एक दूरदर्शी रणनीतिकार और विकासपरक योजनाकार हैं के जी सुरेश ने (फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2018)

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अगर देश के विकास में भागीदार बने सकारात्मक पत्रकारों की चर्चा हो तो उनमें के जी सुरेश का नाम सबसे ऊपर की श्रेणी में रखा जायेगा। फिलहाल वे देश के सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले पत्रकारिता संस्थान आईआईएमसी के महानिदेशक हैं और उनके निर्देशन में संस्थान काफी उम्दा प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन के जी सुरेश की इससे अलग भी एक बहुत बड़ी पहचान है एक दूरदर्शी रणनीतिकार और विकासपरक योजनाकार की। हाल के वर्षों में देश के विकास की दिशा निर्धारित करने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।

26 सितंबर, 1968 में जन्मे केजी सुरेश का बचपन अलेप्पी और हैदराबाद में बीता और शुरुआती शिक्षा वहीं हुई। इंटरमीडियेट दिल्ली के केरला एज़ुकेशन सोसाइटी स्कूल से और इंग्लिश लिटरेचर में ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से 1988 में। गुरु जंभेशवर युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में फर्स्ट क्लास में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले केजी सुरेश ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में डिप्लोमा भी लिया है।

वर्ष 1994 से 2006 तक देश की सबसे प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी पीटीआई में कार्यरत रहे केजी सुरेश वहां कई साल चीफ पॉलिटिकल कॉरेस्पॉन्डेंट रहे। सभी पार्टियों और राजनेताओं तक उनकी पहुंच और खबरों के प्रति उनकी निष्पक्षता से सभी हमेशा प्रभावित रहे।

22 जनवरी, 2008 को उन्होंने ग्लोबल फाउंडेशन फॉर सिविलाइजेशन हार्मोनी (जीएफसीएच) नाम की एक संस्था बनायी जिसके लॉंच पर श्रीश्री रविशंकर, दलाई लामा, स्वामी दयानन्द सरस्वती, बाबा रामदेव, जत्थेदार जोगिन्दर सिंह वेदांती, मोहम्मद अली मदनी और कार्डिनल ओस्वाल्ड ग्रैसियस जैसे कई नामी-गिरामी धर्मगुरु मौजूद थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इसे भारतीय इतिहास का एक ऐतिहासिक अवसर बताया था। केजी सुरेश और उनकी संस्था जीएफसीएच ने देश विदेश में समय-समय पर आतंकवाद के विरुद्ध, सांप्रदायिक सद्भाव और उससे जुड़े कई मसलों पर गंभीर चिंतन व प्रचार अभियान चलाया है। इसके अलावा वे कई वर्षों तक बतौर मीडिया एडवाइजर डालमिया भारत ग्रुप से भी जुड़े रहे।

केजी सुरेश कुछ समय के लिये बतौर कंसल्टिंग एडीटर दूरदर्शन व एशियानेट न्यूज नेटवर्क से भी जुड़े। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, जामिया मिलिया इस्लामिया व माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे कई संस्थानों की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हैं। इसके अलावा वे उस विवेकानंद इंटरनैशनल फाउंडेशन के थिंकटैंक भी माने जाते हैं जिसके संस्थापक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हैं। यह संस्थान राष्ट्र-निर्माण में एक अहम भूमिका निभा रहा है और मौजूदा मोदी सरकार ने इसकी कई सिफारिशों को अपने मिशन में शामिल किया है।

केजी सुरेश को देश-विदेश में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान व पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें 2014 में ख्वाजा गरीब नवाज ग्लोबल पीस अवॉर्ड मिल चुका है। वे चुनाव आयोग के नैशनल मीडिया अवॉर्ड, युनिसेफ के मीडिया फेलोशिप और रेडियो4चाइल्ड अवॉर्ड, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नैशनल अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म की जुरी के सदस्य भी रह चुके हैं। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के नैशनल अवॉर्ड्स और पॉपुलेशन फर्स्ट के लाडली मीडिया एंड ऐडवर्टाइजिंग अवॉर्ड के निर्णायक मंडल में भी रह चुके हैं। वे पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘दिल्ली सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट-2015’ के मुख्य संपादक रह चुके हैं और ‘नैशनल बुक ट्रस्ट’ के एडिटोरियल बोर्ड में भी शामिल हुए। जब 2015 में ‘द वॉशिंगटन टाइम्स’ ने सियोल में वर्ल्ड मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित किया तो केजी सुरेश भारत से इकलौते प्रतिनिधि के तौर पर बुलाये गये थे। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2018 में केजी सुरेश को मीडिया के एक प्रमुख सरताज के तौर पर पाया गया है।