सबसे प्रभावशाली बिहारी 2016 की सूची में प्रेस काउंसिल के प्रमुख चंद्र मौली प्रसाद

जस्टिस चंद्रमौली प्रसाद – न्यायपालिका (चेयरमैन – प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया)

प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया का मुख्य कार्य प्रेस अर्थात पत्रकारिता की पहरेदारी है यह काउंसिल वर्तमान में प्रेस काउंसिल ऐक्ट 1978 के तहत कार्य करती है, जिसमें पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा के पक्ष में सहयोग से लेकर मीडिया पर लगे किसी भी आरोप की जांच तक शामिल है. इसके चेयरमैन सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज होते हैं. लोकतंत्र की मजबूती के साथ एक ओर जहां जिम्मेदार पत्रकारिता की जरूरत बढ़ती जा रही है वहीं पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता व समाज शासन-प्रशासन के सहयोगात्मक रवैये की जरूरत भी बढ़ती जा रही है.

वर्तमान में प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन व सुप्रीम कोर्ट से सेवा निवृत्त न्यायाधीश चंद्र मौली कुमार प्रसाद का जन्म बिहार के पटना में हुआ था.  इन्होंने लॉ की पढ़ाई पटना यूनिवर्सिटी से पूरी कर 1973 में पटना हाई कोर्ट में वकालत की शुरुआत की. 1989 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने. 1994 में इनकी नियुक्ति पटना हाई कोर्ट में स्थायी जज के तौर पर हुई. ये 2009 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने. 2010 में ये सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीश बने और 2014 में सेवानिवृत हुए. 2015 में इन्हें प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया का चेयरमैन बनाया गया. न्यायाधीश रहते हुए इन्होंने आम जन के हित में कई बड़े फैसले लिये.

इन्हें बेहद मजबूत इच्छाशक्ति वाला न्यायविद माना जाता है, प्रेस काउंसिल के चेयरमैन के तौर पर पत्रकारों पर आये दिन हो रहे हमले और उनकी सुरक्षा के मुद्दे पर इन्होंने विशेष कानून व इस तरह की घटनाओं के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के लिये सरकार को कहा है. कई जरूरी मुद्दों पर इन्हें पत्रकारिता की स्वतंत्रता का पक्ष में फैसला लेने वाला माना जाता है.

एशिया पोस्ट – फेम इंडिया सर्वे के सबसे प्रभावशाली बिहारी 2016 की सूची में प्रेस काउंसिल के प्रमुख चंद्र मौली प्रसाद 13 वें स्थान पर पाया गया है.