नये तेलंगाना के आधुनिक रचयिता हैं के चंद्रशेखर राव

नव तेलंगाना के रचयिता के. चंद्रशेखर राव जो केसीआर के नाम से विख्यात हैं इस प्रदेश के प्रथ मुख्यमंत्री हैं. तेलंगाना में वे उस सूर्य के समान हैं जिसके तेज में भाजपा व कांग्रेस सरीखी पार्टियां भी छांव ढूंढ रही हैं. यह बात 2018 के विधानसभा चुनाव में साबित हो चुकी है.

ओसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से साहित्य में एमए के पूरा होने के बाद, उन्होंने युवा कांग्रेस के साथ राजनीति की शुरुआत की. वे कांग्रेस के मुश्किल दिनों में भी पार्टी के यूथ आइकॉन रहे संजय गांधी के साथ खड़े रहे. 1983 में वे तेलगूदेशम पार्टी यानी टीडीपी में शामिल हो गये और सिद्दीपेट से चार बार विधायक चुने गये. वे एनटी रामाराव के करीबी थे और उनकी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने. जब चंद्रबाबू नायडू ने सत्ता संभाली तो भी उनका कद कम नहीं हुआ और वे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री औऱ फिर विधान सभा के डिप्टी स्पीकर बने. 

वे तेलंगाना से थे और अकसर अलग राज्य की मांग उठाते रहे थे. उनका मानना है कि सदियों पुरानी तेलगु संस्कृति को बचाना औऱ उसे नयी दिशा देना आवश्यक है. करीब दो दशकों तक टीडीपी के साथ रहने के बाद 2001 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और अपनी नयी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति यानी टीआरएस का गठन किया. वे महबूबनगर, करीमनगर और मेडक के सांसद भी रहे और केंद्र की यूपीए सरकार में मंत्री भी बने. अगस्त 2006 में, उन्होंने तेलंगाना के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. करीब एक दशक तक आंदोलन चलने के बाद जब 2014 में तेलंगाना अलग राज्य बना तो वे पहले मुख्यमंत्री बने. 2018 में उन्होंने समय पूरा होने से पहले ही विधानसभा भंग कर दी और दोबारा पहले से भी अधिक बहुमत से सरकार बनायी.

के चंद्रशेखर राव के नेतृत्त्व में टीआरएस सरकार ने कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक मिसाल कायम की है और 1 लाख करोड़ की लागत से कालेश्वरम नाम की समग्र कृषि विकास योजना शुरू की. 17 हजार करोड़ की लोन योजना चलायी जिससे 38 लाख किसानों को फायदा पहुंचा. इसके अलावा उनकी हरिताहरन और कृषि निवेश योजनाएं भी काफी लोकप्रिय रहीं. वे ज्योतिष, अंक विज्ञान और वास्तु में काफी विश्वास रखते हैं और कोई भी महत्वपूर्ण काम या उद्घाटन आदि के लिये समय तय करने से पहले हमेशा विशेषज्ञों की सलाह लेते हैं. नंबर ‘6’ उनका भाग्यशाली नंबर माना जाता है.

व्यक्तित्व, रणनीतिक समझ, जिम्मेदारी, पार्टी में प्रभाव, छवि और राजनीतिक दखल आदि मानकों को ध्यान में रख कर किये गये देशव्यापी सर्वे में कल्वकुंतला चंद्रशेखर राव को धाकड़ नेताओं में अहम स्थान प्राप्त हुआ है.