देश में स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयां देने को तत्पर : जे पी नड्डा

2 मई 2017 की सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश यानी जेपी नड्डा पार्टी की एक अहम बैठक में हिस्सा लेने के लिए कांगड़ा हवाई अड्डे से पालमपुर जा रहे थे। उन्होंने सड़क के किनारे एक व्यक्ति को पड़ा देखा जो किसी सड़त हादसे का शिकार हो गया था। उन्होंने तत्काल अपना काफिला रोका और एंबुलेंस बुलायी. वे एंबुलेंस आने तक वहीं रुके रहे और घायल व्यक्ति को इसके बाद टंडा (कांगड़ा) के आरपी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। इसके कुछ मिनट बाद जब मंत्री पालमपुर के लिए निकले तो उनके स्वागत के लिए घग्गर इलाके के पास जमा हुई भीड़ के कारण एक दूसरी एंबुलेंस का रास्ता बाधित हो गया था। मंत्री जी ने एंबुलेंस का हूटर सुनते ही तत्काल अपनी कार रोकी और समर्थकों से एंबुलेंस को रास्ता देने को कहा। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि जेपी नड्डा मानवीय मूल्यों और स्वास्थ्य सेवाओं को कितनी अहमियत देते हैं।

जगत प्रकाश नड्डा उर्फ जेपी नड्डा देश के एक कद्दावर नेता हैं। ये मोदी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं और बेहतर रणनीतिकार माने जाते हैं। ये जितने अमित शाह के करीब हैं, उतना ही भरोसा इनपर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करते हैं । देश के काबिल मंत्री में शुमार हो चुके जेपी नड्डा ने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी। हालांकि नड्डा के परिवार का सियासत से कोई सीधा नाता नहीं था। अपनी काबिलियत के दम पर नड्डा ने राजनीति में ये मुकाम हासिल किया है ।

जेपी नड्डा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं और ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। एक छोटे से राज्य के रहने वाले नड्डा सियासत के आसमान में ध्रुव की तरह चमकने की कहानी काफी प्रेरणादायी है। नड्डा का जन्म 2 दिसंबर 1960 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा भी पटना में ही हुई। स्कूलिंग सेंट जेवियर्स से हुई। दरअसरल जेपी नड्डा के पिता डॉक्टर नारायण लाल नड्डा पटना विश्वविद्यालय में कुलपति थे। नड्डा की मां कृष्णा नड्डा गृहिणी थीं। पटना में ही पूरा परिवार रहता था। ऐसे में ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई नड्डा ने पटना में ही की। उसके आगे की पढ़ाई हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में पूरी की। पटना में ही नड्डा ने राजनीति का ककहरा पढ़ा । पटना में पढ़ाई के दौरान मन में राजनीति की ऐसी बीज पड़ी जो बीतते वक्त के साथ वटवृक्ष बन गया । आज नड्डा की गिनती देश के बड़े नेता के तौर पर होती है।

जेपी नड्डा स्कूल के दिनों में एक अच्छे स्पोर्ट्समैन भी रहे हैं। जब वो स्कूल में पढ़ रहे थे, तब नड्डा दिल्ली में हुए जूनियर तैराकी चैंपियनशिप में बिहार का प्रतिनिधत्व भी किया था। हिमाचल लौटने के बाद भी खेल से उनका लगाव जुड़ा रहा। भले ही नड्डा सियासी खेल के खिलाड़ी बन गए लेकिन उनके दिल में हमेशा स्पोर्ट्स में ज़िंदा रहा। खेल प्रेम की वजह से ही 2008 से 2012 के दौरान नड्डा ओलांपिक एसोसिएशन ऑफ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष भी रहे। हिमाचल हैंडबॉल एसोसिएशन में भी नड्डा रह चुके हैं।

जेपी नड्डा के अपने घर हिमाचल प्रदेश लौटने की कहानी भी सियासी है। दरअसल जब देश में इंदिरा सरकार के खिलाफ ऐतिहासिक जेपी आंदोलन चल रहा था, उस वक्त नड्डा पटना में रहते थे। स्टूडेंट्स मूवमेंट चरम पर था। नड्डा की उम्र 14-15 साल की ही थी। लेकिन जेपी से काफी प्रभावित हुए। आंदोलन की तरफ उनका रुझान बढ़ने लगा। अपनी छोटी सी उम्र में ही नड्डा जेपी आंदोलन के सिपाही बन गए । संपूर्ण क्रांति में नड्डा ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जेपी आंदोलन में लाठियां खाने के बाद पूरी तरह से राजनीति में रम गए । जेपी नड्डा भारतीय जनता पार्टी के छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य बन गये। जेपी नड्डा पटना यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के सेक्रेटरी बने। बतौर छात्र नेता छात्रों की नयी आवाज़ बन गए। धीरे-धीरे नड्डा की चर्चा होने लगी । तकरीबन 13 बरस तक जेपी नड्डा एबीवीपी से जुड़े रहे। इस दौरान संगठन में उनकी काबिलियत को देखते हुए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। नड्डा के संगठन के प्रति समर्पण इस कदर था कि संगठन ने उन्हें साल 1982 में बड़ी जिम्मेदारी दे दी। 22 बरस के नड्डा को उनके पैतृक राज्य हिमाचल प्रदेश  विद्यार्थी परिषद का प्रचारक बनाकर भेज दिया।

