राजनीति में आने का मुख्य लक्ष्य लोगों का सेवा भाव

रणधीर कुमार सिंह, पूर्व विधायक (छपरा)

बिहार के दिग्गज नेता प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने की चुनौती को स्वीकारा और छपरा की राजनीति में पदार्पण कर लोगों का दिल जीत लिया। इनके जीने का मूल मंत्र साफ है “जीता है वह इंनसान जो दूसरों के लिए जिए।“राजनीतिक विरासत में मिली सीख आमजन की लगातार मदद करना ही राजनीति में आने का मुख्य लक्ष्य इन्होंने बनाया।

छपरा के पूर्व विधायक रणधीर कुमार सिंह अपने पिता प्रभुनाथ सिंह की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए 2014 में बिहार विधानसभा उपचुनाव से छपरा की राजनीति में पदार्पण किया। इस उपचुनाव में राजद टिकट पर चुनाव जीत कर इन्होंने बिहार विधानसभा में पहली बार प्रवेश किया। श्री सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय पटना से प्राप्त करने के बाद स्नातक दिल्ली से किया। उस वक्त इनके पिता महाराजगंज से लोकसभा सदस्य थे। समाज सेवा में गहरी रुचि रखने वाले रणधीर खुद गरीब बीमार एवं जरुरत मंद लोगों की आर्थिक से लेकर अन्य सभी कार्यों में मदद किया करते थे। रणधीर सिंह ने समाज सेवा के कार्यों में अपने आप को समर्पित कर  दिया।

इनके सेवा भाव को देखकर और स्थानीय जनता में लोकप्रियता को देखते हुए राजद, जदयू और कांग्रेस का गठबंधन ने उपचुनाव में संयुक्त उम्मीदवार बनाया, इन्होंने जीत दर्ज कर बिहार विधानसभा में प्रवेश किया।

 लगभग एक वर्ष तक विधायक के रुप में कार्य करने का मौका मिला जिसमें इन्होंने क्षेत्र की जनता के हर समस्या का समाधान का प्रयास किया। अपने अल्प कार्यकाल में रणधीर जनता के बीच युवा सोच के साथ युवा शक्ति के समन्वय का स्वरूप पेश करने में कामयाब रहे। उन्हें अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहने में अच्छा लगता है। तभी तो लोग इनकी पहचान के कायल हैं।