हक़ की आवाज़ का ‘सिंह’नाद : इंदिरा जयसिंह

Indira Jaising, Prominent Lawyer, Women Empowerment, Fame India, Asia Post

बॉम्बे हाईकोर्ट के द्वारा पिछले 154 साल के इतिहास में नियुक्त की गई पहली वरिष्ठ अधिवक्ता, संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं के खिलाफ भेदभाव उन्मूलन के लिए बनी समिति की पहली भारतीय महिला सदस्य और पहली भारतीय महिला जो भारत की एडिशनल सोलिसिटर जनरल बनाई गईं. ये परिचय है  सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह का .

इंदिरा जयसिंह ऐसी महिला हैं जिनसे उलझने से पहले कोई भी दो बार सोचेगा जरुर. एक वकील और लीगल एक्टिविस्ट के तौर पर इंदिरा जयसिंह एक जाना माना नाम हैं. सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहीं इंदिरा जयसिंह मानवाधिकारों एवं संवैधानिक मूल्यों के लिए पूरी निष्ठा से काम करती रही हैं. उन्होनें करियर की शुरुआत लेबर कोर्ट से की थी और आज सुप्रीम कोर्ट आने वाले जेंडर जस्टिस के मामलों में न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए खास तौर पर जानी जाती हैं. ये मामले चाहे सबरीमाला मंदिर प्रवेश मामला हो या हदिया का अपने धर्म को चुनने का.

न्याय के सबसे बड़े मंदिर सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में इंदिरा जयसिंह को यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। ये बताकर उन्होंने सनसनी मचा दी थी. जयसिंह कहती हैं कि यह भारत में कानूनी पेशे का ‘गन्दा’ छिपा हुआ राज़ है जिससे ना सिर्फ महिला वकीलों बल्कि जजों को भी दो-चार होना पड़ता है. इंदिरा ने न्यायपालिका में महिला जजों की संख्या बढ़ाने की भी मांग करती रही हैं और सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम और दलित अधिवक्ताओं की कम नियुक्ति को लेकर भी सवाल खड़ा करती रही हैं.

मुंबई में जन्मीं इंदिरा जयसिंह की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में ही हुई. उन्होंने बंगलौर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की है. वर्ष 1962 में उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से LLM की डिग्री प्राप्त की. अपने पति आनंद ग्रोवर के साथ मिलकर साल 1981 में उन्होंने लॉयर्स कलेक्टिव नाम के एनजीओ की नींव रखी. यह एनजीओ ऐसे लोगों की मदद करता था जो पैसों के अभाव के कारण कानूनी लड़ाई नहीं लड़ पाते थे. हालांकि फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के उल्लंघन के चलते बाद में इस एनजीओ का लाइसेंस गृह मंत्रालय द्वारा स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया.  साल 1986 में इंदिरा जयसिंह ने ‘द लॉयर्स’ नाम से एक मासिक पत्रिका शुरू की जिनमें उन्होंने भारतीय क़ानून के सन्दर्भ में सामाजिक न्याय और महिलाओं के मुद्दों को उठाया. इन मुद्दों पर उन्होंने कई किताबें भी लिखीं हैं. इंदिरा को देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ और समाज के कमजोर वर्गों हक में लड़ने के लिए रोटरी मानव सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. सार्वजनिक मामलों में अपनी सेवाएं देने के चलते भारत सरकार ने 2005 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया.

इंदिरा जयसिंह का महिलाओं के खिलाफ भेदभाव, मुस्लिम पर्सनल लॉ, फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के अधिकार और भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. अभी हाल ही में इंदिरा ने याचिका दाखिल कर संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सुप्रीम कोर्ट में चलने वाली न्यायिक कार्यवाही के सीधे प्रसारण की मांग की. इंदिरा जयसिंह के ही नेतृत्व में वकील आनंदिता पुजारी ने सुप्रीम कोर्ट कैंपस में क्रेच खुलवाने के लिए 5 साल की लम्बी लड़ाई लड़ी है, जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई है. इंदिरा जयसिंह महिलाओं और ज़रूरतमंदों के हक़ के लिए एक मुखर आवाज़ हैं.

शक्तिशाली नारी शक्ति के इस सर्वे में फेम इंडिया मैगजीन – एशिया पोस्ट ने नॉमिनेशन में आये 300 नामों को विभिन्न मानदंडों पर कसा , जिसमें सर्वे में सामाजिक स्थिति, प्रतिष्ठा, देश की आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था पर प्रभाव, छवि, उद्देश्य और प्रयास जैसे दस मानदंडों को आधार बना कर किये गये स्टेकहोल्ड सर्वे में सुप्रसिद्ध वकील इंदिरा जयसिंह पांचवें स्थान पर हैं |