ज़रूरतमंदों के जीवन की रोशनी हैं : किरण चोपड़ा

बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनका जीवन उनके नाम की तरह ही होता है. इसका जीता-जागता उदाहरण हैं किरण चोपड़ा. ये ज़रूरतमंद बुजुर्गों के अँधेरे जीवन में रोशनी की एक किरण हैं. एक उद्यमी, शिक्षाविद और मानवतावादी के साथ-साथ किरण एक प्रेरक वक्ता और समाज सुधारक भी हैं. ये वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की संस्थापक हैं. प्यार, सेवा और समर्पण के भावों से भरी हुईं किरण ज़रूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं. किरण इसे अपनी शिक्षा और परवरिश का नतीजा बताती हैं.

महान शहीद स्व लाला जगत नारायण जी और स्व श्री रोमेश चंदर जी के परिवार से ताल्लुक रखने वाली किरण चोपड़ा कई सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं. इनके पति वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी कुमार पंजाब केसरी न्यूज़पेपर, मप्र और करनाल के रेजिडेंट एडिटर हैं जोकि अपनी धारदार और निर्भीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की प्रेरणा और ताकत किरण ही हैं. बुजुर्गों के उत्थान और उनको बेहतर खुशहाल ज़िन्दगी देने के लिए किरण जी-जान से जुटी हुई हैं. ना सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब द्वारा किये जा रहे प्रयासों को बढ़ाने के लिए वे कड़ी मेहनत कर रही हैं.वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब ने भारत में पहली बार व्यक्तियों या परिवारों द्वारा बुजुर्गों को गोद लेने का कांसेप्ट निकाला. ये किरण चोपड़ा का ही सफल प्रयास था.

किरण चोपड़ा ने गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, पंजाब से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया है.वे एक्टिंग और भाषण में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं. वे पंजाब केसरी पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और जे आर मीडिया इंस्टिट्यूट की चेयरपर्सन भी हैं. किरण सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा वृद्ध व्यक्तियों के लिए गठित राष्ट्रीय परिषद की सदस्य हैं. साथ ही कई सामाजिक कल्याण और विकास के लिए बनायी गयीं समितियों और संस्थाओं की सदस्य और संरक्षिका हैं.

किरण चोपड़ा ने अपने जीवन के अनुभवों और विचारों को किताबों में संकलित किया है. ‘आशीर्वाद’ इंग्लिश वर्जन ‘ब्लेसिंग्स’, ‘जीवन संध्या’,’ज़िन्दगी का सफ़र’, ‘आज और कल’ और ‘अनुभव’ इनकी किताबें हैं. इसके अलावा इन्होंने  ‘बेटियाँ’ नाम से एक कॉफ़ी टेबल बुक भी लिखी है जोकि भारत के महामहिम राष्ट्रपति और हरियाणा के राज्यपाल द्वारा रिलीज़ की गयी थी.

“क़दमों की धूल नहीं माथे की शान”, इनका आदर्श वाक्य और मिशन है जिसके लिए किरण पूरी तरह से समर्पित हैं. ये  भारत के पारंपरिक मूल्यों, संस्कृति और संस्कारों को मानने वाली हैं. भारतीय महिला होने पर इनको गर्व है.

एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में, किरण चोपड़ा को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के हाथों ‘वयोश्रेष्ठ सम्मान 2017’ से सम्मानित किया गया है. राजीव गाँधी अवार्ड सोशल एक्टिविस्ट ऑफ़ द ईयर 2012, ह्यूमन केयर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, इंडियन बुक्स ऑफ़ रिकार्ड्स द्वारा इंटरनेशनल अवार्ड फॉर सोशल क्रिएटिविटी, इंडियन काउंसिल फॉर यूएन रिलेशन्स द्वारा इंटरनेशनल विमेंस अवार्ड 2013 समेत कई नेशनल और इंटरनेशनल अवार्ड इनके नाम दर्ज हैं.

किरण चोपड़ा अखबारों के कॉलम के माध्यम से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ आन्दोलन में बड़ी संख्या में जन हिस्सेदारी के लिए लोगों को प्रेरित कर रही हैं. इन्होंने सोशल मीडिया पर ‘सेल्फी विद डॉटर’ नाम से ऑनलाइन कैंपेन शुरू किया जिसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया. हाल के दिनों में किसानों की कठिनाइयों को कम करने के लिए किरण पीड़ित किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहायता देना का प्रयास भी कर रही हैं.

किरण बताती हैं कि उनके जीवन में दो महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है. एक उनकी माँ जिसने उनको जन्म दिया और दूसरी उनकी सास जिन्होंने उन्हें जीवन जीने की कला सिखाई. किरण के पति इनकी प्रेरणा हैं और तीनों बेटे इनकी ताकत हैं.

शक्तिशाली नारी शक्ति के इस सर्वे में फेम इंडिया मैगजीन – एशिया पोस्ट ने नॉमिनेशन में आये 300 नामों को विभिन्न मानदंडों पर कसा , जिसमें सर्वे में सामाजिक स्थिति, प्रतिष्ठा, देश की आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था पर प्रभाव, छवि, उद्देश्य और प्रयास जैसे दस मानदंडों को आधार बना कर किये गये स्टेकहोल्ड सर्वे में पंजाब केसरी समूह की डायरेक्टर व वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की फाउंडर चेयरपर्सन किरण चोपड़ा आठवें  स्थान पर हैं |