जेपी नड्डा एक तरफ संगठन को मजबूत करने में जुट गए तो दूसरी तरफ उन्होंने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई भी शुरू कर दी। तेज़ तर्रार जेपी नड्डा उस दौर के हिमाचल प्रदेश के छात्रों में काफी लोकप्रिय हुए। नड्डा के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार छात्र संघ चुनाव हुआ और उसमें बीजेपी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को सभी सीटें हासिल हुई। 1983-1984 में जेपी नड्डा हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी परिषद के पहले अध्यक्ष बने । इसके बाद  1986 से 1989 तक नड्डा विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे।
अब तक नड्डा पूरी तरह से खुद को राजनीति के सांचे में ढाल चुके थे। साल 1989 में नड्डा ने एक बड़ा कदम उठाया। केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के भ्रटाचार के खिलाफ नड्डा ने राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा का गठन किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी लड़ाई छेड़ दी। नड्डा ने आंदोलन चलाया। नतीजा ये हुआ कि आंदोलन चलाने की वजह से युवा नेता नड्डा को गिरफ्तार कर लिया गया। नड्डा को 45 दिन तक जेल में भी रहना पड़ा । जेल जाते ही नड्डा की नाम सुर्खियों में आ गया। मीडिया में चर्चा होने लगी। उस वक्त के पार्टी के रणनीतिकारों के बीच नड्डा चर्चा के विषय बन गए। युवाओं में लोकप्रिय हो चुके नड्डा को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया।
1989 के लोकसभा चुनाव में जेपी नड्डा को भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया । जिम्मा मिला था युवा कार्यकर्ताओं को चुन कर चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित करने का। नड्डा ने अपना काम बाखूबी निभाया। मेहनती नड्डा ज़मीनी स्तर पर काम करने लगे। इसका फायदा भी पार्टी को हुआ। नतीजा ये हुआ कि 1991 में 31 साल की उम्र में ही नड्डा को पार्टी ने भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्य्क्ष बना दिया। अपने कार्यकाल में नड्डा ने जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़ने और ट्रेनिंग देने पर बल दिया।  वर्कशॉप के जरिए युवाओं के अंदर भाजपा की विचारधारा को फैलाया। यह उस समय अपने आप में एक नई तरह का प्रयोग था । जेपी नड्डा के कार्यकाल में बड़ी तादाद में युवा पार्टी से जुड़े ।
साल 1993 में जब हिमाचल प्रदेश में विधानसभा का चुनाव हुआ तो नड्डा ने चुनावी राजनीति की तरफ रूख किया। पार्टी ने नड्डा को मैदान में भी उतार दिया। बिलासपुर सीट से नड्डा ने चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। हालांकि बीजेपी की सरकार नहीं बनी लेकिन पार्टी ने नड्डा को विधानसभा में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। जेपी नड्डा को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया। तेज तर्रार और मुखर वक्ता के रूप में नड्डा ने कम विधायकों का साथ होने के बावजूद सरकार को 5 साल तक अलग-अलग मुद्दों पर ऐसे घेरा कि विपक्ष में होने के बावजूद उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक चुना गया।
बिलासपुर सीट से जेपी नड्डा ने 1998 में फिर जीत हासिल की। बीजेपी की सरकार बनने पर नड्डा को सूबे में स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्यभार संभाला । बतौर हेल्थ मिनिस्टर नड्डा का रिपोर्ट कार्ड बेहतर रहा। हालांकि 2003 में वो चुनाव हार गए। लेकिन फिर 2008 में फिर से विधायक चुने गए। इस बार नड्डा को वन एवं पर्यावरण साथ-साथ साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्रालय का का जिम्मा मिला। हिमाचल प्रदेश में वन एवं पर्यावरण मंत्री रहते हुए जेपी नड्डा ने वन अपराधों को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया। उन्होंने राज्य में वन पुलिस स्टेशनों को प्रभावी ढंग से स्थापित किया। उन्हें शिमला में वनों को विकसित करने का श्रेय भी जाता है। सूबे की सरकार में रहते जेपी नड्डा बेहतर कर रहे थे। राज्य की सेवा करने के बाद नड्डा राष्ट्र सेवा में अपना योगदान देना चाहते थे। लिहाजा इसके लिए उन्होंने बड़ा फैसला लिय। लेकिन उनकी नज़र अब दिल्ली की तरफ थी। लिहाजा राज्य का मंत्रालय छोड़कर नड्डा ने राष्ट्रीय टीम की तरफ रुख किया। तेज तर्रार जेपी नड्डा को बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष नीतिन गडकरी ने अपनी टीम में शामिल किया। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता का जिम्मा दिया गया।
