सियासत से विरासत को संभालने की कला जानते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया

योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश की सियासत में एक ऐसा चेहरा हैं जो बीते डेढ़ दशकों में तेजी से उभरे हैं. वे रेसिंग कार चलाने के शौकीन हैं और अपने समकालीन नेताओं से लगातार आगे निकलने की ज़िद में हैं. उन पर अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को बनाये रखने की भी जिम्मेदारी है. कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे माधव राव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य गुना लोकसभा सीट से सांसद हैं और पार्टी के असरदार युवा चेहरों में गिने जाते हैं. 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में सिंधिया कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के भी प्रबल दावेदार रह चुके हैं.

ग्वालियर के राजघराने से ताल्लुक रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में ग्रैजुएशन किया और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के बाद अमेरिका में ही साढ़े चार साल लिंच, संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क और मॉरगन स्टेनले में उन्होंने काम किया. छोटी उम्र से ही ज्योतिरादित्य ने पिता के साथ चुनावी रैलियों में शिरकत करनी शुरू कर दी थी. एक विमान हादसे में असमय पिता की मौत के बाद सिंधिया राजघराने की राजनीतिक विरासत को संभालने की ज़िम्मेदारी ज्योतिरादित्य के कन्धों पर आ गयी. फरवरी 2002 में गुना सीट पर उपचुनाव जीतकर वो पहली बार लोकसभा पहुंचे और तब से आजतक लोकसभा सीट पर उनका कब्ज़ा बरकरार है. वे मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे. इस कार्यकाल में उनकी प्रशासनिक क्षमता काबिले तारीफ़ थी.

ज्योतिरादित्य के स्वभाव में तल्ख़ तेवर शुरू से ही रहे हैं. रौबदार आवाज़ और नाक पर गुस्सा ये उनकी अपनी शैली है. हालांकि समय के साथ मंझते हुए उन्होंने अपने आपको शांत कर लिया है लेकिन सियासत में विरोधियों को जवाब देते समय उनका यही अंदाज़ बरकरार है.

ज्योतिरादित्य की काबिलियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मध्य प्रदेश में 15 साल पुरानी भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में उनको चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया था. सिंधिया की चुनावी रणनीति और कुशल संगठन प्रबंधन के चले कांग्रेस ने प्रदेश में विजय पताका लहराई. 

अब 2019 के चुनाव के मद्देनज़र ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रियंका गांधी के साथ उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी बनाया जाना कांग्रेस की राजनीति में उनके बढ़ते दबदबे को दर्शाता है.कांग्रेस ज्योतिरादित्य की लोकप्रियता को ग्वालियर से सटे पश्चिम उत्तर प्रदेश में भुनाना चाहती है. ज्योतिरादित्य कांग्रेस के मंसूबों पर खरा उतरने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं.

व्यक्तित्व, रणनीतिक समझ, जिम्मेदारी, पार्टी में प्रभाव, छवि और राजनीतिक दखल आदि मानकों को ध्यान में रख कर किये गये देशव्यापी सर्वे में प्रियंका गांधी को धाकड़ नेताओं में अहम स्थान प्राप्त हुआ है.