जिले में 22 अक्टूबर, 1992 को एक लिंगायत परिवार में हुआ था। उन्होंने 1971 में बंगलुरु विश्वविद्यालय के नेशनल कॉलेज से भौतिकी (प्रतिष्ठा) से स्नातक किया। और फिर उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से 1973 में इलेक्ट्रॉनिक्स में एमएससी की। इसके बाद 1975 में श्री कुमार ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलुरु से फिजिकल इंजीनियरिंग में एम.टेक. किया। श्री कुमार ने 1975 में स्पेस अप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद में करियर शुरू करने के बाद वे अप्रैल, 2012 से इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम्स ग्रुप के निदेशक रहे। उन्होंने वर्ल्ड मेटेरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन और नागरिक अंतरिक्ष सहयोग पर भारत-अमेरिकी संयुक्त कार्य दल जैसे कई अँतरराष्ट्रीय मंचों पर इसरो का प्रतिनिधित्व किया और अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स (सीईओ) पर इसरो कमेटी की अध्यक्ष भी बने।

इसरो अध्यक्ष के रूप में अपने लगभग पौने तीन वर्ष के कार्यकाल में श्री कुमार ने कई रिकॉर्ड स्थापित किये। जून, 2016 में इसरो ने एक साथ 20 सैटेलाइट प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड स्थापित किया है। इनमें से 13 सैटेलाइट अमेरिका के, दो कनाडा के और एक-एक सैटेलाइट जर्मनी और इंडोनेशिया के भी थे। इससे पूर्व इसरो ने वर्ष 2008 में एक साथ 10 सैटेलाइट प्रक्षेपित किये थे। लेकिन इसरो ने यहीं कदम नहीं रोके। श्री कुमार ने अगली योजना बनायी एक साथ 104 सैटेलाइट प्रक्षेपित करने की। और फरवरी, 2017 में उन्होंने श्रीहरिकोटा से एक ही रॉकेट से 104 सैटेलाइट प्रक्षेपित करके इतिहास रच दिया। किसी अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट प्रक्षेपित कर अंतरिक्ष कक्षा में स्थापित करना विश्व रिकॉर्ड बन गया। श्री कुमार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सिस्टम और सब सिस्टम के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के साथ समझौते की योजना में हैं। भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर न सिर्फ आत्मनिर्भर बल्कि दुनिया में अग्रणी बनाने की कोशिशों में जुटे श्री कुमार मानव समाज की उन्नति और खुशहाली के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर देते हैं।

किरण कुमार भास्कर टीवी पेलोड जैसी शुरुआती परियोजनाओं से ले कर बाद के चंद्रयान-1 और मंगलयान जैसे कार्यक्रमों तक, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों में योगदान के लिए ख्यात हैं। कुमार को 1979 और फिर 1981 में प्रक्षेपित भारत के प्रथम रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट भास्कर में उपयोग किये गये इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेज सेंसर की डिजाइन तैयार करने और विकसित करने और साथ ही साथ मौसम पूर्वानुमान, समुद्र क्षेत्र/परिदृश्य मैपिंग और दूरसंचार में प्रयुक्त ओसियन कलर इंस्ट्रूमेंट विकसित करने का श्रेय प्राप्त है। इनसैट-3डी, रिसोर्ससैट, माइक्रोसैटेलाइट और कार्टोसैट जैसी परियोजनाओं के लिए इमेजिंग इस्ट्रूमेंट की डिजाइन और विकास में भी किरण कुमार का योगदान है। चंद्रयान-1 परियोजना के टेरेन मैपिंग कैमरा और हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजर पेलोड का श्रेय भी उनके प्रयासों को जाता है। उनकी अगुवाई वाले समूह ने ही पाँच वैज्ञानिक उपकरणों में से तीन को विकसित किया था। किरण कुमार की उपलब्धियों में 2-चैनल और 3-चैनल वीएचआरआर मेटेरोलॉजिकल पेलोड्स विकसित करना और तीसरी पीढ़ी के इमेजर और साउंडर विकसित करना शामिल है।

एआर किरण कुमार को पद्मश्री के अलावा 1994 में इंडियन सोसाइटी ऑफ रिमोट सेंसिंग अवार्ड, 1998 में वास्विक अवार्ड, 2001 में एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया अवार्ड से नवाजा जा चुका है। इसरो ने 2006 में उन्हें इसरो इन्डीविजुअल सर्विस अवार्ड से नवाजा। किरण कुमार को 2007 में इंडियन सोसाइटी ऑफ रिमोट सेंसिंग के भास्कर अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2008 में उन्हें इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स के टीम अचीवमेंट अवार्ड और इसरो परफॉर्मेंस अवार्ड से नवाजा गया। श्री कुमार को नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियर्स का फेलोशिप भी दिया गया है और वे इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स के कॉरेस्पान्डिंग सदस्य भी हैं। किरण कुमार को 24 मार्च, 2015 को गीतम विश्वविद्यालय ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी विभूषित किया। फेम इंडिया एशिया-पोस्ट ने अपने ताजा सर्वे में उन्हें देश के प्रमुख प्रभावशाली नीति निर्माताओं में से पाया है।