जेपी नड्डा की सटीक रणनीति की वजह से पार्टी को जबरदस्त फायदा हुआ। कई राज्यों में बीजेपी की सरकार बनाने में नड्डा की रणनीति काम आई। खासकर जब छत्तीसगढ़ में तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनी तो वहां के प्रभारी जेपी नड्डा ही थे। केंद्रीय राजनीति में जेपी नड्डा का कद धीरे-धीरे बढ़ता गया। जिस तरह से पार्टी के लिए नड्डा ने काम किया, उसका ईनाम भी मिला । 2012 में पार्टी ने जेपी नड्डा को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया। 2012 के बाद फिर 2018 में भी नड्डा संसद के ऊपरी सदन के सदस्य बने।
जेपी नड्डा संघ के भी काफी करीबी माने जाते हैं। नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी नजदीकी हैं। असल में जब मोदी हिमाचल प्रदेश के प्रभारी हुआ करते थे, तभी से वो नड्डा की रणनीति से प्रभावित हैं। यही वजह है कि जब राजनाथ सिंह मोदी सरकार में गृहमंत्री बने अध्यक्ष पद की  रेस में सबसे आगे जेपी नड्डा ही थे। हालांकि पार्टी ने ये जिम्मेदारी 2014 जीत के चाणक्य अमित शाह को सौंपी । बड़ी बात ये है कि इससे नड्डा ने अपने मनोबल पर हावी नहीं होने दिया। नड्डा और तत्परता से कार्य में लगे रहे । अध्यक्ष पद की रेस में अमित शाह से पिछड़ने के बाद भी जेपी नड्डा सटीक रणनीति बनाने की वजह से शाह के विश्वासपात्र बने रहे।
अमित शाह की टीम में नड्डा को अहम पद मिला। नड्डा का कद दिन दुगुना, रात चौगुना बढ़ता गया। कई राज्यों का प्रभारी बनाया गया। एक के बाद एक राज्यों में जीत के बाद पर्यवेक्षक के तौर पर नड्डा ही विधायकों से बात कर मुख्यमंत्री का फैसला करने लगे। मुश्किल वक्त में सही निर्णय लेने के लिए नड्डा विख्यात हो गए। जेपी नड्डा बीजेपी के संसदीय बोर्ड में भी अहम भूमिका में हैं। पार्टी के तमाम बड़े फैसलों में जेपी नड्डा शामिल रहते हैं। बताते हैं कि सरकार और संगठन के बीच नड्डा एक पुल की तरह काम करते हैं।
इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने नड्डा को बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया। कैबिनेट की पहली फेरबदल में जेपी नड्डा को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का अहम जिम्मा दिया गया। बतौर हिंदुस्तान के हेल्थ मिनिस्टर नड्डा बेहतर कर रहे हैं। जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए ही प्रधानमंत्री मोदी “सभी के लिए स्वाथ्य” जैसी योजना को लॉन्च किया। स्वास्थ्य एवं आरोयग्य केंद्र बनाने का निर्णय हुआ। मोदी सरकार ने जो 50 करोड़ लोगों के लिए 5 लाख तक का बीमा देने की रूप रेखा तैयार की है, उसमें भी स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का अहम योगदान है। यह नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है। “आयुष्मान भारत योजना” को भी नड्डा गेमचेंजर के रूप में देखते हैं। जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री रहते कई राज्यों में AIIMS बनाने का ऐलान हुआ। स्वास्थ्य  क्षेत्र में बेहतरी के लिए जेपी नड्डा लगातार कोशिश में जुटे हुए हैं। हाल ही में जेपी नड्डा को विश्व तंबाकू नियंत्रण के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन से विशेष मान्यता पुरस्कार भी मिला है।
संगठन में कर्मठता और मंत्रालय में बेहतर काम की वजह से ही एक बार उनके हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा भी हुई। 2017 के चुनाव के बाद सीएम की रेस में नड्डा भी थे। लेकिन बाद में उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में जारी योजनाओं को ही तरजीह देने का फैसला किया। विश्लेषकों का मानना है कि जेपी नड्डा हिमाचल की बजाय केंद्र में रह कर पीएम मोदी के मिशन 2019 में ज्यादा मददगार साबित हो सकते हैं।
हाल ही में मोदी ने अपनी महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की है। इससे देश के लगभग 50 करोड़ वंचित परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और उन तक बीमा योजना पहुंचाने का काम किया जायेगा। इसको लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर। स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा जानते हैं कि ये योजना सफल रही तो 2019 के लिए ये गेम चेंजर साबित हो सकती है।
जेपी नड्डा के नेतृत्त्व में स्वास्थ्य मंत्रालय में कई आमूलचूल बदलाव लाये गये हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय की सबसे महत्त्वपूर्ण कड़ी प्राइमरी हेल्थ सेंटर को मजबूत करने पर खासा जोर दिया है। मंत्रालय के मुताबिक जो भी बेसिक काम होता है, वह सब सेंटर पर ही होता है। अब तक सब सेंटर्स में जच्चा-बच्चा पर ही ध्यान दे रहे थे, लेकिन जेपी नड्डा ने इसमें कई पहलुओं को जोड़कर हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटर्स का रूप दिया है। लक्ष्य लगभग 1.5 लाख हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटर्स तैयार करने का है। इसके लिए 1,200 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गयी है। इसमें मातृत्व, नवजात, शिशु की चिकित्सा होगी। साथ ही, संक्रामक बीमारियों के लिए सभी 12 किस्म के टीकाकरण का इंतजाम होगा। ऑप्थैलमिक केयर, ईएनटी केयर, मेंटल केयर, डेंटल केयर, जिरयैटिक केयर। साथ ही, यूनिवर्सल स्क्रीनिंग की स्कीम को भी लॉन्च करने के आधार भी यही सेंटर्स होंगे। यानी, संक्रामक और गैर-संक्रामक, दोनों तरह की बीमारियों का इलाज किया जाएगा।’
30 साल की उम्र में ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्विक्स कैंसर, हाइपरटेंशन, डाइबिटीज जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों में की फ्री स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके लिए 100 जिलों का चयन कर ट्रेनिंग का काम पूरा हो चुका है। आगे चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार करते रहेंगे। हेल्थ पॉलिसी 2017 में प्रिवेंटिव से प्रमोटिव की तरफ जाने की बात है। इसके मद्देनजर ये सेंटर्स बेहद कामयाब होंगे।
मेडिकल एजुकेशन के लिए 24 मेडिकल कॉलेज खोलने की व्यवस्था है। टीबी को खत्म करने का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025 कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज में 17 स्पेशियलिटी को शामिल किया जाता है। स्वास्थ्य मंत्री का मानना है कि ये 17 स्पेशियलिटीज आएंगे तो क्षेत्र का विकास होगा ही।’
अपनी बेहतर रणनीति की वजह से मंत्रालय से लेकर पार्टी के अंदर तक सफलता के शीर्ष की तरफ आगे बढ़ रहे जेपी नड्डा ने कई देशों का दौरा भी किया है। अमेरिका, कोस्टा रिका, कतर, कनाडा, ग्रीस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने इन देशों की चुनावी प्रक्रियाओं का भी अध्ययन किया है। इसके अलावा स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को भी विस्तार से जाना। इसे भारत में यथासंभव लागू करने की कोशिश भी की।
जेपी नड्डा की पत्नी मल्लिका नड्डा का नाता भी सियासत से रहा है। दरअसल जेपी नड्डा और मल्लिका की शादी 11 दिसंबर 1991 को हुई थी। दोनों की मुलाकात हिमाचल यूनिवर्सिटी में ही हुई थी। मल्लिका नड्डा भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रही हैं। मल्लिका के पिता भी सांसद रह चुके हैं। फिलहाल वे हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में इतिहास की प्रोफेसर हैं। वे ‘चेतना’ नाम से एक स्वयंसेवी संगठन भी चलाती हैं। उनके के दो बेटे हैं जो उनका सहयोग करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के सबका साथ-सबका विकास की लकीर पर आगे बढ़ते हुए जेपी नड्डा हेल्थ सेक्टर को नई ऊंचाइयां देने की दिशा में काम कर रहे हैं। अपने लक्ष्य की तरफ लगातार बढ़ रहे हैं। नड्डा को उम्मीद है कि वो जरूर सफल होंगे।
” मंत्री नंबर-1 वर्ष 2018″ में फेम इंडिया ने एशिया पोस्ट के साथ मिलकर मंत्रियों की छवि, उनका प्रभाव, विभाग की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता और परिणाम जैसे कुल 10 बिंदुओं पर केंद्र सरकार के मंत्रियों का आकलन किया और उनमें उपरोक्त आकलन में जे पी नड्डा  “कर्मठ” कैटगरी में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर हैं.